इश्क विश्क प्यार व्यार और लम्बा इन्तजार-2

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सेक्स कहानी का पिछला भाग : इश्क विश्क प्यार व्यार और लम्बा इन्तजार-1

दोस्तो, मैं विक्की खन्ना आपने मेरे और मोनिका के बारे में पिछली कहानी में पढ़ा, मैंने मोनिका की मदद की और उसने मुझको अच्छे से जाना कि कोई उससे मुझसे ज्यादा प्यार नहीं कर सकता. जब उसको मैंने बताया कि मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ. उसके बाद मोनिका ने अपने आपको पूरी तरह मुझको सौंप दिया था.

एक दिन उसने मिलने बुलाया और कहा- सेक्स नहीं करेंगे. मैंने कहा- आ जाऊंगा, पर सेक्स तो मुझको चाहिए ही. तब उसने कहा- यार, डेट आई हुई है. मैंने कहा- तो गांड दे दो. वो मना करने लगी, मैं बोला- फिर मैं नहीं आ सकता. वो बोली- आओ ना.. मेरा मन है किस करने का, हग करने का. मेरी इस कमजोरी का फायदा नहीं उठाओ. पर मैं अपनी जिद पर अड़ा रहा. वो बोली- ठीक है आ जाओ.

मैं गया, वो सीढ़ियों पर खड़ी थी. हमने खूब किस की, फिर मैंने उसको वहीं घोड़ी बनाया. मोनिका का लोवर उतारा, पैंटी उतारी. अपने मुँह से ढेर सारा थूक लिया और उसकी गांड के छेद पर लगा दिया. अन्दर तक उंगली से थूक मल कर गांड को चिकना किया. फिर अपने लंड पर भी लगाया और लंड उसके छेद पर लगा कर उसके कूल्हे पकड़ कर अन्दर डाला. अभी टोपा ही गया था कि वो रोने लगी और नीचे बैठने लगी. मैंने लंड बाहर नहीं निकाला क्योंकि मुझको पता था कि फिर नहीं डालने देगी. कुछ दर्द कम हुआ तो मैंने उसको फिर घोड़ी बनाया और 2-3 झटके दे मारे. मेरा लंड आधा ही अन्दर गया होगा कि वो रोने लगी, तड़फने लगी. मुझको लंड बाहर निकालना ही पड़ा, उसको चक्कर आने लगे. यदि लंड बाहर नहीं निकालता तो फिर वो चूत भी नहीं देती. इसलिए उसने मुझको वहाँ से भगा दिया. तब तक उसे पता नहीं था कि गांड में इतना दर्द होगा. अब उसे वो दर्द पता चल गया है सो अब कभी गांड मारने ही नहीं देगी.

कुछ दिन बाद वो उस रात को भूल गई. अब हमारा रोज एक दूसरे को प्यार करने का मन होने लगा. पर मैंने अब डिमांड रखी कि बाबू मुझको बेड पर मिलना है. तब उसने कुछ दिन रुकने को कहा और बोली- भाभी, जल्दी अपने गांव जाएगी और भाई नाईट ड्यूटी पर होंगे, तब उनका रूम नीचे खाली रहेगा.

डेट फिक्स हुई और कुछ दिन इंतज़ार के बाद वो रात आई जब उसकी भाभी जा चुकी थीं और भाई की भी नाईट ड्यूटी थी. मोनिका के पापा रोज ड्रिंक करते थे, उनका इतना डर नहीं था, जितना मम्मी का था. मेरे समझाने पर उसको मैंने नींद की टेबलेट लेकर दी, उसने दूध में मिला कर मम्मी पापा को पिला दी.

हम रात के लगभग 11 बजे तक चैट करते रहे जब उसके मम्मी पापा सो गए, तब उसने कहा- आ जाओ. नीचे का भाई वाला कमरा खुला है. मैं वहाँ उसके भाई के कमरे में जाकर बैठ गया और उसके फोन पर कॉल की कि मैं आ गया, तुम आ जाओ.

वो अपना फ़ोन मम्मी पापा के पास चालू हालत में रख कर, मम्मी के रूम की बाहर से कुंडी लगा कर आ गई. मेरे पास आकर उसने मुझको गले लगाया. हमने एक लंबे टाइम तक किस किया क्योंकि मोनिका को किस बहुत पसन्द है और उस किस को मैं करूँ तो उसके लिए सोने पर सुहागा है.

उसके बाद हम अलग हुए. मैंने लाइट जलाई. मैं मोनिका को बस देखता रहा उसके लंबे काले बाल जो मुझको बहुत पसंद हैं. वो खुद साढ़े पांच फुट के आस पास लंबी, उसका चेहरा बिल्कुल एम्मा वाटसन जैसा, गोरी इतनी.. मानो थप्पड़ मारने से 2-4 दिन तक निशान ही गाल से नहीं जाएगा. स्लेटी लोवर और ब्लैक टॉप में वो अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. उस दिन मुझको अपनी किस्मत से और कुछ नहीं चाहिए था.

वो मेरे पास आई और मेरे गले लग कर बोली- बस बाबू कितना दिखोगे, तुम्हारी ही हूँ मैं.. इतना सुन कर मैंने उसको अपनी गोद में उठाया और किस करते हुए उसके भाई भाभी के बेड पर लिटाया, खुद उसके ऊपर लेट कर एक दूसरे को किस करते रहे.

हम एक दूसरे को खाए जा रहे थे. आज किसी बात की जल्दी नहीं थी, ना किसी का डर था, फ़ोन स्पीकर पर डाल कर अपने पास रखा हुआ था. फिर मैंने मोनिका के चूचे टी-शर्ट के ऊपर से ही दबाए, जो मेरी बड़ी बड़ी हथेलियों में समा चुके थे. मैंने जोर जोर से मम्मे दबाए, तब मोनिका बोली- नहीं.. दर्द होता है.

मैंने उसके पैरों की तरफ बैठ कर उसकी टी-शर्ट उसके बदन से अलग की. उसकी छोटी छोटी और कसी हुई ठोस चूचियों को देखता रहा और उनको धीरे से सहलाने लगा. उसको मजा आ रहा था. मोनिका बोली- बस ऐसे ही करा करो, इन को भींचा ना करो.

फिर मैंने मोनिका की चूचियों का खूब रसपान किया, जिससे मोनिका की सिसकारियां निकलने लगी थीं और वो मेरे नीचे पड़ी मचल रही थी. मैंने उसके निप्पल पी पी कर खड़े कर दिए थे.

अब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ, नीचे जा कर मैंने उसका लोवर उतारा. मोनिका की कसी हुई जाँघें बेहद दिलकश थीं. मैं आज भी उनको रोज याद करके मुठ मार लेता हूं.

अपनी सुरंग को उसने ब्लैक पैंटी से ढका हुआ था. मैंने देर ना करते हुए उसकी पैंटी भी अपने हाथों से उतारी. उसके पैर थोड़े उठाए, मोनिका की चुत को ठीक से देखा.. जो ऊपर से बिल्कुल गोरी थी. उसकी चूत के आस पास की फांकें उंगली से हटाईं तो अन्दर की खाल और चूत का छेद एकदम गुलाबी था. मैं हाथ फेर कर चूत देखे जा रहा था.

मोनिका बोली- क्या देख रहे हो? इसकी सील तुम उस रात बुरी तरह अपनी रॉड से तोड़ चुके हो.. अब ये कुंवारी नहीं है. मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया और अपने कपड़े उतारने लगा. मोनिका बोली- रुको, मैं उतारूंगी.

वो मेरे कपड़े उतारने लगी. उसने मेरी टीशर्ट उतारी और मेरी छाती पर हाथ फेरती हुई बोली- बंदे में दम तो है.. और हंस दी. फिर लोवर उतारा, मेरा अंडरवियर उतारते हुए मेरे मुँह की तरफ देखा और हंसी. निक्कर उतरते ही मेरा लम्बा और मोटा लंड मोनिका के फेस के सामने था. उसने हाथ में लिया और लंड से बोली- साले उस रात मुझको दर्द देकर खूब मजे लिए थे. आज देखती हूं कितना दम है तुझ में और तेरे मालिक में.

यह सुन कर मैंने मोनिका को बेड पर लिटाया और उस के ऊपर चढ़ गया.. जबरदस्त किस किये, फिर हाथ से पकड़ कर लंड मोनिका की चूत पर लगाया और अन्दर धक्का दे दिया. अभी टोपा ही गया था कि मोनिका सिकुड़ कर ऊपर की तरफ को हुई. मैंने उसके दोनों पैर अपनी कमर के ऊपर लिए, जिससे उसकी चुत ऊपर की तरफ हो गई. जोर का धक्का मारा तो पूरा लंड अन्दर मोनिका की बच्चेदानी से जा टकराया. उसकी चीख निकली ‘आआआआ..’ मैंने उसकी चीख रोकी नहीं, उसकी बस लंड रोक लिया.

कुछ पल बाद खुद मोनिका बोली- बाबू करो. मैं धीरे धीरे धक्के मारने लगा और वो ‘उफ उफ उफ अअअअअ आआआ ऊई ऊई ऊई..’ की आवाजें निकालने लगी. मैंने मोनिका के पैर अपने कंधों पर रखे और लंड जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगा. वो कामुक सिसकारियां लेने लगी. सारा रूम ‘फचक फच अअअअअ ह्म्म्म ह्म्म्म फ़क मी फक मी फक जानू..’ की आवाजों से गूँजने लगा.

मैं जोश में उसको चोदे जा रहा था. पूरे रूम में मेरी ‘आह ओहहा हाँ..’ की और मोनिका की ‘अअअअअ हम्म हम्म.. स्पीड से करो.. जोर से करो अअअअअ..’ की मदमस्त आवाजें आ रही थीं. मोनिका को मजा आ रहा था. बोले जा रही थी- रुको मत.. करते रहो बहुत मजा आ रहा है..

फच फच की आवाजों और मोनिका की कामुक सिसकारियों से सारा रूम गूंज उठा था. इस बीच वो 2 या 3 बार झड़ चुकी थी. अब मेरा भी होने वाला था. जोर जोर से झटके मारते हुए मैं भी झड़ गया और वीर्य मोनिका के पेट पर निकाल दिया. उसके बाद मैं रोज मिलने का वादा लेकर कर वापस आ गया.

अब हमें चुदाई का ऐसा चस्का लग गया था कि हम लगभग रोज रात में चुदाई करने लगे.

रात 9 बजे से लगभग 11 बजे तक चैट करते, फिर मैं उसके घर चला जाता. वो मुझसे चैट करती रहती तभी उसके मम्मी पापा चुदाई करने में लगे रहते. ये सोच कर कि मोनिका सो चुकी है. उनके सोने के बाद हम मिलते. फिर जब उसकी भाभी आ गई तो घर में नीचे एक साइड में भैंसों के लिए कमरा था, उसमें पहले मैं जाता, फिर वो आ जाती. आते ही हम किस करने लग जाते.

जगह कम होने की वजह से हम लेट नहीं पाते थे, कभी कभी तो मैं किस करते हुए ही मोनिका का लोवर पैंटी उतारता और उसकी एक पैर उठा कर अपने कंधे पर रखता. थोड़ा झुक कर लंड मोनिका की गीली हो चुकी चूत पर रख कर चुदाई चालू कर देता.

ऐसे करने से मोनिका एक पैर पर खड़े खड़े जल्दी थक जाती. इसलिए उसे मैं वहीं घोड़ी बनाता और पीछे से लंड उसकी चुत में फंसा देता. ऐसे लगभग हम रोज मिलने लगे, जिसमें मैं उसकी चुदाई भरपूर नहीं कर पा रहा था. उसके मम्मी पापा बगल के कमरे में सोए हुए होने की वजह से, डर के मारे जल्दी चुदाई करके भाग आता. वो मुझसे अब नाखुश रहने लगी और ये बोल कर कि मिलने के लिए मना करने लगी कि 2 मिनट की चुदाई से अच्छा हम मिले ही ना.

फिर मैंने सोचा मोनिका को बाहर किसी होटल में ले चलता हूं, जहाँ हम दिल खोल कर जितना टाइम चाहें, मिल सकें.

मैंने मोनिका को होटल चलने को कहा, पर वो मानी नहीं क्योंकि उसके लिए यह पहली बार था, वो कभी ऐसे होटल नहीं गई थी और वो कॉलेज भी बंक नहीं करना चाहती थी. जैसा मैंने पहले ही बताया कि वो पढ़ती बहुत थी. सच में उस जैसी पढ़ाकू बंदी आज तक मैंने नहीं देखी. हमेशा फर्स्ट आना, स्कूल हो या कॉलेज हो. कभी हमारे रिलेक्शन को वो पढ़ाई के बीच में नहीं लाई.

मेरे ज्यादा समझाने पर और शायद चुदास के चक्कर में एक दिन सुबह कॉलेज न जाकर हम होटल में गए. वहाँ रूम लिया, रूम में जाकर हम एक दूसरे से पागलों की तरह लिपट गए. खड़े खड़े एक दूसरे को खूब किस किया.

फिर मैंने देर ना करते हुए उसके कपड़े उतारे उसने आज पीले रंग का सूट पहन था. नीचे वाइट पजामी थी. उसने मेरे कपड़े उतारे और हम दोनों बेड पर नंगे ही लेट कर साँप की तरह एक दूसरे से लिपटे रहे. फिर मैंने लंड मोनिका की चुत पर लगाया, शायद वो इसी इंतज़ार में थी. उसने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर कर लिए. मैंने एक झटके में पूरा लंड मोनिका की चूत में उतार दिया.

वो मेरे कान में बोली- अअअअअ फक मी बाबू..

मैं जोर जोर से लंड अन्दर पेलता रहा और मोनिका ‘आआआ अअअअअ फक मी, फक मी..’ बोलती रही, फिर झड़ गई. मैं चुदाई करता रहा और इसी बीच वो फिर जोश में आ गई.

मैं उसके ऊपर से उठ कर बेड के नीचे खड़ा हो गया. मैंने मोनिका के पैर पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा. अब मोनिका के सिर्फ चूतड़ बेड पर टिके थे. मैंने लंड फिर से चुत पर सैट किया और एक धक्के में पूरा अन्दर डाल दिया.

उसने मेरी गर्दन अपने दोनों हाथों से पकड़ी हुई थी और अपने पैर मेरी कमर में डाल कर अंटी मार रखी थी. मेरा लंड पूरा बाहर आता, फिर झटके के साथ पूरा अन्दर जाता, जो मुझको और ज्यादा जोश चढ़ा रहा था. मोनिका भी ये नजारा देख कर ‘अअह अअह..’ करे जा रही थी और अपनी कमर हिला कर पूरा लंड अन्दर खा जाना चाहती थी.

इस बीच एक बार और उसने अपना कामरस निकाल दिया और बेड पर लम्बी लेट कर ‘हम्मम्म अअअह.. आआह..’ की आवाजें जोर जोर से निकालने लगी.

मैं भी झड़ने वाला था तो जोर जोर से 10-15 झटके मारने के बाद मोनिका की चूत में ही झड़ गया और उसके ऊपर ही लेट गया. उसको मेरा वजन बर्दाश्त नहीं हुआ.. और हम आजू बाजू हो कर लेट गए. कुछ देर बाद वो बोली- चलें? मैं बोला- ओ के, चलो.

वो उठ कर अन्दर वाशरूम में गई.. पीछे पीछे मैं भी गया और जाकर पीछे से लंड को उसके चूतड़ों की दरार में डाल कर हाथों से उसके चुचे पकड़ लिए. मेरे लंड के स्पर्श से वो फिर गर्म हो गई. मैं मोनिका को अपनी गोद में उठा कर फिर उसी बेड पर ले आया.

उसके बाद फिर से वो बिना कपड़ों के मेरे नीचे थी, मैं उसके ऊपर था. कुछ टाइम के बाद मोनिका बोली- प्लीज फक मी.

मैंने उसको अनसुना किया और किस करता रहा. जब मोनिका से बर्दाश्त नहीं हुआ, तब उसने खुद उठ कर मुझको नीचे लिटा दिया और मेरे ऊपर दोनों तरफ पैर करके चढ़ गई. उसने मेरा लंड अपने हाथ में लिया और चुत पर लगा कर लंड पर धीरे धीरे बैठ गई और पूरा लंड अन्दर ले लिया. अब वो ‘अअअअअ उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ्फ्फ उफ्फ्फ..’ करके ऊपर नीचे होने लगी.

दोस्तो मुझको मजा आ रहा था क्योंकि खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर.. कटना खरबूजा ही है.

फिर 10-15 मिनट बाद मोनिका झड़ गई और अपनी स्पीड कम कर दी. मेरा मजे वाला टाइम चल रहा था, तो मैंने उसको अपने नीचे लिया और उसको पैर मेरे ऊपर करने को कहा. मैं अपना लंड पूरी स्पीड से अन्दर बाहर करने लगा, जो उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. वो जोर जोर से बोले जा रही थी- बस बस करो प्लीज.. मैं अपने पूरे जोश में था और दे धनाधन उसकी चुत में लंड पेले जा रहा था और वो ‘अअअह.. आआआ अअअअह..’ की आवाजें निकाले जा रही थी.

फिर मेरा भी निकलने वाला था, मैंने जोर जोर से 5-10 झटके मारे और मेरा सारा वीर्य मोनिका की चुत में लबालब भर गया और बाहर आने लगा.

वो जल्दी से उठ कर वाशरूम गई, कपड़े पहने और चलने को कहा क्योंकि उसको पता था कि हम दोनों उधर कुछ टाइम और रुकते तो मैं फिर से उसको पकड़ कर चोद देता और वो भी अपने आपको नहीं रोक पाती. क्योंकि उसने मुझसे कहा था मेरा साथ होना उसको चुदास महसूस करवाता है.

दोस्तो, कहानी कैसी लगी जरूर बताना. आपका विक्की खन्ना [email protected]

सेक्स कहानी का तीसरा भाग : इश्क विश्क प्यार व्यार और लम्बा इन्तजार-3

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