मेरे बदमाश दोस्त ने मेरी बीवी को लंडखोर बनाया

दोस्तो, मेरा नाम संजय है. मेरी बीवी का नाम अनु है. मैं 26 साल का हूँ और मेरी बीवी 25 साल की है. हमारी शादी को 5 साल हो गए हैं. हमारी एक बेटी है, वो अभी 4 साल की है. मैंने आज तक अंतर्वासना पर बहुत कहानियां पढ़ी हैं. तो अब मुझे लगा कि मैं भी अपनी कहानी भेजता हूं.

दोस्तो, किसी की कहानी सच हो ना हो, पर मेरी ये कहानी बिल्कुल सच है. इसमें बताई गई सारी बातें सच हैं.

हम राजस्थान के एक छोटे शहर में रहते हैं. पहले हम घरवालों के साथ संयुक्त परिवार में रहते थे, पर पिछले एक साल से हम कहीं अलग किराए के घर में रह रहे हैं. हमारी बेटी एक बोर्डिंग स्कूल में रह कर पढ़ने लगी है. यह हमारा घर, हमारे पुराने घर से काफी दूर था. इस कॉलोनी में हम नए थे, तो हमें कुछ दोस्तों की जरूरत थी. मेरी बीवी ने भी कुछ पड़ोस में दोस्ती कर ली और मैंने एक बहुत बड़ी गलती की कि कॉलोनी के एक बहुत ज्यादा बदमाश और नेता किस्म के आदमी से दोस्ती कर ली. उससे वहां के लोग बहुत डरते थे. मैंने उससे दोस्ती कर ली, मुझे पता नहीं था कि उस बदमाश दोस्त ने मुझसे दोस्ती सिर्फ मेरी बीवी के लिए की थी.

मैं मेरी बीवी से और मेरी बीवी मुझसे बहुत प्यार करती है. मैं एक प्राइवेट बैंक में सर्विस करता हूं और मेरी बीवी एक गृहणी है. वह बहुत सुंदर है. उसका फिगर 36-28-36 का है. वो इतनी ज्यादा हॉट है कि उसको देख कर कोई भी उसको चोदना चाहेगा. मेरा ये मवाली दोस्त भी यही चाहता था.

शुरू में मुझे पता नहीं चला. इस दोस्त का नाम करण पाल था. मैं उसे शुरू में घर लाने लगा. उसके पास स्कॉर्पियो गाड़ी थी और उसका नाम भी बहुत था, जिस कारण से मैं सोचता कि यह दोस्त अपने किसी काम आएगा और यह अच्छा आदमी है.

पर धीरे धीरे मुझे शक होने लगा क्योंकि जब करण पाल घर आता तो मेरी बीवी से काफी खुल के बात करता और से देख कर काफी अलग अंदाज में हंसता था. जब मैं ऑफिस में होता तो भी वह किसी ना किसी बहाने से मेरे घर आ जाता था और अनु से काफी मजाक करता था. इस कारण मुझे उस पर काफी शक होने लगा.

एक दिन जब मैंने रात को मेरी बीवी को चोद रहा था. तब मेरी बीवी ने कहा- करण पाल जी अच्छे आदमी हैं, मुझे वो अच्छे लगने लगे हैं. उसी समय मैंने सोच लिया कि इसका मतलब ये हुआ कि मेरी पत्नी भी उसकी ओर धीरे धीरे आकर्षित हो रही है.

फिर मैंने एक दिन मेरे उसी दोस्त करण पाल को घर बुलाया, चाय पिलाई और कहा- दोस्त आप बहुत अच्छे हो … पर मेरी बीवी को ये अच्छा नहीं लगता कि कोई भी घर में ज्यादा आए.

तो आप कृपया बुरा मत मानना … पर हम आगे से बाहर ही मिलेंगे. करण पाल यह सुनकर गुस्से से लाल पीला हो गया और उसने जोर से आवाज़ लगाते हुए मेरी बीवी को बुलाया- अनु भाभी … अनु जी … सुनिए.

मैं उसकी इस बात से हैरान रह गया. तभी मेरी बीवी भागती हुई आई और उसने पूछा- क्या हुआ जी, इतनी जोर से क्यों आवाज लगाई? करण झट से बोला- बताओ भाभी, जब मैं आपके घर आता हूं तो क्या आपको अच्छा नहीं लगता या आपको मैं बहुत बुरा लगता हूं? तो भाभी थोड़ा हंस के और थोड़ा डर कर तुरंत बोली- किसने बोला आपको? ऐसा बिल्कुल नहीं है … मुझे तो आप अच्छे लगते हो, हमें कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि आप आते हो तो, यह तो हमारा सौभाग्य है कि आप जैसे लोग बड़े लोग हमारे यहां आते हैं.

यह सुनकर करण पाल ने कहा- फिर ये पागल क्या बोल रहा है? मैं बहुत डर गया क्योंकि मैं जानता था कि करण पाल बहुत खतरनाक गुंडा है. मैं उसकी बात पर झूठ मूठ ही हंसने लगा. मैंने खिसियाते हुए कहा कि मैं तो मजाक कर रहा था … तुम्हें ऐसे ही परेशान कर रहा था.

करण पाल ने संजीदा होकर कहा- ऐसा मजाक मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है, दोबारा ऐसी वाहियात बात मत करना. मुझे तुम लोग अच्छे लगते हो, तो मैं बिल्कुल आपके घर आऊंगा … तुम्हें कोई परेशानी है … तो बताओ? मैंने तुरंत डरते हुए कहा- ठीक है. मैं उसी समय वहां से चला गया.

अगले दिन जब मैं ऑफिस से घर आया तो मैंने देखा कि अनु और करण पाल एक कमरे में पास पास बैठे थे और बातें कर रहे थे. यह देखकर मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा, लेकिन मैं क्या कर सकता था. मैंने तब भी हिम्मत जुटाते हुए कहा- क्या कर रहे हो? मेरी बात सुनकर मेरी बीवी उठ गई … लेकिन करण पाल वहीं बैठा रहा. अनु बोली- मैं चाय बना कर लाती हूं. अनु ये कहते हुए वहां से चली गई.

अब मैंने करण से पूछा- कब आए करण पाल? उसने ढीठता से बोला- यही एक घंटा हुआ है. उसकी बात सुनकर मैं सोचने लगा कि यह साला पिछले एक घंटे से इधर क्या कर रहा था.

वह फिर से बोला- मैं भाभी से पुरानी बातें कर रहा था. मैं उनके पढ़ाई के दिनों की बातें पूछ रहा था … और भी उनके साथ बहुत सी बातें हुईं. मैं कुछ नहीं बोला तभी अनु चाय लेकर आ गई. वो चाय पीकर कुछ देर बाद मेरे घर से चला गया.

फिर बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा. मैंने मेरी बीवी को एक दिन बहुत धमकाते हुए कहा- तुम उस करण पाल से रोज क्या बातें करती हो … और मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता.
मैंने उसको डांटते हुए और भी बहुत कुछ कहा. अनु रोने लगी और उस दिन मुझसे चुदाई भी नहीं कराई.

इस घटना के दो दिन बाद जब मैं ऑफिस से घर लौटा, तो फिर वही बात दिखी. वे दोनों पास पास बैठे थे, लेकिन इस बार अनु काफी उदास सी थी. दोस्त ने कहा- मेरे आने की वजह से भाभी को क्यों तंग करते हो? यह बहुत सीधी महिला हैं. करण पाल ने मुझे बहुत धमकाया और कहा- अगर तुमने आज के बाद दुबारा भाभी को तंग किया या कुछ बोला … तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा. अब मैं सोचने लगा कि क्यों मैंने इस घटिया गुंडे से दोस्ती की.

कुछ देर बाद करण पाल वहां से चला गया. अब मुझे लगने लगा था कि अनु भी करण पाल से पट गई है और इन दोनों की सैटिंग हो गई है.

मैं क्या करता … मैं बस काफी उदास होकर चुप रह गया था. उस दिन मैंने कुछ खाना भी नहीं खाया. अब मेरी अनु से भी कम बात होती थी और उसके साथ काफी दिनों से चुदाई का कार्यक्रम भी नहीं हुआ था.

तकरीबन एक हफ्ते बाद ऑफिस में मेरी थोड़ी तबियत खराब होने लगी तो मैं छुट्टी लेकर घर आ गया. घर आया तो मैंने देखा कि मेरे घर के आगे करण पाल की गाड़ी खड़ी थी. मैंने दरवाजा नॉक किया तो काफी देर बाद दरवाजा खुला. मैंने अनु से लगभग चिल्लाते हुए पूछा- इतना टाइम कैसे लगा? उसने कहा कि मैं तो कपड़े धो रही थी, करण पाल जी बैठे थे. उन्होंने तो दरवाजा खोला नहीं, तो मेरे को आने में थोड़ा टाइम लग गया.

मैं समझ गया कि हो ना हो, कुछ अलग सा हो रहा था. फिर करण पाल वहां से चला गया.

रात को करण पाल की गाड़ी का हॉर्न बजा. कुछ देर तक जोर जोर से हॉर्न बजता रहा. उस वक्त रात के दस बजे थे. मैंने गेट खोला तो देखा कि करण पाल और उसके दो हट्टे कट्टे दोस्त उसके साथ में थे. वे तीनों जबरदस्ती अन्दर में घुस आए और बोले- मेन दरवाजा बंद कर लो. मैंने कहा- ऐसा क्या हुआ भाई? “कुछ नहीं.”

दरवाजा बंद कर मैंने डर के मारे दरवाजा बंद कर लिया. तभी करण पाल जोर जोर से आवाज देने लगा- अनु … मेरी अनु जी …

अनु बाहर आ गई, उसने नाइटी पहन रखी थी. नाइटी में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी और इस वक्त उसके बाल भी खुले थे. उसका यह रूप देख कर नशे में धुत करण पाल पागल सा हो गया. उसने कहा कि भाभी आप कमरे में चलो … आप से आज 2 मिनट बात करनी है. मैंने कहा- क्या बात करनी है? मेरे सामने कर लो ना. करण पाल ने जोर से चिल्लाते हुए कहा- चुप!!

उसकी तेज आवाज से मैं डर गया.
मैं अभी कुछ करता कि तभी उसके दोनों दोस्तों ने मुझे पकड़ कर सोफे पर बिठा लिया और बोले- चलो दारू पीते हैं. मैंने देखा कि उन दोनों के पास पिस्टल थी. ये देख कर मैं बहुत डर गया.

करण पाल मेरी बीवी को बांहों में लेकर कमरे में ले गया और उसने गेट भी बंद कर लिया. उसने कमरा बंद कर लिया था. लेकिन उसने कुंडी नहीं लगाई थी. अन्दर ले जाकर वह मेरी बीवी को चूमने लगा और उसकी नाइटी के अन्दर हाथ डालने लगा.

मेरी बीवी की आवाज आ रही थी- यह क्या कर रहे हो प्लीज करण जी ये घर में हैं, अभी मत करो. पर वो नहीं माना. अनु बोली- क्या हो गया है आपको? आप नशे में हो.

यह सुनकर मैं कमरे की तरफ भागने लगा, तो उसके दो दोस्त जो करण के बॉडीगार्ड थे. वह भी मेरे पीछे पीछे भागे. मैंने दरवाजा खोला तो देखा उसने अनु को बेड पर लिटा रखा था और खुद ऊपर चढ़कर खुद चुम्मा चाटी कर रहा था.

यह देखकर मुझे बहुत गुस्सा आया. मैंने कहा- भाई यह क्या कर रहा है तू? यह क्या तरीका है तुम्हारा? यह मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा. अनु मेरी बीवी है … चुपचाप छोड़ दो इसे … नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा.

मेरे इतना कहते ही उसने जोर से बोला- तेरी मां का भोसड़ा कुत्ते … चुपचाप बाहर चला जा मादरचोद … नहीं तो तू मुझे जानता है कि मैं क्या हूँ. सुन तेरी बीवी को खूब मजा चाहिए, जो तुझसे इसे नहीं मिलता है. इसे वो मजा मैं दूँगा. यह सुनकर मैं अनु की ओर देख कर हक्का बक्का रह गया.

करण ने अनु की नाइटी को जोर से खींचा तो उसकी नाइटी एक झटके में ही पूरी खुल गई. अनु पैंटी और ब्रा में रह गई. करण बोला- अब देख तू … मैं क्या करता हूं. इतने में उसने कहा कि आज तो चाहे कुछ भी हो जाए … मैं मेरी अनु रानी को तेरे सामने ही मजा दे कर रहूँगा.

अनु के चेहरे पर डर जैसे कोई भाव नहीं थे.

करण बोला- साली कुतिया रंडी … तू इतनी खूबसूरत है … इतना जबरदस्त तेरा शरीर है … इतने दिन से इसी कामुक बदन के पीछे ही तो मैं लगा था. तेरे लिए ही तो तेरे साले इस पति के भागता फिर, इसे मनाया … इसे अपनी गाड़ी में घुमाया … सिर्फ तेरे लिए. तुम क्या सोचते थे कि मैं तुम्हारा अच्छा दोस्त हूं या तुम्हारा कोई भाई हूं, जो तुम्हारी ऐसे ही मदद कर रहा हूं. मैं ये सब सिर्फ तेरी बीवी को चोदने के लिए ही कर रहा था. आज मैं अनु को जी भर के चोदूँगा … पूरी रात इसकी चूत का मजा लूँगा और अपने दिल की हवस निकालूंगा.


यह कहकर उसने मेरी बीवी के बाल पकड़कर उसके आराम से उसके होंठ खाने लगा. अनु को बहुत दर्द हुआ तो उसने कर्ण को अपने ऊपर से हटाना चाहा.

अब मुझे लगा कि करण से लड़ने के लिए हमारे पास कोई चारा नहीं है, तो मैं बोल पड़ा कि भाई मेरी बात सुन … अनु तुमसे करा लेगी. मगर इसे तकलीफ न दो. मैंने कहा- भाई तुझे जो भी करना हो … वो सब तुमको मेरे सामने ही करना होगा. मैं तुम्हें सब करते हुए यहीं बैठ कर देखूंगा. मेरा जी बाहर जाने का नहीं कर रहा है … मुझे थोड़ा डर लग रहा है. प्लीज मैं तुम्हें देखूंगा लेकिन कुछ नहीं बोलूंगा … प्लीज मेरे सामने करो.

मैंने अनु को भी बोला- बिना नर्वस हुए आराम से करवा लो, जैसे मुझसे तुम चुदवाती हो, वैसे ही इससे भी चुदा लो … मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

इतना सुनते ही उसने अपने कपड़े उतार दिये, अब वो सिर्फ में चड्डी ही रह गया था. इसके बाद करण ने मेरी बीवी के ऊपर आकर उसको पूरी तरीके से दबोच लिया. वो अनु के मम्मों को मसलने लगा, चाटने लगा.

फिर उसने अनु की चोली खोल दी और उसके बोबों को जीभ से चाटने लगा. धीरे धीरे अनु के निप्पल अपने दांतों में दबा कर हल्के हल्के से खाने लगा. अनु की आहें निकलने लगीं. फिर करण अनु की चूत पर हाथ फेरने लगा. दो मिनट ऐसा करने से मेरी वाइफ भी गर्म होने लगी. वह भी सेक्स की अच्छी एक्सपर्ट और अच्छी चुदासी है. अब उससे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था, वह भी पूरी तरीके से गर्म हो गई और धीरे-धीरे उसका साथ देने लगी.

अब अनु भी करण के होंठ खाने लगी थी. करण मेरी बीवी को खूब चाट रहा था. मेरी बीवी इससे और भी गरम हो गई. करण ने अनु की चड्डी भी आधी खींच दी. अब अनु इतनी अधिक उत्तेजित हो चुकी थी कि वो सब कुछ भूल चुकी थी. अनु ने भी मस्ती में करण पाल की चड्डी खोल दी. चड्डी खोलने पर उसने अनु की भी चड्डी पूरी तरह से निकाल दी. अब वो दोनों बिल्कुल नग्न हो चुके थे. अनु उसका लंड सहलाने लगी.

करण ने मेरी बीवी के बाल जोर से पकड़े और लंड उसके मुँह की तरफ करते हुए कहा- ले चूस मेरी रंडी मेरा लंड चूस … साली कुतिया … मेरे टट्टे भी चाट साली … उसके ऐसा कहते ही अनु ने मेरी तरफ देखा, शायद उसे अचानक कुछ अजीब लगा कि संजय के सामने कैसे इसका लंड मुँह में लूँ? फिर मैंने उसे इशारा किया कि कोई बात नहीं … लंड चूस लो … कोई बात नहीं. ये सब देख कर अब शायद मुझे भी कुछ अच्छा लगने लगा था. मेरा लंड पता नहीं कैसे खड़ा हो गया.

तभी करण ने मेरी बीवी के बाल पूरी तरीके से पकड़ कर अपना पूरा लंड उसके मुँह में दे दिया. अनु उसके 9 इंच के विशालकाय लंड को पूरा मुँह में लेने लगी. उसका लंड मेरे लंड से काफी बड़ा था और मोटा भी था. ये सीन देख कर मुझे बहुत मजा आने लगा. उनकी चुदाई देखने से मुझे भी ऐसा लगने लगा था कि रियल ब्लू फिल्म की शूटिंग चल रही हो.

अनु करण के लंड को आगे पीछे करके खूब मस्ती से चाट रही थी. करण ने अपने आंड भी अनु से खूब चटवाए. अब तो मेरी बीवी उसके लंड और उसके शरीर से आकर्षित होकर खूब मजा ले रही थी. मैं भी उन्हें देखकर चुदाई का लाइव शो का मजा ले रहा था.

अब करण ने उसे ज़ोर से गोद में उठाया और अपने लंड के ऊपर एकदम से बिठा दिया … उसका लंड अनु की चूत में घुस गया. इससे अनु बहुत जोर से चीख पड़ी- अरे मर गई … आह मर गई. लेकिन करण को क्या फर्क पड़ना था. उसने अनु की चिंता किये बिना धीरे धीरे लंड डालना शुरू कर दिया. वो अपना पूरा लंड अन्दर पेल कर रुक गया. मेरी बीवी अनु करण के लंड को सहन नहीं कर पा रही थी उसके मुँह से दर्द भरी चिल्लपों जारी थी- ऊह … ऊआह … ओहह … करण … प्लीज़ आराम से … आह मुझे बहुत दर्द हो रहा है … प्लीज … मैं बाद में करवा लूंगी … अभी छोड़ो ना … बहुत तेज दर्द हो रहा है.

मुझे अनु की ये दशा देख कर न जाने क्यों बहुत मजा आने लगा. उधर करण पाल कौन सा उसे छोड़ने वाला था. उसने अनु से बोला- चल रे साली कुतिया रंडी … मादरचोदी वेश्या … आज तुझे जन्नत की सैर कराऊंगा …

उसने अनु की चूत में लंड को बड़ी जोर से आगे पीछे करना शुरू कर दिया. उसने अनु को खूब तेज चोदा. अनु की चूत ने भी करण के लंड को अपने अन्दर सैट कर लिया था, जिससे उसका दर्द खत्म होने लगा. अब अनु भी गांड उछाल कर करण का साथ देने लगी ‘आऊ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आआह!

पूरा कमरा इस चुदाई से गूंज उठा. फिर करण पाल ने दस मिनट बाद लंड निकाला और उसे घोड़ी बना कर पीछे से लंड पेल दिया.

करण ने अनु को घोड़ी बनाया और उसकी चूचियों को पकड़ कर उसे खूब चोदा. चोदते समय करणपाल ने अनु की गांड पर भी जोर जोर से थप्पड़ मारे. वो बहुत जोर से थप्पड़ पर थप्पड़ मारता रहा … जिससे अनु की गांड लाल हो गई. अनु भी सिर्फ मजा ले रही थी. वो कुछ नहीं बोली, सिर्फ आह आह कर रही थी. मुझे अनु पर थोड़ी दया आई क्योंकि उसकी गांड बिल्कुल लाल हो गई थी. हालांकि मुझे मजा आ रहा था तो मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

पांच मिनट बाद अनु ने पोजीशन बदलने को कहा, तो करण चित लेट गया और अनु उसके खड़े लंड पर चुत फंसा कर बैठ गई. करण ने नीचे से अपनी गांड उठा कर चुदाई शुरू कर दी. अनु भी कमर हिला हिला कर लंड ले रही थी.

कुछ देर जोर से चुदाई करवाने के बाद अनु झड़ गई. अनु झड़ने के बाद एकदम से थक कर करण के सीने पर गिर गई. करण पाल अभी भी बाकी था, तो वो भी बहुत जोर जोर से झटके देने लगा. कुछ देर बाद वो भी झड़ने को हो गया. करण ने अपना लंड चूत से निकाल कर उसका रस अनु के मुँह पर छोड़ दिया. अनु के गुलाबी गाल पर लंड रस चिपक गया था.

उसने कहा- अरे यार यह क्या किया … मेरा मुँह खराब कर दिया … इधर उधर ही छोड़ देते. उसने कहा- साली कुतिया … मेरी मर्जी जिधर गिराने की होगी … वहां छोडूंगा. अब मैं वहां से चला गया और बाहर मुट्ठी मार कर सो गया.

करण के दोनों दोस्त भी दारु के नशे में टुन्न होकर बाहर सोफे पर ही सो गए थे.

करण पाल और अनु दोनों अन्दर ही सो रहे थे. उस रात करण पाल ने अनु को दो बार और रगड़ रगड़ कर चोदा, उसकी गांड भी मारी थी. अनु ने बताया था कि वो गांड मराने में बहुत रोई थी. लेकिन करण ने उसकी गांड मार कर ही दम ली थी.

फिर सुबह होते ही अपने दोनों दोस्तों के साथ चला गया. इसके बाद तो क्या था … उसकी तो लॉटरी लग गई थी. वो हमेशा ही अनु की चुदाई के लिए आने लगा. वो हर एक दिन छोड़ कर आता और मेरी बीवी को रगड़ रगड़ के चोद कर चला जाता. अनु को उसका लंड पसंद आ गया था, वो भी उसका खूब साथ देने लगी. उसे अब उसकी खतरनाक चुदाई में मजा आने लगा था. मैंने उससे कहा- ये क्या है … रोज क्यों चुदवाती हो उससे? तो उसने गुस्से से कहा- तुम ही मना कर दो ना उसे … यह सब हुआ तो तुम्हारी वजह से ही है … ना तुम उससे दोस्ती करते … ना उसे घर लाते तो वो क्यों मेरे साथ ये सब करता. तुमने ही उससे मेरी चुदाई के लिए हां कहा था, तुम्हारे कहने पर मैंने पहली बार उससे चूत चुदवाई थी. अब मैं कुछ नहीं कर सकती, जो कुछ करना है वह तुम्हें ही करना है. अब मैं क्या कर सकती हूं.

ऐसा कहकर अनु बहुत गुस्से में वहां से निकल गई और मैं चुपचाप खड़ा रहा.

दोस्तो, सच पूछो तो मुझे भी मजा आने लगा. जब करण कमरे में अनु को चोदता था, तो उसकी कामुक आवाजों में मुझे बहुत मजा आता था. जब वह गांड मराते हुए चिल्लाती थी- धीरे चोदो जानू धीरे चोदो जानू … मैं तुम्हारी हूं … मैं रोज ही तुमसे चुदवाऊंगी. तो उसकी इन आवजों को सुनकर मुझे बहुत मजा आता था. हालांकि मुझे पता था कि इसमें आगे बहुत खतरा है, पर मैं क्या करता.

ये सब खुले आम चलने लगा था, हद तो तब हुई … जब एक दिन रविवार का दिन था, दोपहर का वक्त था. अनु किचन में खाना बना रही थी. मैं किचन के बाहर कुर्सी पर बैठा था. अचानक करण पाल आया और जोर से आवाज लगाई- अनु मेरी जान. अनु बोली- रूको मैं किचन में हूँ … आ रही हूँ.

पर वो यह सुनते ही किचन में आ गया और उसने अनु को गोद में उठाया और कमरे में लेकर जाने लगा. इस पर अनु ने गुस्से में नहीं, बल्कि प्रेम से बोली- करण रुको ना, प्लीज़ खाना तो बनाने दो. करण पाल ने कहा- नहीं मेरी जान अभी तुझे चोदने का बहुत मन है … मुझसे रुका नहीं जाता. अनु मुझसे बोली- संजय कुकर बंद कर देना … मैं अभी करण से चुद कर आ रही हूँ.

यह सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया, पर मैं चुप रहा. वो उसे कमरे में ले गया, उसने कमरे का गेट भी आधा खुला छोड़ दिया.

मैंने देखा कि अन्दर ले जाते ही उसने जोर से बेड पर पटका और अनु के होंठ खाने लगा. फिर तुरन्त उसने उसकी नाईटी खोल दी, अगले ही पल अनु सिर्फ पेंटी में थी. ब्रा उसने पहनी ही नहीं थी. मुझे खुले दरवाजे से उन दोनों का खेल साफ दिखाई दे रहा था. ये अनु को भी पता चल गया था तो उसने बोला- करण जी, गेट तो बंद कर लो.

वो बोला- कुछ नहीं … रहने दो … तुम्हारे पतिदेव को भी देखने दो … उस चुतिये को भी तो पता चले कि शानदार चुदाई क्या होती है.

इतना कहकर उसने अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो गया.

करण बोला- ले चूस मेरा लंड … चाट मेरे आंड … मेरी कुतिया … मेरी रंडी … साली वेश्या … आजा!

अनु उसका लंड सहलाने लगी और सीधा मुँह में ले लिया. वो बहुत जोर से करण का पूरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. अनु कभी लंड चूसती, कभी उसके आंड चाटती. अनु इतना जल्दी जल्दी और इतना जबरदस्त चूस रही थी, बिल्कुल कुल्फी की तरह लंड चुसाई हो रही थी. साली अनु ने मेरा लंड कभी भी इस तरह से नहीं चूसा था … और आंड तो आज तक नहीं चाटे थे. आज अनु उसको क्या मजे दे रही थी. मेरी झांटे सुलग रही थीं.

बहुत देर तक लंड चुसाने के बाद करण ने मेरी बीवी को घोड़ी बना लिया और अपना विशाल लंड अनु की चूत में अन्दर तक डाल दिया. वो बहुत बार उसे चोद चुका था, इसलिए उसे अब दर्द नहीं हो रहा था. अनु भी पूरी मस्ती में ‘आआह … आऊऊहह … आआआह …’ करती हुई मजे से चुदवा रही थी.

वो कुत्ता करण उसे खूब गाली दे कर गांड पर चमाट मारे जा रहा था. अनु मस्त होकर बोल रही थी- हाय जानू चोदते रहो … मुझे खूब मजा आता है … तुम ऐसे चोदते हो तो चूत गर्म हो जाती है. अब तो मुझे संजय के लंड से मजा ही नहीं मिलता तुम्हारा लंड मुझे बड़ी तसल्ली देता है.

अनु की बात सुनकर मेरी झांटें सुलग गई थीं. उधर करण अनु को चोदता गया.

फिर अनु झड़ने वाली थी, तो अनु खुद ही झटके देने लगी. वो गांड पीछे कर कर के लंड लेने लगी. उसकी चूत में जैसे आग लग गयी हो. अनु झड़ गई और कुछ समय बाद करण भी झड़ गया. मेरी बीवी के मना करने के बाद भी करण ने जबरदस्ती अपना सारा माल अनु के मुँह पर चेहरे पर छोड़ दिया. अनु ने सिर्फ इतना कहा- ऐसे मत किया करो यार!

मुझे उसकी बात से बहुत गुस्सा आया क्योंकि जब मैं ये करता, तो वह मुझे मारने को हो जाती. पर उससे वो कुछ नहीं बोली. करण ने खुद को साफ किया और चला गया.

अनु भी नहाने चली गई. वो बाथरूम जाते हुए मुझसे बोली- सुनो खाना बना लो … मैं थक गई हूँ. जब खाना बन जाए तो बुला लेना और मुझे भी खिला देना. मुझसे इस वक्त कुछ नहीं होगा.

मैं क्या करता दोस्तो … इसके आगे तो करण ने मेरी बीवी अनु को न केवल खुद खूब चोदा बल्कि अपने फायदे के लिए अपने दोस्त से … और यहां तक कि एक 65 साल के वहां के नेता से भी अनु की चूत चुदाई करवा दी.

अब अनु सच में रंडी बन गई है. सब मेरी वजह से हुआ है. बताओ दोस्तो … अब मैं क्या करूँ. हो सकता है कि मेरे आगे जीवन में अनु की रंगीन जवानी को लेकर मैं आगे एक और कहानी आप सभी के लिए ला सकूँ क्योंकि अनु अब लंडखोर हो गई है. धन्यवाद. लेखक के अनुरोध पर इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.

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