मेरी गांड की पूजा

दोस्तो, यह कहानी मेरे एक मित्र दीपक की है जिसने मुझे बताई है। जब उसने अन्तर्वासना पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ी तो अपनी कहानी प्रकाशित करने के लिए कहा। जो कुछ उसके साथ हुआ है, इस कहानी के माध्यम से उसकी ही जुबान से:

मेरी आयु 20 वर्ष है, मैं एम ए प्रथम वर्ष का छात्र हूँ। यह घटना 3 वर्ष पुरानी है जिसे आज मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। बात उन दिनों की है जब मैं B.A के पहले साल में था। मेरे दो दोस्त राजेश और कमल मेरे ही साथ ही हॉस्टल में बगल वाले कमरे में रहते थे। उनके पास उनका पर्सनल कम्प्यूटर था, वे दोनों अक्सर कालेज से छूटने के बाद शाम को कम्प्यूटर पर चेटिंग करते थे और फ़िल्में देखा करते थे, मैं भी उन के साथ कभी कभी फ़िल्में देख लिया करता था।

एक दिन मुझे कुछ नोट्स की जरूरत पड़ी तो मैं नोट्स लेने उनके कमरे में गया तो वो दोनों एक दूसरे का लंड पकड़ कर एक दूसरे का मुट्ठ मार रहे थे। मैं तुरंत बाहर आकर अपने कमरे में वापिस आ गया। मैंने उनको मुट्ठ मारते देखा था तो अब मेरे अन्दर हलचल होने लगी और मेरा लिंग ठुमके मारने लगा। मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर अपनी मुठ मारी तब जाकर मुझे राहत महसूस हुई लेकिन अन्दर ही अन्दर ‘वो क्या देखकर मुठ मार रहे थे’ जानने की इच्छा हो रही थी।

मैं फिर से उनके कमरे में गया, अब वो दोनों बिल्कुल नंगे होकर 69 के आसन में एक दूसरे का लिंग चूस रहे थे। मुझे देखते ही मुझे अन्दर आने और दरवाज़ा बंद करने के लिए कहा और वो दोनों पुनः अपने काम में लग गए। मैं उनको खड़े खड़े देख रहा था और मेरे लिंग लुंगी के अन्दर ही अन्दर उछल-कूद कर रहा था, मैं अपने लंड को लुंगी के बाहर से पकड़ कर मसल रहा था।

तभी राजेश बोला- वहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो? मजा लेना है तो लुंगी उतार दो और आ जाओ। मैंने भी अपनी लुंगी खोल दी और मुठ मारने लगा। तभी वो दोनों खड़े हो गए और नीचे बैठकर बारी बारी मेरा लंड चूसने लगे। अब मुझे एसा लग रहा था कि मानो स्वर्ग का सारा सुख मिल गया हो। मैं भी अपनी कमर हिलाहिला कर उनके मुँह के अन्दर लंड पेल रहा था।

तभी कमल बोला- ऐसे मजा नही आ रहा है, सब एक दूसरे का चूसते हैं। और हम लोग गोल घेरा या त्रिभुज बनाकर एक दूसरे का लंड चूसने लगे, अब सबको एक बराबर मजा मिल रहा था। अब कमरे में ‘हुम्म्म म्म्म म्म्म्म्म् फअकक पुच्च च्च्च च्च च्च्च्च च्च्च्च सपड़ सपड़’ की आवाजें आने लगी जिससे कमरे का माहौल और सेक्सी और रूमानी हो गया।

तभी कमल अपने हाथ में थूक लेकर मेरी गांड पर लगा कर मेरी गांड में उंगली करने लगा, साथ ही साथ मेरे लंड को भी चूसते जा रहा था जिससे मुझे दर्द कम मजा अधिक आ रहा था। धीरे धीरे कमल ने अपनी दो उंगलियाँ भी मेरे गांड में डाल दी जिससे मुझे अब दर्द हो रहा था, मैंने भी सोचा कि चलो देखा जायेगा।

कुछ देर उंगली अन्दर बाहर करने मेरे गांड का छेद भी कुछ ढीला हो गया था और मजा भी आने लगा था। इसी तरह 15 मिनट करते करते करते हम तीनों का लंड रस निकल गया जिससे तीनों ने अपने गलों को तर किया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

राजेश- क्यों दीपक, मजा आया ना? कहो कैसा लगा? कमल- क्यों दीपक बोलो, गांड की खुजली मिटी या नहीं? राजेश- क्यों कमल, तुमने दीपक की गांड भी चोद दी, क्या मुझे पता भी नहीं चला। कमल- मैंने तो उंगली भर डाल कर ढीला किया है। क्यों है न? मैं- हाँ, मजा तो आया पर गान्ड में दर्द हो रहा है।

राजेश- होता है… होता है, पहली पहली बार होता है। अब नहीं होगा, हमारे भी हुआ था पर अब नहीं होता। मैं- मतलब तुम लोग एक दूसरे की गांड भी मारते हो? दर्द नहीं होता? राजेश- कहा न… पहली बार ही होता है। एक बार लंड का सुपारा अन्दर गया तो दर्द बाहर फिर मजा ही मजा… लगता है तुमने अभी इसका स्वाद नहीं चखा है। कमल, आज इसको मजा दिला ही देते हैं। कमल- क्यों दीपक, लेना है न मजा?

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूँ, मैंने अपनी सर हिला दिया, वैसे तो मेरे भी इच्छा हो रही थी क्योंकि जब से कमल ने मेरी गांड में उंगली डाली थी, तब से एक अजीब प्रकार की खुजली हो रही थी।

कमल- यार राजेश, जब हम कोई काम पहली बार करते हैं तो पूजा अवश्य करते हैं। और फिर दीपक के दरवाजे का दीदार होना है तो इसकी पूजा भी तो करनी होगी। राजेश- ठीक कह रहे हो, जाओ बाजार से कुछ मिठाई ले आओ।

राजेश के कहने पर कमल कपड़े पहन कर बाजार चला गया और राजेश ने अपने लैपटोप पर ब्लू दिखाने लगा। ब्लू फिल्म गे लड़कों की थी। फिल्म देखते देखते हम दोनों फिर उत्तेजित होने लगे तब हम दोनों ने एक दूसरे के लंड को पकड़ कर सहलाना चालू कर दिया और बाद मैं एक दूसरे का लंड चूसते चूसते एक दूसरे के मुँह में पिचकारी छोड़कर अपनी गर्मी को शांत किया।

कुछ देर बाद कमल बाजार से आ गया, वह अपने साथ एक बियर की बोतल भी लाया था। पहले बियर के तीन जाम बनाने के बाद एक जाम मुझे भी पकड़ा दिया।

मैंने पहले कभी बियर नहीं पी थी लेकिन उनके कहने पर मैंने जैसे ही एक घूंट पिया तो मुझे उल्टी सी होने लगी। तभी कमल ने मुझे एक ही घूंट में पीने को कहा और मैं एक ही घूंट में पी गया। थोड़ी देर बाद फिर उन्होंने मुझे एक जाम और दिया लेकिन अब मुझे उबकाई नहीं आ रही थी तो मैं धीरे धीरे पीने लगा।

अब मुझे बियर का नशा छाने लगा और सब घूमता सा नजर आने लगा लेकिन एक आनन्द आ रहा था। कमल- दीपक ठीक तो हो न, कोई दिक्कत तो नहीं? कैसा लग रहा है? मैंने सर हिला कर उत्तर दिया।

तभी कमल ने अपने लंड के उपर रसगुल्ले का रस लगाकर मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड पर झुका दिया और लंड को चूसने के लिए कहा। अब मैं नशे में था और उसके मीठे लंड को चूसने लगा। ‘आअह खा ले मेरे लंड को आआ… आआह…’

तभी राजेश ने मेरे पिछवाड़े में जाकर रसगुल्ले के रस को लगाया और अपनी जीभ से गांड के छेद को चाटने लगा और बोला- हुम्म… बड़ी प्यारी और मीठी गांड है तुम्हारी… आआउ! चपर चपर कर जीभ रगड़ने लगा, जीभ के खुरदुरेपन से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

कुछ देर चाटने के बाद राजेश ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर लगाकर हल्के से धक्का दिया तो लंड का टोप मेरे गांड के अन्दर चला गया। ‘आआआ आआआआह अईईईई ईईईई…’ मुझे इतना दर्द हुआ कि मैं चिल्लाने वाला था पर मेरे मुँह में कमल का लंड घुसा हुआ था। मेरी आँखों में आँसू आ गये।

राकेश- बस बस थोड़ा और सब्र करो मेरे प्यारे, अभी मजा आने लगेगा। तभी राकेश ने एक धक्का दिया तो पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर हो गया। मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरी गांड में लोहे का गर्म सरिया डाल दिया हो पर मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा था, आगे से कमल मेरा मुँह चोद रहा था और पीछे से कमल मेरी गांड… राजेश धक्का मार रहा था, तभी एक जोर से धक्का दिया तो मैं आगे सरक गया जिससे कमल का लंड मेरे गले तक पहुंच गया।

कुछ देर करते करते मेरी गान्ड का छेद भी फ़ैल गया था और मुझे भी मजा आने लगा था, अब मैं भी उनक साथ देने लगा और अपनी गांड आगे पीछे करने लगा। मैं – इस्स्स स्स स्स्स स्स्स्स आआआअ पुच्चपूच्च हाआअय और डाल दो… आआआआह माआजा आआअ रह्ह्ह्ह्हा है फाड़ दो आज साली को ! अब कमरे में ‘फक फक आआह’ के अलावा कोई दूसरी आवाज नहीं आ रही थी। कुछ देर बाद कमल का पानी छूट गया और वो मेरे सामने आ गया और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। मुझे घिन आ रही थी फिर भी उसने मेरे मुंह में डाल दिया।

अब राकेश मेरी गांड मारने लगा, उसका लंड कमल के लंड से बड़ा और मोटा भी था, मैंने उसको मेरा छेद को चिकना करने के लिए कहा लेकिन उसने नहीं सुना और एक जोरदार झटका मार कर मेरे गांड में अपना लंड पेल दिया। मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था, वह जोर जोर से झटके मारने लगा।

मैं- आआआअ… धीरे करो, लगता है न! राकेश- अबे भोंसड़ी के, कमल से मरवा रहा था तो दर्द नहीं हो रहा था मेरे से दर्द हो रहा है? आज मैं तेरी फाड़ के रहूंगा! और राकेश जोर जोर से धक्के मारने लगा। इधर कमल का भी लंड फिर से कड़क मुसल सा खड़ा हो गया और मेरे मुँह में जोर जोर से लंड डालने लगा जिससे उसका लंड मेरे गले में फंस रहा था।

तभी राकेश ने एक जोर से झटका मार कर अपना लंड का पानी मेरे अन्दर छोड़ दिया और अपना लंड बाहर निकाल लिया और अपने लंड को कमल से चुसवाने लगा।

काफी देर घोड़े की पोजीशन में होने के कारण मेरे पैर दुखने लगे थे। मेरा लंड अभी खड़ा था तो मैं खड़ा हो गया और कमल के पीछे आ गया और उसकी गांड में अपना लंड डाल मैं उसकी गुदा मारने लगा और उसके लंड को सहलाता भी जा रहा था।

कमल- आ जा मेरी जान, बहुत देर से तेरी गांड मर रही है, अब तू भी मजा ले ले, आ जा मेरी गांड में डाल दे अपना हथियार… देखें तुम्हारे में कितना दम है। अब मैं भी कमल के पीछे आ गया और एक ही झटके में अपना लन्ड अन्दर कर दिया। कमल और राकेश की एक दूसरे से गांड मरवाते मरवाते फ़ैल चुकी थी जिस कारण मेरा लंड एक ही झटके में अन्दर चला गया और झटके मारने लगा।

तभी ‘यार राकेश, अब तू घोड़ा बन जा, अब तेरी गांड मारनी है!’ कमल ने राकेश को घोड़ा बनने के लिए कहा तो राकेश घोड़ा बन गया। अब कामल ने राकेश की गांड मारनी शुरू कर दी। इस तरह से हम तीनों एक दूसरे की गांड मारते रहे। बीस मिनट करते करते मैंने अपना लंड रस उसकी गांड में छोड़ दिया और लंड बाहर निकाल लिया तो राकेश ने मेरे लंड को अपने मुँह से चाट कर साफ कर दिया। इसी तरह हम तीनों ने रात भर बारी गांड और मुँह को चोदा।

सुबह मेरी गांड में बहुत जोरों का दर्द हो रहा था लेकिन मजा आ गया था। इसी तरह हम तीनों जब कभी मिलते हैं तो एक दूसरे की गान्ड चुदाई अवश्य करते हैं।

भाई लोग बताते हैं कि कोई दर्द नहीं होता पर असली में गांड मरा कर देखो तब पता चलेगा कि दर्द होता है या नहीं। तो दोस्तो, यह थी मेरी गांड की पूजा की कहानी। कैसी लगी इसका उत्तर अवश्य दें। आपका दीपक [email protected]

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