नवविवाहिता की कामुकता को अपने लंड से शांत किया-3

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कहानी का पहला भाग: नव विवाहिता की कामुकता को अपने लंड से शांत किया-1 कहानी का दूसरा भाग: नव विवाहिता की कामुकता को अपने लंड से शांत किया-2

अब तक आपने मेरी पढ़ा कि मैं अपने ऑफिस की नई शादी हुई लड़की को उसकी मर्जी से उसके घर में एक बार चोद चुका था. इसके बाद मैंने उसे 69 में होकर चूत और लंड चूस चाट कर ओरल सेक्स यानि मुख मैथुन करना सिखाया. सुबह को मैं अपने घर आ गया. अब आगे:

घर आ कर एक बार फिर मैंने नींद मारी। जब मेरी नींद खुली तो मुझ में काफी ताजगी सी लग रही थी, मेरी बीवी मेरे लिये चाय बनाकर ले आयी, मैं उसको प्यार करना चाहता था तो उसने सोये हुए बच्चे की तरफ इशारा करके मुझे मना कर दिया। फिर मैं उठा और नहा धोकर ऑफिस को चल दिया।

मेरे ऑफिस पहुँचने के कुछ देर बाद ही प्रिया भी ऑफिस पहुंच गयी। लाल रंग के सूट में और हल्के मेकअप में वो आज किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। रोज उसके चेहरे पर उदासी छायी रहती थी, पर आज वो चहक रही थी। आते ही आज उसने मुझसे हाथ मिलाया, जबकि आज से पहले उसने मुझे कभी नमस्ते का जवाब भी नहीं दिया था। फिर वो सर के बारे में पूछने लगी, जब मैंने उसे विश्वास दिला दिया कि अभी ऑफिस में हम दोनों के अलावा केवल पियून ही है तो उसने पियून को बुलाया और उसे पैसे देकर कुछ नाश्ता और चाय लाने के लिये बोला.

पियून के जाते ही वो मुझ से बोली- आज मैंने भी अपने बाल बनाये हैं। मैं समझ गया कि वो अपनी झांटों की बात कर रही है, लेकिन मजा लेने के लिये उसके बालों की तरफ इशारा करते हुए कहा- तुम्हारे बाल तो वैसे ही हैं जैसे कल रात थे; और मुझे तुम्हारे ये लम्बे बाल पसंद भी हैं। वो उठकर मेरी तरफ आयी और मेरे हाथ को पकड़ कर अपनी चूत पर लगाते हुए बोली- यहां के बाल बनाये हैं।

मैं भी बहुत बेशर्म हूं, मैंने कहा- ऊपर से कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मैंने प्रिया की चूत को सलवार के ऊपर से ही मसल दिया। “तुम बहुत बेशर्म हो।” “अच्छा, बेटा खुद तो तुमने आ कर बताया कि तुमने बाल बनायें हैं और मुझे बेशर्म कह रही हो? मैंने तो तुमसे कुछ पूछा भी नहीं था।” “तो क्या हुआ?” वो बोली- फिर भी तुम बेशर्म हो। “ओके, तो इस बेशर्म को दिखा तो दो कि तुम्हारी चमेली दिखने में कैसी चिकनी लग रही है?”

वो वापस अपनी सीट पर गयी और अपने काम करने में मगन हो गयी, मैं बहुत कहता रह गया, लेकिन मानी नहीं, तभी वो पियून चाय नाश्ता लाते हुए दिखायी दिया, तो उसको पास आता देख कर प्रिया बोली- मेरा प्यारा बेशर्म, अब तुम इसको शाम को ही देखना! कह कर हँस दी। मैंने भी हँसी में उसका साथ दिया।

तभी बॉस भी आते हुए दिखायी दिए और फिर दिन भर हम लोग काम निपटाने में लग गये।

एक बार शाम को फिर मिलने का वादा हुआ और मुझे एक बार फिर से अपनी बीवी से झूठ बोला और प्रिया के घर चल दिया।

जब मैं प्रिया के घर पहुँचा तो वो एक लाल साड़ी पहने हुए थी। एक ही रात में उसके चेहरे की रौनक लौट आयी थी। उसने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों उसके कमरे में पहुँच गये। “तुम रात में भी साड़ी पहन कर सोती हो?” मैंने पूछा तो बोली- हाँ! “मैक्सी खरीद लो, आराम रहेगा।” “ठीक है।”

मैं जाकर सोफे पर बैठ गया, प्रिया मेरे बगल में बैठ गयी और बोली- कल रात तुमने मेरी जिंदगी बदल दी। इसी तरह वो पता नहीं क्या बोलती रही, मैंने उसके कंधे से अपने हाथ को डाला और उसके ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके मुलायम मुलायम मम्मे के साथ खेलने लगा। वो अपनी बातें बताती जा रही थी और मैं हाँ हुं… कहता हुआ उसके मम्मों के साथ खेलने में लगा हुआ था।

जब उसकी बात खत्म हुयी तो मैंने कहा- प्रिया, तुम दिखाओगी नहीं क्या? वो झट ही बोली- मैं तो कब से इंतजार कर रही थी कि तुम बोलो! “तो देर किस बात की है? चलो दिखाओ?” “तुम खुद ही देख लो!” वो बोली। “नहीं, मजा तब है कि तुम मेरे सामने खड़े होकर अपने एक एक कपड़े उतारो और मैं तुम्हें नंगी होता हुआ देखूं।”

एक मिनट वो मेरी तरफ देखती रही, मानो कह रही हो कि तुम ही मुझे नंगी करो, लेकिन जब मेरी तरफ से कुछ रिस्पॉन्स नहीं मिला तो वो उठी और मेरे सामने खड़े होकर अपने हाथों को हरकत देते हुए अपनी साड़ी में फंसी हुयी सेफ्टी पिन को खोल कर अपनी साड़ी के पल्लू को एक किनारे कर दिया। नाभि के काफी नीचे उसने साड़ी बांधी हुयी थी, प्रिया के ब्लाउज में बंद उसके मम्मे और उसकी नाभि ने मुझे आकर्षित किया और मैं अपनी जगह से उठा और प्रिया की कमर को पकड़ उसकी नाभि में अपनी जीभ चलाने लगा और उसके पेट को कस कर मसलने लगा।

फिर मैं प्रिया के पीछे गया और उसके मम्मे को ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए उसके गले में किस और कान को बारी बारी से दांत काट लेता था, प्रिया आह कह कर चुप हो जाती।

उसके मम्मे दबाते दबाते कब उसका ब्लाउज उतर गया, मुझे भी नहीं पता चला। फिर प्रिया को मैंने अपनी तरफ घुमाया और उसके होंठों को चूसने लगा और साथ ही उसके ब्रा को भी उसके जिस्म से अलग कर दिया और उसके मम्मो को बारी-बारी मुंह में भर लेता। उसके बाद मैंने एक झटके में ही प्रिया के जिस्म से उसकी साड़ी और ब्लाउज को अलग कर दिया। नीचे वो पैन्टी नहीं पहने थी, उसकी चिकनी और पाव रोटी जैसे फूली हुयी खूबसूरत चूत मेरी नजर के सामने थी।

मैंने बिना देर किये उसकी चूत को चूम लिया और वापस सोफे पर आ कर बैठ गया। मेरी नजर उस फूली हुयी पाव रोटी के बीच में जाकर फंस गयी। प्रिया अपने पैरों से अपनी चूत को छिपाने की कोशिश कर रही थी। मैंने भी अपने सब कपड़े उतार दिये और प्रिया को देखकर मुठ मारने लगा, फिर मैंने प्रिया को इशारे से अपने पास बुलाया, मैं उसके एक एक अंग को सहलाने लगा। उसकी जांघों को, जांघों के बीच से हाथ डाल कर उसकी गांड को सहलाना और फिर उसकी चूत में उंगली डाल देना!

उसकी चूत गीली हो गयी थी, मैंने उसकी दोनों फांकों को फैलाया और अंगूठे को उसकी फांकों के बीच चलाने लगा, उसकी पेशाब नली को दो उंगलियों के बीच फंसा कर मसलने लगा, फिर पुतिया के साथ खेलने लगा और साथ ही उस की चूत को चाट लेता था। मैं घुटने के बल बैठ गया और उसकी चूत को चाटने लगा और उसके कूल्हे को कस कस कर मसलने लगा, प्रिया तेज तेज सिसकारी भरती जा रही थी।

मैं वापस अपनी सीट पर आ कर बैठ गया, प्रिया अब मेरी टांगों के बीच आ गयी और मेरे लंड पर अपनी उंगली चलाने लगी और मेरे सुपारे में लग चुके माल को इधर उधर फैलाने लगी, फिर अपने मुंह में लंड को भर लिया। कभी वो मेरे लंड को काटती और कभी जीभ चलाती, काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा।

उसके बाद मैंने प्रिया को उठाया और उससे बोला कि अपनी चूत को फैला कर मेरी गोद में बैठे। उसने ऐसा ही किया, थोड़ी सेटिंग के बाद मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था। उसने अपने बांहों में मेरी गर्दन को फंसाया और फिर से मेरे होंठ चूसने लगी और मेरे बिना कुछ बताये उसने मेरा लंड अपनी चूत के ऊपर लिया और मेरे लंड की चुदाई करने लगी… वो मेरे लंड की सवारी करने लगी, मुझे समझ में आ गया था कि उसकी चूत के अन्दर खुजली मची हुयी थी, तभी वो अपनी चूत को मेरे लंड से रगड़ने लगी और इसी रगड़ाहट में वो एक परफैक्ट खिलाड़ी की तरह उछल रही थी। जब वो थक जाती तो मुझसे चिपक जाती और फिर उछलने लगती। इस तरह से इस बार उसने ही मेरे लंड का माल निकाला और अपनी चूत के अन्दर ले लिया।

शायद इस बार मैं और प्रिया दोनों साथ-साथ झड़े थे, क्योंकि जिस समय में झड़ रहा था, उसी समय प्रिया भी हांफते हुए मुझसे चिपक गयी। थोड़ी देर बाद मेरा लंड अपना सर झुकाये हुए उसकी चूत से बाहर आ गया। प्रिया मेरे से अलग हुयी और बाथरूम की तरफ चल दी, मैं भी उसके पीछे-पीछे गया, वो बैठे हुये पेशाब कर रही थी उसने मुझे देखा लेकिन कुछ बोली नहीं और अपना सिर झुकाये हुए मूतती रही, मूतते समय उसकी चूत से सीटी जैसी आवाज आ रही थी। मैं भी सीट के पास जाकर मूतने लगा।

मूतने के बाद वो उठी और हैंगर पर से कपड़ा उठाया और चूत साफ करने के लिये जैसे ही वो कपड़ा अपनी चूत के पास ले गयी, मुझे उसी समय एक शैतानी सूझी, मैंने इशारे से लंड चूसने के लिये बोला. वो छी बोली और कपड़ा और पैर पकटते हुए बाहर की तरफ चल दी।

मैं उसके पीछे पीछे गया और उसकी बाँह पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और सीने से चिपकाते हुए बोला- जान रूठो मत, मैंने केवल कहा है, जबरदस्ती नहीं कर रहा हूँ। चूसने का मन नहीं है तो मत चूसो, लेकिन मैं तुम्हारी मुनिया को प्यार करना चाहता हूं।

“नहीं, मुझे गन्दा लगता है और मुझे उल्टी हो जायेगी।” मैंने जबरदस्ती नहीं की और उसको गोदी में उठाया और पलंग पर ले जाकर लेटा दिया, उसके बगल में मैं भी लेट गया। इधर उधर की बातें करते करते हम दोनों एक दूसरे को सहलाते रहे, इसका असर यह हुआ कि धीरे-धीरे बातों ही बातों में हम दोनों को एक बार फिर गर्माहट का अहसास होने लगा और इसी बीच प्रिया ने अपनी चूत और मेरे लंड को साफ कर दिया। उसके बाद वो मेरी तरफ घूमी और अपने पैर को मेरे दोनों पैरों पर लाद दिया और मेरे निप्पल को अपने दांतों से काटने लगी और चूसने लगी और दूसरे निप्पल को वो अपनी उंगली से मसल रही थी.

मैंने अपने दोनों हाथों को अपने सिर के नीचे रख लिया और प्रिया से बोला- अब तुम मुझे चोदो, जो तुम कहोगी वो मैं करूँगा, लेकिन इसी तरह लेटे-लेटे।

मेरी बात सुनकर प्रिया ने मेरी तरफ देखा और फिर अपने काम में मशगूल हो गयी। काफी देर तक वो मेरे निप्पल को चूसती रही और हाथ से मेरे लौड़े को सहलाती रही, धीरे धीरे मेरे लौड़े में ताव आने लगा, जब मेरा लंड तन गया तो प्रिया ने निप्पल चूसना छोड़ दिया और थोड़ा नीचे की तरफ सरक गयी और नाभि पर उसने बहुत सारा लार (थूक) गिरा दिया और फिर उसी लार पर जीभ चलाते हुए उसने मेरे पूरे पेट को गीला कर दिया, उसके बाद वो जांघ के दोनों हिस्से को चाटने लगी, लंड पर तो पहले से ही मेहरबान थी, लंड चूसना उसने बहुत अच्छे से सीख लिया था, अब प्रिया मेरे लंड को चूसने के साथ साथ मेरे अण्डों को भी अपने मुंह में भर ले रही थी।

उसके बाद प्रिया मेरी जांघों पर इस तरह से बैठ गयी कि उसकी चूत और मेरा लंड एक दूसरे के सेन्टर पर था, प्रिया ने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत की फांकों से रगड़ना शुरू कर दिया। दो तीन मिनट तक ऐसा करते रहने के बाद उसने मेरे लंड को अपनी चूत में फंसा लिया और फिर एक कुशल खिलाड़ी की तरह वो मेरी चुदाई करने लगी। कभी वो अपने हाथों का जोर मेरे पेट पर देती और मथानी की तरह मेरे लंड को अपने चूत के अन्दर घुमाती तो कभी मेरे ऊपर लेट कर मेरे निप्पल को चूसते हुए मेरी चुदाई करती.

इस दरम्यान एक बार प्रिया ने अपने दोनों हाथ अपनी गर्दन में फंसा लिए, इससे उसकी चूची उभर कर और सामने आ गयी और मेरा हाथ उसकी चूची को गुब्बारा समझ कर दबाने लगा. इस तरह से वो काफी देर तक मेरे लंड की चुदाई करती रही, फिर थक कर वो मेरे ऊपर लेट गयी, लेकिन धीरे धीरे वो मेरी चुदाई करना चालू रखे हुए थी क्योंकि वो झड़ चुकी थी और मेरा माल निकलने वाला था इसलिये मैं नीचे से अपनी कमर उठा कर उसकी बुर की घिसाई करने लगा और कुछ ही पल में मेरे लंड ने भी जबाव दे दिया और मेरा पूरा माल निकल कर उस की चूत के अन्दर जा रहा था और प्रिया के माल के साथ मिल कर वापस मेरे लंड और जांघ के आस-पास गिर रहा था।

थोड़ी देर बाद लंड महराज चूत रूपी गुफा के बाहर अपना मुंह लटकाये निकल आये, और इसका अहसास जैसे ही प्रिया को हुआ वो मेरे ऊपर से उतर गयी और करवट बदल कर लेट गयी, उसकी पीठ मेरी तरफ थी, मैंने भी करवट बदलते हुए अपने पैरों को उसकी कमर पर रख दिया और उसके मम्मे को अपने हाथ में फंसा लिया, हम दोनों के बीच में शांति छायी हुयी थी और इस शांति के बीच कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला।

सुबह जब आंख खुली तो देखा रोशनी हो चुकी थी। मैंने प्रिया को उठाया, पहले पहल तो वो अलसायी लेकिन जब मैंने बताया कि रोशनी काफी हो चुकी है, तो वो थोड़ा डर गयी, तभी उसकी सास की आवाज आयी, वो बोली- आई मां जी!

इतना कहने के साथ ही उसने तेजी से अपने कपड़े पहने और मेरे कान में बोली- मैं नीचे मां जी को संभाल रही हूं, तुम किसी तरह से किसी की नजर में बिना आये निकल जाओ। मैंने भी जल्दी जल्दी कपड़े पहने और चुपचाप प्रिया के पीछे पीछे नीचे आ गया.

उधर उसकी सास उसे लगातार आवाज दिये जा रही थी, वो भागते हाँफते अपनी सास के कमरे में गयी, वो बस अपने कमरे से बाहर निकलने वाली थी कि प्रिया ने उन का रास्ता रोक लिया और उनको बातों में फंसा कर मुझे बाहर निकलने का इशारा किया, मैं चुपचाप बाहर निकल आया और आस पास लोगों की नजर से बचता हुआ अपने घर की तरफ चल दिया।

अपने समय पर हम लोग फिर ऑफिस पहुंचे, प्रिया अपने काम में व्यस्त थी, हम दोनों के बीच हाय हैलो हुयी, मैं भी अपने काम में लग गया, बीच बीच में मैं प्रिया पर नजर डाल लेता था। मुझे प्रिया कुछ बैचेन लग रही थी क्योंकि कभी वो अपनी चूत को सलवार के ऊपर से ही मसलती तो कभी पीठ को खुजलाती तो कभी अपनी कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर मम्मे को हल्के से सहलाती और फिर अपने काम में व्यस्त हो जाती।

मैंने उसे ऐसा करते हुए कई बार देखा, आखिर में मैं पूछ बैठा तो बोली- बड़ी उलझन सी हो रही है और चूत में खुजली खूब हो रही है। “लाओ मैं तुम्हारी खुजली मिटा देता हूं।” “कैसे?”

मैंने उसे पैन्टी उतार कर वाशरूम में चलने के लिये कहा और प्रिया पहले मना करती रही, फिर मेरे कहने पर उसने अपनी पैन्टी उतार दी, मैंने उसकी पैन्टी हाथ में लिया तो देखा कि वो काफी गीली हो रही थी। तभी प्रिया ने झट से पैन्टी को हाथ में लिया और अपने पर्स में डाल ली लेकिन तब तक उसकी पैन्टी मैंने सूंघ ली थी, क्या महक थी उसके चूत से निकले वीर्य के रस की।

मैं थोड़ा ऑफिस के बाहर निकला, इधर उधर देखा, तो जो पियून था, वो अपने काम में मस्त था। मैं उस की नजर बचा कर मैं वाशरूम की तरफ चल दिया, इतनी देर में प्रिया को चोदने के ख्याल से मेरे लंड में जान आने लगी और वो टाईट होने लगा।

मैं सीधा वाशरूम में गया और पैन्ट को उतार कर एक किनारे किया, प्रिया पूछने लगी- यहां तुम कैसे चोदोगे? “पहले तुम मेरा लंड चूस कर टाईट करो, फिर बताता हूं।” वो नीचे झुक कर मेरे लंड को चूसने लगी, दो मिनट में लंड अच्छा खासा टाईट हो गया, मैंने प्रिया की सलवार को खोल दिया, सलवार उसकी नीचे गिर गयी, मैंने उसके दोनों हाथों को दीवार पर टिकाया और उसकी कमर को पकड़ कर कुतिया वाली पोजिशन में खड़ा किया, फिर थोड़ा सा उसकी चूत चाटने के बाद लंड को उसकी चूत में डाल दिया, यह पोजिशन प्रिया के लिये नई थी।

मुझे मजा बहुत आ रहा था लेकिन दिल में डर था कि कहीं पियून न आ जाये और पूरा खेल खराब हो जाये। प्रिया भी बोली- जल्दी जल्दी करो। स्पीड चालू थी, मुझे भी अपने सुपारे पर तेज खुजली का अहसास हो रहा था, इस वजह से मेरी स्पीड और बढ़ गयी.

प्रिया बोली- मेरे अन्दर से कुछ बाहर आ रहा है, मैं झड़ रही हूं. “मैं भी झड़ने वाला हूँ, कहां झडूं, तुम्हारे मुँह में या चूत के अन्दर?” “अन्दर ही झड़ जाओ।” मैं अन्दर ही झड़ गया, प्रिया ने जल्दी अपनी सलवार पहनी और सलवार के ऊपर हाथ चला कर अपनी चूत को साफ किया और फ्रंट ऑफिस की तरफ पहुंच गयी।

कुछ देर बाद मैं भी इधर उधर होता हुआ, फ्रंट ऑफिस पहुंच गया, लेकिन यह क्या, मेरा कलेजा धक से रह गया। पकड़ी गयी चोरी, मेरे दिमाग में यही आया क्योंकि रमेश ऑफिस में बैठा हुआ था। मैं चुपचाप अपनी कुर्सी पर बैठ गया और काम करने लगा। इधर प्रिया और रमेश में बातें हो रही थी, मुझे देख कर वो दोनों चुप हो गये। फिर रमेश प्रिया से बोला- आओ, थोड़ा बाहर चलते हैं।

प्रिया ने मुझे कुछ निर्देश दिये और रमेश के साथ चली गयी।

करीब दो घंटे के बाद वो वापस आयी। उसका मूड थोड़ा उखड़ा हुआ था. मैंने पूछा- रमेश तो कल या परसों आने वाले थे? “काम खत्म तो आज आ गये।” “मूड क्यों उखड़ा है तुम्हारा?” प्रिया- कुछ नहीं यार! “अरे कुछ तो हुआ होगा, तभी तो तुम्हारा मूड ऑफ है।”

वो कुछ बताने ही जा रही थी, तभी मैं फिर बोल पड़ा- यार अच्छा इतना तो बता दो कि ये ऑफिस कितनी देर पहले आये थे। “बस जैसे ही मैं ऑफिस में घुसी, ये बैठे हुये थे, इनको देखते ही मेरे होश उड़ गये, लगा कि मैं पकड़ी गयी। पर इससे पहले मैं कुछ बोलती तो ये बोल उठे, आओ प्रिया, कैसी हो? मैं अभी आया तो तुम्हें नहीं देखा, तो लगा कि तुम किसी काम से बाहर गयी हो। मैंने रमेश की बात को बीच में काटा और बोली, रूको, सांस तो ले लो। मैं यही थी, बस पेशाब करने अन्दर गयी थी। उतने में तुम आ गये और हमें बीच में ही चुप होना पड़ा।”

“और तुम दोनों कहां से घूम के आ रहे हो?” “कहीं नहीं, रमेश सीधा मुझे घर ले गया यह बोल कर कि उसको मेरी बहुत याद आ रही थी। इसलिये थोड़ी देर साथ चाहता था।” “फिर क्या हुआ?” मैंने पूछा। प्रिया बोली- तुम्ही ने तो कहा था कि उसकी सब बात मानना। “हाँ फिर, आगे बताओ?”

“बस वही… बेडरूम में आकर रमेश बोला क्या तुम मेरे लिये पूरी नंगी हो सकती हो?” “फिर तुमने क्या कहा?” “उसके गालों को सहलाते हुए बोली ‘मेरे पिया के लिये मैं नंगी नहीं हूंगी तो कौन होगा?’ मैं कपड़े उतारने जा ही रही थी, कि मुझे याद आया कि मैंने तो पैन्टी पहनी ही नहीं है और उसके सामने नंगी होने के मतलब कि उसे शक होना, और दूसरी बात यह थी कि मेरी चूत में तुम्हारी महक बसी हुयी थी तो उसका शक पक्का यकीन में बदल जाना।” “तो तुमने फिर क्या बहाना बनाया।”

“मैंने बोला, अगर मैं रात मैं नंगी होऊं तो?” “उसने मेरे हाथों को अपने हाथों में लिया और अपनी तरफ मुझे खींचा और अपने सर को मेरी छाती पर लगाते हुए बोला, तुम्हारी खुशी के लिये मैं चलो रात में ही तुम को नंगा देख लूंगा, लेकिन मेरी अभी इच्छा है।” तभी मेरे दिमाग में आईडिया आया और मैं रमेश से बोली- ठीक है, मैं तुम्हारे लिये अभी नंगी हूंगी, पर एक शर्त है? क्या? उसने पूछा, मैं बोली- मैं बाथरूम से नंगी होकर निकलूंगी और तुम मुझे बिल्कुल नहीं देखोगे। उसने तुरन्त ही मेरी बात मान ली। मैं बाथरूम में गयी और अपने कपड़े उतार कर चूत साफ की और उसके सामने आ गयी।

“फिर क्या हुआ?” “उसने मुझे ऊपर से नीचे देखा और मेरी चूत को सहलाते हुए बोला, वाऊऊऊऊऊऊ, कितनी चिकनी लग रही है तुम्हारी चूत? कहते हुए उसने मेरे कूल्हे कसकर पकड़े और मेरी चूत पर चुंबन की बौछार कर दी और चाटने लगा। जब चूत चाट चुका तो उसने मुझे घुमाया और मेरे कूल्हे को पकड़कर उसे खोल दिया और गांड की छेद में उंगली डाल कर बोला, प्रिया, तुम्हारी गांड जब भी देखता हूं तो मुझ में कुत्ते जैसी फीलिंग आती है। कह कर मेरी गांड में अपनी जीभ लगा दिया और चाटने लगा।

“उसके बाद क्या हुआ?” मैंने पूछा।

“फिर रमेश ने अपने कपड़े उतार दिये और अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया।” “फिर?” मैंने पूछा। “फिर क्या था, मुझे तुम्हारी बात याद आ गयी, तुमने कहा था कि उसका मन रखना, इसलिये मैंने यह सोच कर उसका लंड मुंह में ले लिया कि अगर उसने अपना वीर्य मेरे मुंह में छोड़ दिया तो मैं उसका वीर्य पी लूंगी।” “अरे वाह!” मैंने उसकी बात काटते हुए कहा- इसका मतलब कि तुमने उसके वीर्य के रस को चख लिया। “नहीं!” तपाक से बोली प्रिया।

अब मेरे आश्चर्य होने की बारी थी- तब क्या हुआ? “शायद, उसे खुद भी अच्छा नहीं लगता कि उसका वीर्य मेरे मुंह के अन्दर जाये, इसलिये उसने जल्दी से अपना लंड मेरे मुंह से बाहर निकाला और मुझे पलंग पर पटक दिया और झट से अपने लंड को मेरे चूत में डाल दिया और 10-15 धक्के लगाने के बाद ही झर गया। एक दो मिनट बाद वो मुझ पर से हटा और तैयार होते हुए बोला- प्रिया, तुम भी तैयार हो लो, तुम्हें ऑफिस छोड़ दूं। इतना कहने के साथ ही प्रिया ने अपनी बात खत्म की।

मैंने प्रिया के कन्धे में हाथ रखा और उससे बोला- जान, अब तुम परेशान न हो, तुमको मैं सुख दूंगा और तुम उसे सुख दो। मेरा लंड हमेशा तुम्हारे लिये तैयार है। मेरे इतना कहते ही प्रिया मुझ से चिपक गयी और बोली- शरद थैंक्यू, तुमने मुझे नया जीवन दिया है।

उस दिन के बाद प्रिया को जब भी मेरी जरूरत होती, मैं उसकी जरूरत को पूरा करने के लिये पहुँच जाता!

इस तरह से मेरा और प्रिया का रिश्ता चल रहा था।

तो दोस्तो, मेरी कहानी कैसी लगी, कृपा करके मेल के माध्यम से मुझे अपने विचार बतयें।

धन्यवाद आपका अपना शरद सक्सेना [email protected] [email protected]

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