बस का सफर और प्यासी जवानी का साथ

सबसे मस्त सेक्स साईट अन्तर्वासना के प्रिय पाठको … आज मैं, मनु आपके सामने अपने साथ घटी सच्ची घटना साझा करने जा रहा हूँ.

यह बात तब की है, जब मैंने कालेज में नया नया दाखिला लिया था. घर से बाहर निकल कर सब कुछ नया नया सा लग रहा था.

मैं बरेली का रहने वाला हूँ और मैंने गाजियाबाद के जाने माने कालेज में दाखिला लिया.

कहते हैं कि ऊपर वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ के देता है. मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ. मैं जिस दिन हॉस्टल में दाखिला लेने के लिए घर से निकला, उस दिन पापा की जरूरी मीटिंग थी. इस वजह से मुझे बस से अपना सफर तय करना पड़ा. पर यह मेरे जीवन का सबसे सुहाना सफर रहा.

हुआ ऐसा कि जब मैं घर से निकला, तब तक काफी रात हो गई थी. जैसे ही बस बरेली से चली तो बारिश शुरू हो गई. मैंने बस में खिड़की की तरफ़ की सीट बुक करायी थी. मैं खिड़की के बगल में बैठा बारिश का मजा ले रहा था. कंडक्टर आया तो मैंने उसको अपना टिकट दिखाया और सो गया.

मेरी नींद तब खुली, जब बस ढाबे पर रुकी. तेज बारिश हो रही थी. इस वजह से लोग परेशान थे और बस में ही बैठे थे. मुझे भूख लगी थी तो मैं हिम्मत करके उतर गया और अपने लिए चिप्स और चाय ले आया.

जब मैं वापस आया तो देखा कि मेरी सीट पर एक माल किस्म की औरत बैठी हुई थी. उसकी उम्र करीब 32-35 साल होगी, पर वो पूरी टाईट थी. उसके चूचे 34 के, कमर 30 और गांड का साइज 36 इंच का होगा. उसका रंग गोरा और गर्दन पतली थी. मैं उसे अपनी सीट पर देख कर हड़बड़ा सा गया. पर वो मुझे देख कर मुस्कुरा कर बोली- मेरी सीट में पानी गिर रहा है … क्या मैं यहाँ बैठ सकती हूँ? मैं तो उसे देखते ही रह गया. फिर वो बोली- हां या ना? मैंने हां में अपनी गर्दन हिला दी. मैं उसके बगल में बैठ गया.

वो थोड़ा भीग गई थी, इस वजह से कांप रही थी. मैंने उसे चाय दी तो उसने बिना कुछ कहे ले ली. फिर आधा कप पीने के बाद बोली- सॉरी मैंने आपकी सारी चाय पी ली. फिर मेरी तरफ कप करके बोली- अब आप पी लीजिए. मैंने मना कर दिया और कहा कि मैं जूठी चाय नहीं पीता. उसने अश्लीलता से अपने होंठ काटे और बड़ी ही कातिल हंसी के साथ बोला कि जूठा पीने से प्यार बढ़ता है.

उसकी इस अदा से मैंने बिना सोचे समझे पूरी चाय एक घूंट में ही पी ली.

मैं अपने बारे में बता दूँ कि मेरा कद 5 फुट 8 इंच है. मैं आम लड़कों के हिसाब से थोड़ा ज्यादा गोरा हूँ.

मैं बचपन से ही फुटबाल और टाइक्वान्डो का खिलाड़ी रहा हूँ. मैं दिखने में आकर्षक और अच्छे नैन नक्श वाला हूँ. तो उसका इस तरह से मुझसे प्यार जताना मुझे अजीब नहीं लगा. क्योंकि इससे पहले भी लड़कियां और जवान औरतें मुझे देख कर मोहित हो जाती थीं.

मैं फिर से सो गया. बस करीब 10 किमी ही चली होगी कि वो मेरी जांघों पर लुढ़क गई. मुझे लगा कि इसे नींद आ गई है, तो मैं चुपचाप बैठा रहा.

थोड़ी देर बाद वो मेरा लौड़ा सहलाने लगी. तो मेरे बर्दाश्त के बाहर हो गया. मैंने सोचा कि अब तो इसे चोद कर ही रहूँगा.

मैंने भी उसकी गांड सहलानी शुरू कर दी. वो कसमसाने लगी. उसने साड़ी और डीप गले का ब्लाउज पहना था. मैं एक हाथ से उसके कूल्हे सहला रहा था और दूसरा हाथ मैंने साड़ी के नीचे से ब्लाउज के अन्दर डाल दिया. उसके चूचे जितने टाईट दिख रहे थे, उतने ही कोमल और बड़े थे. मैं सारा काम बड़ी ही चालाकी से कर रहा था ताकि कोई देख ना ले, वर्ना सारे हवस के पुजारी उस पर टूट पड़ते. वो माल ही ऐसी थी.

मैंने धीरे-धीरे उसकी साड़ी उठानी शुरू की तो उसने मेरा हाथ रोक दिया. वो बोलने लगी कि कोई देख लेगा. फिर उसने तौलिया निकाला और मेरी जांघों के ऊपर रख दिया. इसके बाद उसने मेरी जीन्स की चैन खोल कर मेरा लंड निकाला और हिलाने लगी.

अब मेरा लौड़ा भी पूरे जोश में आ गया था. मेरे लंड का साइज 6.5 इंच है और उसकी मालिश से लंड फूल कर और मोटा हो गया था. करीब 5 मिनट बाद ही मेरा माल निकल गया क्योंकि मैंने कुछ दिनों से मुठ्ठ भी नहीं मारी थी.

मैंने फिर से उसके चूचे दबाने शुरू किए, पर उसकी चूत में उंगली करने का कोई जुगाड़ नहीं हो रहा था. इधर मेरा लंड फिर से सलामी देने लगा. उसने मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं तो इतनी देर में तो आसमान में पहुंच गया था और उसकी लंड चुसाई का मजा ले रहा था.

अब उससे रहा नहीं गया और बोली कि तुम तो पूरे मजे ले रहे हो … पर मेरा क्या होगा. मुझे उसकी प्यासी शक्ल देख कर दया आ गई. मैंने उससे कहा- जो चाहे कर लो. अब तक गाजियाबाद आ चुका था और बस अपने स्टॉप की तरफ जाने लगी थी. वह बोली- क्यों ना आज रात को किसी होटल में रूक जायें … अच्छा बहाना भी है कि बारिश में बस खराब हो गई है.

मैं हां कर दी तो उसने तुरंत अपने पति को फोन लगाया जो ओमान में किसी कंपनी में काम करता था.
उसने कहा कि घर में सास ससुर को बता दो कि उसकी बस रास्ते में खराब हो गयी है और वो कल सुबह ही दूसरी बस पकड़ कर आएगी.

उसके पति ने भी उसे किसी अच्छे से होटल में रुकने की सलाह दे दी. मैं तो वैसे भी हॉस्टल के लिए निकला था.

उसने अगले ही स्टाप पर बस रुकवा दी. बारिश अभी भी हो रही थी, पर अब हम दोनों बारिश का पूरा मजा ले रहे थे. हम दोनों रोड में ही एक दूसरे के होंठ चूसने लगे. फिर ध्यान आया कि पहले होटल के लिये रिक्शा तो ले लें. रिक्शे वाले को बोल कर कि किसी अच्छे होटल में ले चले … हम फिर से अपनी चुम्मा चाटी में मस्त हो गए.

रिक्शा जल्दी ही होटल पहुंच गया. हम दोनों पूरी तरह से भीग गए थे. जब तक मैं रिक्शे वाले को पैसे दे रहा था, तब तक उसने एक कमरा अपने नाम पर बुक कर लिया. वो पूरी भीगी हुई थी होटल का स्टाफ भी उसे कुत्ते की तरह घूर रहा था. जैसे ही मैंने उसे अपनी तरफ खींचा, सब इधर उधर देखने लगे. वो बहुत खुश हो गई. फिर हम दोनों अपने कमरे में घुसे घुसते ही, वो मुझ पर टूट पड़ी. मेरे होंठों में होंठ डाल कर चूसने लगी. मैं भी उसका पूरा साथ देने लगा. फिर मैंने जैसे ही उसकी साड़ी उतारी, तो वो रोने लगी. मुझे लगा कि अब घन्टा कुछ नहीं होगा.

पर वो बेचारी खुद को सम्भाल के बोली- मेरे पति विदेश में नौकरी करते हैं … साल में एक दो बार ही आते हैं. हमारे दो बच्चे हैं. दोनों हॉस्टल में पढ़ते हैं. मेरी जिंदगी तो बेरंग हो गई है. मैंने उसे जोर से गले लगाया और कहा- मैं तुम्हारी जिंदगी में रंग भर दूंगा.

उसके 34 के कोमल चूचे मेरे सीने से टकरा रहे थे, मैं फिर से मदहोश होने लगा. फिर मैंने बिना देर किये उसे चूमना शुरू कर दिया. उसके होंठ चूसने के बाद मैं उसकी गर्दन चाटने लगा … अब वो पूरी तरह से तैयार थी. फिर मुझे ध्यान आया कि कपड़े तो पूरी तरह से भीग गए हैं. मैंने अपने कपड़े उतार दिए. अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था. मैंने जल्दबाजी करना ठीक नहीं समझा और ब्लाउज के ऊपर से ही उसके चूचे दबाने लगा. वो मस्ती में खो गई और आहें भरने लगी.

फिर धीरे-धीरे मैंने उसके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिए. उसके चूचे क्या कमाल के थे … गारी से गोरे … गोल और एकदम तने हुए मम्मे देख कर लंड हिनहिनाने लगा. मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके रसीले चूचे चूसने लगा. उसने अपने हाथ उठाकर मुझे ब्रा खोलने का इशारा किया. मैंने झट से उसकी ब्रा उतार दी.


अब वो सिर्फ पेटीकोट में मेरे सामने थी. मैं खुद पर काबू नहीं रख पाया और जल्दी से उसके पेटीकोट के साथ उसकी पेंटी भी उतार दी. वो सर से लेकर पैर तक पूरी कयामत थी. उसके बड़े बड़े चूचे, पतली कमर … नीचे क्लीन शेव्ड चूत. वो बोली- मुझे तो पूरा नंगा कर दिया है अपना लंड कब दिखाओगे.

मैंने अपना लंड उसके सामने रख दिया जो इस वक्त फूल कर 7 इंच लम्बा हो गया था. उसकी आँखों में चमक आ गई और वो झुक कर लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी. वो पूरा लौड़ा गले तक ले जा रही थी और बुरी तरह से चूस रही थी. मैं भी उसका सर पकड़ कर उसका पूरा साथ दे रहा था.

करीब 15 मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ, तो उसने जोर से लौड़ा चूसना शुरू कर दिया. वो मेरे लंड का पूरा माल पी गई. लौड़ा पूरी तरह से साफ करने के बाद वो बेड पर टांगें फैला कर लेट गई. मैं समझ गया कि अब मेरी बारी है. मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी प्यारी सी चूत पर लगाई, वो सिहर गई. अब मैं उसकी चूत चाटने लगा और जीभ अन्दर बाहर फिराने लगा. वो जोर जोर से सिसकियां लेने लगी. मैं बीच बीच में उसकी चूचियां भी ऐंठ दे रहा था, तो वो छटपटा जा रही थी. थोड़ी ही देर में वो अकड़ने लगी और ढेर सारा पानी मेरे मुँह पे मार दिया.

अब वो बहुत खुश हुई और कहने लगी कि आज तक उसके पति ने उसकी चूत कभी नहीं चाटी. वो पूरी तरह से गीली और बदहवास हो रही थी. उसने मेरा लौड़ा पकड़ा और चूत के छेद में लगा कर बोली कि मैं बहुत दिनों से प्यासी हूँ … प्लीज मेरी प्यास बुझा दो.

मैंने एक ही झटके में पूरा लौड़ा उसकी चूत में उतार दिया. वो दर्द से चीखने लगी. उसकी चूत दो बच्चों की माँ के हिसाब से सच में बहुत टाईट थी. मैं वहीं रूक गया और उसके बबले चूसने लगा वो थोड़ी देर हांफने के बाद शांत हो गई.

फिर मैंने धीरे धीरे झटके मारना शुरू कर दिया. अब वो भी चुदाई का पूरा मजा ले रही थी. केवल 10 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और निढाल हो गई. मैं दो बार पहले ही झड़ चुका था तो मैं मैदान में डटा रहा. मैं और जोर जोर से झटके मारने लगा और उसके चूचे दबाने लगा. थोड़ी देर में वो भी जोश में आ गई और हर झटके का जवाब देने लगी.

अब दोनों तरफ से जबरदस्त चुदाई चल रही थी. अच्छे खासे झटके मारने के बाद हम दोनों लगभग एक साथ झड़ गए. और चिपक कर लेट गए.

अब तक वो पूरी तरह से खुल गई थी. थोड़ी देर चिपक कर लेटने के बाद बोली कि तुम सीधे लेट जाओ.


मैं चित लेटा तो मेरे लंड के ऊपर बैठ गई. फिर उसने धीरे से मेरा लौड़ा अपनी चूत में डाला और खुद उछल उछल कर झटके मारने लगी. हम दोनों चुदाई में इतना मस्त थे कि झड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थे. वो बुरी तरह से थक गई थी तो मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से जोरदार चुदाई करने लगा. मैं दोनों हाथों से उसके बबले बुरी तरह से दबा रहा था. हम दोनों बुरी तरह से सिसकियां ले रहे थे. बीस मिनट की धुआंधार चुदाई के बाद हम दोनों बेड पर ढेर हो गए और एक दूसरे से चिपक कर सो गए.

सुबह जब मैं उठा तो उसके प्यारे से चेहरे पर अलग ही चमक थी और वो मेरी बांहों में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. मैंने उसके होंठ चूसने शुरू किए तो वो उठ गई और मुझसे चिपक गई. हम दोनों ने फिर एक बार चुदाई की और वो मेरे कान में बहुत प्यार से बोली- प्लीज़ मुझे छोड़ कर कहीं मत जाना. मैंने उसके होंठ चूमे और वादा किया कि उसे कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा.

फिर हम दोनों नाश्ता कर के उसके घर के लिए निकल गए. उसने मुझे अपना घर दिखाया और अपना मोबाइल नंबर भी दिया.

फिर कालेज के तीन साल कब निकल गए, पता ही नहीं चला. मैंने उसे कई बार चोदा और भी कई लड़कियों को चोदा, पर उसे कभी इस बारे में नहीं बताया.

फिर मेरा प्लेसमेंट मुंबई हो गया और मैं वहां चला गया. उससे फोन पर बात होती थी … तो कुछ महीने बाद उसने बताया कि उसका पति वापस आ गया है.

मुझे खुशी हुई कि अब बेचारी खुशी से रहेगी और मैंने भी उससे बात करना बंद कर दिया. पर मेरा चुदाई का सुहाना सफर ऐसे ही चलता रहा.

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे [email protected] पर मेल करें. यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, अगर आपको कहानी पसंद आएगी तो और भी लड़कियों के साथ के सच्चे सेक्सी अनुभव लिखूंगा.

Comments:

No comments!

Please sign up or log in to post a comment!