दुल्हन बन कर भाभी ने सुहागरात मनाई-2

इस हिंदी सेक्स स्टोरी के पिछले भाग दुल्हन बन कर भाभी ने सुहागरात मनाई-1 में आपने पढ़ा कि पड़ोसन भाभी मुझ पर फ़िदा थी, एक दिन मैंने भाभी की चुत चुदाई कर ही दी. भाभी ने मुझे अगले दिन के लिये सरप्राइज देने को बोला. वो क्या सरप्राइज था कि भाभी दुल्हन की तरह सजी थी. और भाभी ने मेरे साथ, मैंने भाभी के साथ चुत और गांड की चुदाई करके सुहागरात मनाई.

मैंने आँख मारी तो भाभी बोलीं- तुम पूरे जंगली हो… मुझे मारने का इरादा था क्या…? कितना दर्द हो रहा है पता भी है तुम्हें… आह…आज तो मेरी गांड फट ही गई थी समझो. मैंने सॉरी बोला और कहा- मुझे माफ़ करना… मैं तुम्हारी जवानी को देखकर अपने होश खो बैठा था… सॉरी… तुम हो ही इतनी खूबसूरत… तुम तो मेरी जान हो… तुम्हें तो मैं अपनी जान से भी ज़्यादा चाहता हूँ. मैं तुम्हें कैसे मारना चाहूँगा… प्लीज़ माफ़ कर दो… आइ लव यू… मेरी प्यारी पायल रानी… मैं हँसने लगा.

अब भाभी थोड़ा चिढ़कर मेरी छाती पर मुक्के मारने लगीं- यू नॉटी बॉय… मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगी. मैंने उनके हाथ पकड़ लिए और बोला- मैं तुम्हें बोलने का मौका ही नहीं दूँगा. इतना कहकर मैंने उन्हें किस करना शुरू कर दिया. करीब बीस मिनट तक चूमाचाटी होती रही.

भाभी फिर से छटपटाने लगीं, पर मेरी पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो कुछ ना कर सकीं और अपने आपको मेरे हवाले कर दिया. मैंने भी उन्हें लंबा किस करने के बाद छोड़ दिया और उनके गालों को सहलाते हुए बोला- अब पानी तो पी लो… अभी तो तुम्हें और मेहनत करनी है.

भाभी रोने जैसी सूरत बनाते हुए बोलीं- मुझसे क्या चाहते हो राक्षस… मैं हाथ जोड़ती हूँ… अब मुझे बक्श दो… मैं हंसा और बोला- शाम को बड़ा सरप्राइज़ दे रही थीं, अब क्या हुआ मेरी जान? वो बोलीं- ग़लती हो गई मुझसे… अब माफ़ कर दो मुझे… और सो जाओ… मैंने कहा- ठीक है लेकिन पानी तो पी लो बाबा… तो उन्होंने पानी पिया और बोलीं- मुझे बाथरूम जाना है.

यह कह कर वो जाने के उठने लगीं मगर उनसे उठा ही नहीं गया और वो गिरने लगीं, तब मैंने तुरंत उन्हें संभालते हुए अपनी गोद में उठा लिया और बाथरूम की ओर ले गया. वहाँ मैंने भाभी को नीचे उतारा. वो बोलीं- तुम बाहर जाओगे तभी मैं मूत पाऊँगी. मैं हंसा- मेरी जान मुझसे क्या शरमाना… अभी तो बड़ी उछल उछल कर चुत की चुदाई करवा रही थीं… अब कैसी शर्म! भाभी मेरी तरफ गुस्से से आईं और बोलीं- बदमाश… कितना बेशरम हो गया है तू? मैं बोला- अरे जान… मुझे भी ज़ोर की लगी है… क्यों ना साथ में ही मूत लें.

इससे टाइम भी बच जाएगा और एक दूसरे को कंपनी भी मिल जाएगी.

इतना कहकर मैं बाथरूम में भाभी के सामने ही मूतने लगा… भाभी भी मूतने लगीं. फिर मैंने लंड हिलाते हुए कहा- पायल डार्लिंग, इसको नहला तो दो… देखो कितना गंदा हो गया है. इतना कह कर मैंने शावर चालू कर दिया और उसे अपने पास खींचते हुए साथ में नहाने लगा.

अब मैं साबुन उठाया और अच्छे से झाग बना कर भाभी के मम्मों पर… चूत पर… और गांड को अच्छे से साफ करने लगा. मैं अपनी उंगली को भाभी की चूत में अच्छे से घुमा-घुमा कर साफ करने लगा. वो फिर से सिसकारियाँ भरने लगीं- आह… प्लीज़ अब नहीं… और नहीं… आह… रुक जाओ… म्म्म्मम… पर मेरा शैतान लंड तो फिर से खड़ा हो गया था लेकिन मैंने कंट्रोल किया क्योंकि अगर मैं बाथरूम में चोदने लगता तो शावर से पानी वेस्ट हो जाता और फिर वो भी थकी हुई थीं और वहां इतना स्पेस भी नहीं था.

मैंने भी अपना लंड साफ किया और शावर बंद करके एक दूसरे को टॉवेल से पौंछा. पायल भाभी की चूचियों पर कुछ पानी की बूंदें लगी थीं तो मुझसे रहा नहीं गया और मैं अपनी जीभ उनके निपल्स पर फिराने लगा. वो सिसकारी लेने लगी. मैंने पूरा पानी साफ करके उन्हें गोद में उठाकर बेड पर लेटा दिया और खुद फ्रिज से कुछ बर्फ के टुकड़े ले आया. वो बर्फ देख कर चिढ़ने लगीं और बोलीं- अब क्या चाहिए तुम्हें…? मैं बोला- अरे मैं तो बस तुम्हारी गांड और चूत को आराम दिलाने के लिए लाया था, तुम्हें जलन हो रही होगी ना…! वो बोलीं- हाँ, दर्द तो हो रहा है, पर तुम रहने दो… मैं खुद ही लगा लूँगी.

पर मेरे दिमाग़ में तो कुछ और ही चल रहा था, इसीलिए मैं बोला- अरे तुमने इतनी मेहनत की है, तुम थक गई हो मैं लगा दूँगा. अब सेवा करने का मौका तो दो. वो बोलीं- बस सेवा ही करना, मेवा मत खा जाना… भाभी ये कहते हुए हँसने लगीं. मैं भी एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ बोला- हाँ बाबा सेवा ही करूँगा.

मैंने भाभी को बेड पर ठीक से लेटाया और उनकी टांगें चौड़ी करके चूत पर आ गया. मैं बर्फ का टुकड़ा लेकर भाभी की चूत पर फिराने लगा. कुछ देर बाद मैंने धीरे धीरे बर्फ को उनकी चूत के दाने पर रगड़ना शुरू किया.

भाभी फिर से गरम होने लगीं और मादक सिसकारियां लेने लगीं- आह… क्या कर रहे हो… वहां नहीं… आह… रूको.

मैंने अपनी जीभ निकाली और भाभी कि चूत के दाने पर फिराने लगा. वो छटपटाने लगीं, तो मैंने एक हमला और कर दिया.
अब मैं भाभी के मम्मों पर भी जीभ से खेलने लगा, उनके निप्पलों पर उंगली फिराने लगा. फिर निप्पलों को पकड़ कर खींचने और नोंचने लगा. मेरे हाथ और जीभ दोनों धड़ाधड़ भाभी के दूध पर हमला कर रहे थे.

मम्मों से खेलने के बाद मैंने भाभी की चूत की फांकों को चौड़ा किया. उनकी क्लिट को पकड़ कर कर खींचा और उसे अपने होंठों से दबा लिया. यह हरकत वो बर्दाश्त नहीं कर पाईं और ज़ोर से चीखते हुए मेरे मुँह में ही झड़ गई. “आआअह… संजू… आआआह… बस रुक जाओ… आह…”

मैं फिर भी नहीं रुका और उनके दाने पर जीभ फिराता ही रहा. भाभी बिन पानी की मछली की तरह काँपने लगीं. वो बेड पर लोटने लगीं और मेरे मुँह को वहाँ से हटाने की नाकाम कोशिश करती रहीं. वो अब बोले जा रही थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… प्लीज़ मुझे छोड़ दो… तुम जो कहोगे वो करूँगी… लेकिन अभी रुक जाओ… प्लीज़… आह… मम्मी मर गई… संजू प्लीज़… आह…

लेकिन मैं नहीं माना और अपनी जीभ भाभी की चूत के दाने पर रगड़ता ही रहा. वो बुरी तरह से काँप रही थीं, पर मुझ पर कोई असर नहीं हुआ. मैं अपने हाथों से उनके निप्पलों और जीभ से उसकी चूत को घायल कर रहा था. वो बुरी तरह से रोने और चिल्लाने लगीं. थोड़ी देर बाद वो फिर से झड़ गईं.

अब मैं भाभी के रस को पीकर वहाँ से हट गया क्योंकि मैं भी हांफ़ रहा था. पायल भाभी की हालत तो बहुत बुरी हो गई थी.

फिर दस मिनट बाद मैं धीरे धीरे ऊपर की ओर बढ़ने लगा. मैंने पिघला हुआ बर्फ का टुकड़ा उठाया और भाभी के पेट और नाभि पर फिराने लगा. वो बहुत तेज़ी से साँसें ले रही थीं. मैंने अपना अगला वार कर दिया. अपनी लंबी जीभ निकाली और जितना हो सकता था उतनी जीभ, भाभी की नाभि में उतार कर गोल-गोल घुमाने लगा. कुछ और ऊपर बढ़ा और भाभी के मम्मों पर आ गया. मैं भाभी के ऊपर बैठ गया और अपना लंड उनकी दोनों चूचियों की क्लीवेज में फँसा कर दोनों मम्मों को जोर से पकड़ कर लंड को आगे पीछे करने लगा.

अब मुझे मज़ा आने लगा और भाभी भी मस्त होने लगीं. वो बस मस्ती से चीखती जा रही थी- आह… ज़ोर से… आह… करते रहो… आह…

करीब 15 मिनट बाद मैं जब झड़ने के करीब पहुँचने वाला था तो मैंने जल्दी से अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया और मुँह को चोदने लगा. थोड़ी देर बाद मैं भाभी के मुँह में ही झड़ गया. मेरा सारा माल भाभी पी गईं.

अब वो भी बुरी तरह से हांफ़ रही थीं और मैं भी.
हम दोनों बेदम हो गए थे पर मेरा अभी मन नहीं भरा था.

मैंने आधा घंटे का रेस्ट लिया और फिर से उनके मम्मों को चूसने लगा. वो बोलीं- क्या खा लिया है तुमने… जो रुक ही नहीं रहे हो… अब तो शांत हो जाओ. मैं बोला- बस एक राउंड और… उसके बाद सो जाएंगे.

इतना कह कर मैंने लेटे लेटे ही उनकी टाँग उठाकर धीरे धीरे लंड भाभी की चूत के अन्दर घुसा दिया क्योंकि ज़्यादा ताक़त तो मुझमें भी नहीं बची थी.

अब हम दोनों लेटे हुए ही सेक्स कर रहे थे. मैं धीरे धीरे धक्के मार रहा था इसलिए वो मज़े ले रही थीं.

पर मुझे स्लो मोशन में मज़ा नहीं आ रहा था तो मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया और मैंने एक बार फिर से जोश दिखाया और अपना लंड बाहर निकाला और पायल को गोद में उठाकर सीधा टेबल पर लेटा दिया.

यह सब इतना जल्दी हुआ कि पायल भाभी को संभलने का मौका ही नहीं मिला. मैंने तेज़ी से चोदम पेली शुरू कर दी. वो फिर से चिल्लाने लगीं- हरामजादे दानव… आह… मुझे एक बार में ही मार डाल… कुत्ते… आह… मार दिया… अह… मुझे और ज़्यादा जोश आ गया तो मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और गोद में लेकर चोदने लगा.

भाभी ने भी मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मेरे पेट पर नाख़ून गड़ा दिए. मेरा पावर तो खत्म होने का नाम ही ले रहा था. भाभी तो बस चीखे जा रही थीं मैंने फिर से उन्हें टेबल पर लेटाया और उनके मम्मों को पकड़ कर लगभग नोंच डाला और धक्के मारने लगा.

पायल भाभी बुरी तरह से काँप रही थीं और खुद को मुझसे छुड़ाने की कोशिश कर रही थीं, पर वो इतना थक चुकी थी कि बस चिल्लाने और रोने के अलावा कुछ नहीं कर पा रही थीं.

मैं भी थक चुका था और करीब 10-15 धक्कों के बाद मैं टूट गया और भाभी की चूत में फव्वारा चला कर आँखें बंद करके उनके मम्मों में मुँह देकर लेट गया.

कुछ मिनट बाद मैंने हिम्मत करके पायल भाभी को बेड पर लिटाया और खुद भी उनके बगल में झटके से गिर पड़ा. पायल भाभी तो चुदते-चुदते ही सो सी गई थीं और मुझे भी बहुत तेज नींद आने लगी.

सुबह के 5 बज चुके थे. सुबह बेबी के जागने की वजह से हमारी आँख खुली. पायल भाभी की तो उठने की हिम्मत ही नहीं हो रही थी. फिर मैं ही थोड़ा जोश दिखा कर बेबी को पालने से निकल कर बेड पर हम दोनों के बीच ले आया. अब पायल ने उसे चुप करा दिया और अपने सीने से लगाकर सो गईं.

करीब 11 बजे मेरी आँख खुली तो देखा कि मेरा लंड साला दर्द कर रहा था.
कमरे की हालत बहुत गंदी हो रही थी. पायल भाभी का शरीर जगह जगह से लाल हो गया था जो कि मेरे प्यार के निशानी थे.

मेरी पीठ पर भी उनके नाख़ूनों के निशान थे. मैं उठा और किचन में जाकर चाय बनाने लगा. चाय लेकर मैं बेडरूम में आया और चाय साइड में रखकर मैंने पायल भाभी को जगाकर उनके होंठ चूमकर गुड मॉर्निंग विश की. भाभी उठ कर बैठी हुईं और बोलीं- तुम क्यों परेशान हुए चाय बनाने के लिए… मुझे ही उठा देते? मैंने भी हंसते हुए कहा- जान तुमने वैसे ही रात में काफ़ी तकलीफ़ झेली है… अब तो मुझे सेवा करने का मौका दो. वो गर्दन हिलाकर मना करते हुए बोलीं- ना बाबा ना… रात को मौका दिया था तो तुमने मेरी हालत खराब कर दी थी. अब मुझे कोई मौका नहीं देना तुम्हें… तुम जंगली हो… अच्छा हुआ यह मेरा पहली बार नहीं था वरना मेरी तो तुम जान ही निकाल देते. मैं बोला- काश यह तुम्हारी पहली चुदाई होती… मैं तुम्हारी सील तोड़ पाता. वो बोलीं- भगवान ने मुझे बचा लिया तुमसे.

मैंने भी कहा- पर आज की रात कैसे बचोगी मुझसे. पायल भाभी हैरानी से बोलीं- क्या मतलब है तुम्हारा…? आज रात क्या करने वाले हो? मैं ज़ोर से हंसते हुए बोला- वो तुम आज रात को ही देखना… मैं क्या करता हूँ तुम्हारे साथ… आज की रात तुम हमेशा याद रखोगी क्योंकि मेरे पास केवल एक ही रात है… कल तो भैया वापिस आ जाएंगे. अब वो थोड़ा डरते हुए बोलीं- पता नहीं तुम क्या करने वाले हो. तुम्हारे दिमाग़ में क्या चल रहा है? मैं बोला- डार्लिंग, ये तो मेरे दिमाग़ में कई सालों से चल रहा है… पर मुझे कभी मौका ही नहीं मिला. आज मैं मौका नहीं गंवाऊंगा. खैर चलो… अभी मैं घर ठीक करने में तुम्हारी मदद कर देता हूँ.

फिर हम दोनों ने मिलकर साफ सफाई कर ली. मैंने भाभी को किस किया और बोला- रात को मेरा इंतजार करना जानेमन. मैं भाभी को आँख मारते हुए घर आ गया.

अब दोस्तो… आज रात में पायल के साथ क्या स्पेशल करने वाला था. यह मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊँगा. अगर आपको मेरी हिंदी सेक्स स्टोरी पसंद आई या नहीं, मुझे मेल ज़रूर कीजिएगा. [email protected]

Comments:

No comments!

Please sign up or log in to post a comment!