वासना का मस्त खेल-4

इस मस्त सेक्स कहानी में अब तक की आपने पढ़ा कि मैंने प्रिया की चूत को चूस कर उसे झड़ा दिया था. अब आगे …

मैं भी अब उसकी जांघों के बीच से अपना सिर निकाल‌ कर प्रिया के बगल में लेट गया. जितना कामोत्तेजक प्रिया का रस्खलन हुआ था, उसे देखकर लग रहा था कि वो कम से कम अगले तीन चार मिनट तक होश में नहीं आयेगी. मैंने भी अब उसे छेड़ा नहीं और चुपचाप उसकी बगल में लेटा रहा.

कुछ देर तक प्रिया वैसे ही पड़ी रही और फिर धीरे से उसने करवट बदल कर अपना मुँह मेरी तरफ कर लिया. उसकी आंखों में सन्तुष्टि के भाव मैं साफ‌ देख सकता था साथ ही हल्की सी शर्म भी उसकी आंखों में दिखाई‌ दे रही थी.

मैंने भी करवट बदल कर अपना मुँह उसकी तरफ कर लिया और धीरे धीरे उसके नंगे बदन को सहलाते हुए “कैसी रही? मैंने आंख मारकर कहा. “शैतान, मुझे तो पूरी नंगी करके सब कुछ देख लिया मेरा और खुद … खुद??” प्रिया ने मेरे कान में धीरे से कहा. “देखा है तो इतना मजा भी तो दिया है, वैसे मेरा क्या देखना है तुमको?” मैंने भी सेक्सी आवाजें निकलते हुए कहा. “तुम्हारा वो!” प्रिया ने थोड़ा शर्माते हुए कहा. “वो क्या … ठीक से तो बताओ?” मैंने प्रिया छेड़ने के लिये जानबूझकर ऐसा पूछा.

मैंने प्रिया को अपने गले से लगा रखा था और उसके बदन के साथ ठिठोली भी कर रहा था. मैंने उससे खुलकर बताने के लिए कहा, तो वो जैसे छुई मुई सी शर्मा गई.

“धत्त, बड़े शैतान हो तुम … मुझे नहीं पता उसे क्या कहते हैं.” प्रिया ने अपनी आंखें मेरी आंखों में डालकर शर्माते हुए कहा. “प्लीज प्रिया … ऐसा मत करो … बोलो ना … मैं जानता हूँ, तुम्हें सब पता है.” मैंने आंख मारते हुए उससे विनती की.

प्रिया अब धीरे से मेरे कानों के पास आकर फुसफुसा कर बोल पड़ी- तुम्हारा लंड …

यह कह कर उसने अपना मुँह मेरे सीने में छुपा लिया. मैंने अपने हाथों से उसका चेहरा ऊपर उठा लिया और एक बार प्यार से उसके होंठों को चूमने के बाद उसकी चूची को पकड़ लिया, मगर तभी प्रिया ने मुझे धक्का देकर खुद से‌ अलग कर दिया और बिना कुछ कहे फुर्ती से उठकर दोनों हाथों से मेरी निक्कर के साथ साथ मेरे अण्डरवियर को भी निकालकर अलग कर दिया, जिसमें मैंने भी अपने कूल्हों को उठाकर उसकी मदद की.

मैं नीचे से अब नंगा हो गया था और मेरा उत्तेजित लंड प्रिया के सामने था, जिसे वो आंखें फाड़ फाड़ कर ऐसे देख रही थी … जैसे कि वो पहली बार किसी के लंड को देख रही हो.



मैंने अब अपनी टी-शर्ट को भी उतार कर अलग कर दिया और बिल्कुल नंगा होकर प्रिया का हाथ अपने लंड पर रखवा दिया. प्रिया के कोमल हाथ का स्पर्श होते ही मेरे लंड ने झटका सा खाया और अकड़ कर वो और भी सख्त हो गया.

मेरे लंड को देखकर एक बार तो प्रिया की आंखें ऐसे चमक उठी थीं, जैसे कि किसी बच्चे को उसकी सबसे मनपसंद चॉकलेट या खिलौना मिल गया हो. मगर साथ ही उसकी आंखों में हैरानी के साथ साथ चिंता के भी भाव उभर आये.

मैंने उसकी मनोस्थिति भांप ली थी, ऐसा शायद मेरे लंड के आकार के कारण था. प्रिया‌ के हाथ के दबाव से मेरे लंड के आगे की चमड़ी थोड़ा सा पीछे हो गयी थी और गुलाबी रंग का हल्का सा सुपारा नजर आ रहा था.

तभी प्रिया ने लंड के आगे की चमड़ी को खींचकर पूरा पीछे कर दिया और सुपारे को बाहर निकाल लिया, जो कि एकदम लाल होकर चमक रहा था. इतनी देर से यह सब चल रहा था, तो ज़ाहिर है कि मेरे लंड ने भी अपना काम रस निकाल दिया था. इस वजह से वो और भी चिकना और चमकीला हो गया था.

प्रिया का‌ हाथ फिसलता हुआ अब मेरे गोलों पर आ गया, जो कि उत्तेजना में आकर सख्त और गोल हो गए थे. मेरे गोलों को हाथ से पकड़कर देखते‌ हुए प्रिया ने गोलों को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर दबा दिया. “उह्ह्हह्ह … क्या कर रही हो?” मैंने दर्द से तड़पते हुए कहा, जिससे प्रिया जोर से हंसने लगी और वापस अपना हाथ मेरे लंड पर ले आई. वो मेरे लंड को पकड़ कर धीरे धीरे हिला‌ रही थी कि तभी मैंने एक हाथ से उसकी गर्दन को पकड़ कर अपने लंड पर दबा दिया, जिससे मेरा सुपारा उसके होंठों से छू गया.

प्रिया मेरा इशारा समझ गयी थी. उसने मेरे सुपारे को पहले तो होंठों से चूमा‌ और‌ फिर अपनी जुबान को बाहर निकालकर हल्का सा सुपारे को छूकर देखा. पता नहीं … उसे मेरे लंड के रस का स्वाद पसंद नहीं आया था शायद. उसने अपनी गर्दन ऊपर उठा ली और अजीब सा मुँह बनाकर मेरी तरफ देखने लगी, जैसे कि वो बताना चाह रही हो कि उसे ये अच्छा नहीं लगा.

मैंने‌ अब उसका हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और वो किसी ‌‌‌‌‌अच्छे बच्चे की तरह चुपचाप मेरी बगल में आकर लेट गयी. मैंने उसकी‌ एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और जोर से चूसने लगा. “अआआहह … ओययय … धीरे … अभी भी दुःख रहा है.” प्रिया ने एक सिसकारी लेकर मेरे सिर के बालों को‌ सहलाते हुए कहा.

उसकी चूची को चूसते हुए मैंने अपने हाथ को हरकत दी और उसके चिकने बदन को ऊपर से नीचे तक सहलाने लगा.
प्रिया उत्तेजित हो गयी थी और मज़े से हल्की हल्की सिसकारियां भरने लगी थी. प्रिया के बदन को सहलाते हुए मैं अपने हाथों को उसकी जांघों पर ले आया और उसकी चिकनी जांघों को हल्के हल्के मुट्ठी में भर कर दबाना शुरू कर दिया. इससे प्रिया ने अब खुद ही अपने पैरों को फैला लिया. यह इस बात का इशारा था कि अब उसकी चूत कुछ मांग रही थी.

प्रिया की जांघों को सहलाते हुए मैं अपना हाथ उसकी चुत पर ले आया और उसकी छोटी सी नर्म मुलायम चिकनी चूत मेरी हथेली में खो गयी. कामरस और मेरे मुँह की लार से उसकी चुत अभी तक काफी गीली थी. प्रिया की चुत को सहलाते हुए मैंने अपनी बीच वाली उंगली को चुत की दोनों फांकों के बीच घुसा दिया और फिर चुत की दरार को ऊपर से सहलाते हुए नीचे उसके प्रवेशद्वार पर ले आया … जो कि मुझे सुलगता हुआ सा महसूस हो रहा था. मेरी उंगली मानो जल ही उठी थी. उसकी चुत से बहुत ही तेज गर्मी निकल रही थी और गर्म गर्म प्रेमरस का रिसाव करता उसका प्रवेशद्वार तो जैसे सुलग ही रहा था.

जैसे ही मैंने अपनी उंगली को प्रिया की चुत के प्रवेशद्वार पर रखा, प्रिया ने सुबकते हुए कामुक आवाज में कहा- अआह्ह्ह … महेश्श्श्शश … उसने अपने दोनों हाथों से मेरे हाथ को जोर से पकड़कर अपनी कमर को ऊपर उठा लिया. उसे एक झटका सा लगा था और उसने अपनी अवस्था का ज्ञान अपनी कमर हिलाकर करवाया.

मैंने पहले तो अपनी उंगली को प्रेमद्वार पर गोल‌ गोल घुमाया और फिर उंगली को प्रेमद्वार पर रख कर हल्का सा दबा दिया, जिससे मेरी उंगली का लगभग आधा पौरा उसमें धंस गया और प्रिया के मुँह से एक जोर की सिसकारी निकल गयी- उइइईईई … इश्श्श्श्श … अह … ओह … उय्य्य्य … उसने मेरे हाथ को जोर से अपनी चुत पर दबा लिया और फिर से अपनी कमर को ऊपर हवा में उठा लिया. प्रिया के ऐसा करने से मेरी उंगली उसके प्रवेशद्वार में थोड़ा और घुस गयी, जिससे प्रिया के मुँह से “इइईईई … श्श्शशश … आआआह्ह्हह …” की जोरों से आवाज निकल गयी.

प्रिया अब फिर से पूरे जोश में आ गयी थी और मेरा तो हाल बस पूछो ही मत. मुझमें अब और सब्र बाकी नहीं था इसलिए मैं अब उठ कर प्रिया की दोनों टांगों के बीच में आ गया और एक भरपूर निगाह उसकी चूत पर डाली, जो कि मेरे मुँह के लार और उसके खुद के रस से सराबोर होकर चमक रही थी.

मैं एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर थोड़ा सा आगे की तरफ झुक गया और अपने सुपारे को उसकी चुत की दरार पर लगा दिया, जिससे प्रिया ने एक आह … भरी और अपनी टांगों को थोड़ा और फैला लिया.
उसे पता था कि मैं अब आगे क्या करने वाला हूँ … इसलिये वो पहले ही समझ गयी थी.

मैंने अपने लंड के सुपारे को उसकी चूत की दोनों फांकों के बीच में लगाकर पहले तो धीरे धीरे घिसकर उसकी चुत को सहलाया और फिर धीरे से सुपारे को उसके प्रवेशद्वार पर लगा दिया. मेरे लंड के दबाव से चूत की दोनों फांकें फैल गयी थीं, जिससे उसकी चूत का मुँह भी थोड़ा सा खुल गया.

प्रिया ने भी अब अपनी सांसें रोक लीं और वो अब धक्के खाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी. मैंने भी देर ना करते हुए धीरे से अपने लंड को प्रिया की चूत में धकेल दिया, मगर मेरा लंड फिसल गया और धक्का उसकी चूत के दाने पर लगा.

“आआह … आ …ह्ह्ह्हहह … ओओययय … क्या कर रहा है … आराम से करर … ना … मेरा ये पहली बार है!” प्रिया ने कराहते हुए कहा और एक जोर की सांस लेकर अपने शरीर को कड़ा कर लिया.

“क्याआआ …” प्रिया के मुँह से ये सुनते ही, मेरे मुँह से हैरानी के कारण निकल गया और मैं चौंक कर उसकी तरफ देखने लगा.

वो अपनी आंखें बन्द करके कसक सी रही थी और मेरे धक्का लगाने के डर से अपने शरीर को कड़ा किए हुए थी. प्रिया की हरकतों से तो नहीं लग रहा था कि वो अभी तक वो कुंवारी बची होगी, मगर जैसा उसने कहा और उसकी चुत को देखकर ये लग भी रहा था कि ऐसा हो भी सकता है.

खैर ये तो अभी पता चल ही जाएगा, मैंने फिर से अपने लंड को ठीक जगह पर लगाया और अबकी बार मैंने थोड़ा जोर से धक्का दे दिया.

एक तो कामरस के निकलने से प्रवेशद्वार भीगकर चिकना हो रहां था और दूसरा प्रिया खुद भी शारीरिक और मानसिक रुप से इसके लिये तैयार थी. इसलिये मेरा सुपारा उसकी चूत के छोटे से दरवाज़े को भेदकर अन्दर घुस गया.

प्रिया, “अआआआ … ईईईई …” कहकर फिर से कराह पड़ी. उसकी आंखें फैलकर चौड़ी हो गईं और उसने‌ दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया. “ओयय … बहुत दर्द हो रहा है, मम्मीईईई …!,ओय्यय … महेश्श्स … बहुत दर्द हो रहा है.” प्रिया ने दर्द से कराहते हुए कहा.

सच में उसकी चूत बहुत कसी हुई थी. अब तक जैसा कि मैं सोच रहा था कि उसने पहले भी ये सब किया होगा वैसा लग नहीं रहा था. उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड के सुपारे को पूरी तरह से जकड़ लिया था, जिससे मेरे सुपारे में एक खुजली सी होने लगी.

मैं आगे झुक कर उसके गालों को चूमने लगा और “हो गया … हो गया … अब तो बस … बस एक बार हल्का सा दर्द और होगा …” मैंने उसे ये बस तसल्ली देने के लिये कहा था.
मगर मुझे पता था असली दर्द तो अभी उसे झेलना बाकी है. उसने भी मेरी बात मान ली और अपने शरीर को फिर से कड़ा करके वो मेरा अगला धक्का खाने के लिये तैयार हो गयी.

कुछ देर मैं ऐसे ही उसके गालों को चूमता चाटता रहा और फिर अचानक से अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोर का धक्का लगा दिया. अबकी बार … अबकी बार लगभग मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चुत की दीवारों को चीरता हुआ अन्दर घुस गया था, जिससे प्रिया के मुँह से एक जोर की चीख निकल गयी.

“अआआआ … उईईईई … मर गईईई … ईई …ई …” उसने फिर से मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया. प्रिया की चीख कहीं उसकी मम्मी को ना सुनाई दे जाए इसलिये जल्दी से मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर उसका मुँह बन्द कर दिया. लेकिन उसकी घुटी घुटी सी आवाज़ अब भी निकलती रही.

मैंने उसी तरह प्रिया होंठों को चूसते हुए ही पहले तो अपने लंड को थोड़ा सा बाहर खींच लिया, जिससे प्रिया को कुछ राहत मिल गयी और मेरी कमर पर उसके हाथों की पकड़ भी कुछ हल्की हो गयी.

इसके तुरंत बाद ही मैंने एक जोरदार धक्का फिर से लगा दिया, जिससे प्रिया के मुँह से “उऊऊहू … उह … ऊऊऊई …” की आवाज निकली और उसकी आंखें बाहर को उबल आईं. उसके हाथ मेरी कमर पर जोर से कस गए और उसकी आंखों में आंसू भर आए.

प्रिया का मुँह मेरे होंठों से बन्द था इसलिये उसने “ऊगूंगूगूगू … गूऊऊ …” कहते हुए पहले तो अपने होंठों को मेरे मुँह से छुड़वाया और फिर दर्द से बिलबिलाने लगी. “आईईई … मम्मीईईई … बहुत दर्द हो रहा है इसे बाहर निकाल‌ लो प्लीईज, मुझसे नहीं होगा … ओययय … महेश्श … इसे बाहर निकाल ले …” ये कहते हुए वो छटपटाने लगी.

मैंने थोड़ा सा ऊपर उठकर नीचे अपने लंड की तरफ देखा तो मेरी आंखों में एक नयी चमक सी आ गयी, क्योंकि मेरा आधे से ज्यादा‌ लंड प्रिया की चुत में घुसा हुआ था और उस पर मुझे कुछ खून लगा हुआ दिखाई दे रहा था, इसका मतलब था कि सही‌ में प्रिया अभी तक कुंवारी ही थी. प्रिया जैसी खूबसूरत लड़की और उसके कौमार्य को भंग करने का सौभाग्य मुझे मिला, ये सोचकर ही मैं उत्तेजना से भर गया.

बस, अब तो हो गया, यह आखिरी दर्द था … बस थोड़ा सा और सह लो … फिर सब ठीक हो जाएगा.” मैंने एक हाथ से उसकी चूची को सहलाते हुए कहा और साथ ही फिर से एक धक्का और लगाकर अपना पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया जिससे प्रिया फिर से तिलमिला उठी- आआईईई … मम्मीईईई … ईईई!

अब उसकी आंखों से टप टप आंसू बहने लगे. मैं उसको चूमे जा रहा था और प्रिया ने मुझे धक्के देकर हटाने की कोशिश करते हुए कहा- नहीं … मुझे नहीं करना … आईईई … मम्मीईईई … इसे तुम बाहर निकाल लो … प्प् …प्लीज!

लेकिन मैं अपने लंड को प्रिया की चुत में घुसाये हुए उससे लिपटा रहा और उसके गालों को चूमने चाटने लगा. मैं नीचे से अब कुछ भी हरकत नहीं कर रहा था, बस ऊपर से ही उसके होंठों व गालों को चूमे जा रहा था.

कुछ देर तक मैं नीचे से बिना कोई हरकत किये ऐसे ही प्रिया के बदन पर लेटे हुए उसके होंठों व गालों को चूमता चाटता रहा और उसे सांत्वना देने के लिये उसके सिर के बालों को भी प्यार से सहलाता रहा, जिससे प्रिया कुछ शांत होने लगी.

प्रिया जब कुछ शांत हो गयी, तो मैं उस पर लेटे लेटे ही धीरे धीरे अपने लंड को चुत में अन्दर बाहर करने लगा. मगर जैसे ही लंड ने हरकत करनी शुरू की, प्रिया को फिर से दर्द का एहसास होने लगा. “अआआह्ह हह … महेश्श … बहुत दुःख रहा है … प्लीज मेरी बात मान लो … आईई … मुझसे नहीं होगा … ओह्ह्ह … मम्मीईई … ओय्यय … महेश्श …”

मैंने अब रुकना ठीक नहीं समझा और बस यूं ही लंड को चूत में हिलाने लगा. मेरे लंड की हरकत के साथ साथ प्रिया ने कराहते हुए मुझसे कहा- आईईई … अआआ … ह्ह्हहह … उऊऊ … ह्ह्हहह …ओय्य्यय … अआआ … ह्ह्हहह … उऊऊ … ह्ह्हहह …”

वो दर्द से आवाज कर रही थी लेकिन मैं अब रूका नहीं बल्कि एक हाथ से उसकी चूचियों को भी दबोच लिया और वैसे ही धीरे धीरे को अपने लंड को उसकी चुत में अन्दर बाहर करता रहा. साथ‌ ही उसे फिर से उत्तेजित करने के लिये मैं उसके होंठों व गालों को चूमते चाटते हुए उसकी चूचियों को भी सहलाने‌ लगा.

कुछ देर तक तो प्रिया ऐसे ही कराहती रही. फिर धीरे धीरे वो शांत होने लगी और मेरी कमर पर उसके हाथों की पकड़ कुछ ढीली पड़ने लगी. वो भी अब हल्का हल्का मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाने लगी थी, जिससे मैं समझ गया कि उसका दर्द अब कम हो रहा है.

इसलिये मैंने अपना काम जारी रखते हुए धीरे से अपनी जुबान को उसके मुँह में घुसा दिया, जिसे प्रिया भी हल्का हल्का चूसने लगी.

प्रिया अब धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी थी क्योंकि उसकी चुत में अब हल्की सी नमी आ गयी थी, जिससे चुत की दीवारें चिकनी हो गईं … और इसका अहसास मुझे अपने लंड से हो रहा था. मेरा लंड इस समय थोड़ा आसानी से चुत के अन्दर बाहर हो रहा था.

मैं भी उसके होंठों का मजा लेते हुए वैसे ही धीरे धीरे धक्के‌ लगाता रहा, जिससे कुछ ही देर में प्रिया अपना सारा दर्द भूल कर उन मादक पलों का आनन्द लेने लगी. उसकी कमर भी अब नीचे से धीरे धीरे हरकत करने लगी थी. ये इस बात का इशारा था कि उसे भी अब मजा आने लगा है.

मैंने भी अब धीरे धीरे अपने कूल्हों को उठाकर धक्के लगाने शुरू कर दिए … जिससे प्रिया फिर से कराहने लगी और मेरे होंठों से अपने होंठ अलग करके सिसियाना शुरू कर दिया था.

“ओह्ह … मम्मीईईई … दुख रहा है ना … प्लीज … धीरे करो … बहुत दर्द हो रहा है … उफ्फ्फ्फ़ … मुझे अगर पता होता ना … कि इतना दर्द होता है, तो मैं ये कभी भी नहीं करती …” ये सब उसने दर्द से कराहते हुए कहा. वो मुझसे शिकायत तो कर रही थी …‌ मगर साथ ही उसकी कमर अब भी नीचे से धीरे धीरे हरकत कर रही थी.

“अच्छा जी … और अब … अब क्या करोगी?” मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उससे पूछा और उसके गाल पर एक चुम्मी लेकर फिर से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

प्रिया ने मेरी बात का कोई‌ जवाब तो नहीं दिया, मगर उसने अपना मुँह खोलकर फिर से मेरी जुबान को अपने मुँह में खींच लिया और उसे जोरों से चूसने लगी. उसके दोनों हाथ भी मेरी कमर पर से मेरे सिर पर आ गए और वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों व जीभ को जोरों से चूसने लगी.

धीरे धीरे प्रिया की‌ कराहें, मादक सिसकारियों में बदल गईं और उसके दोनों हाथों ने मेरे सिर को छोड़ दिया और अब वे वापस मेरी पीठ पर रेंगने लगे. अब तक जिस दर्द की वजह से प्रिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, वही दर्द अब उसे मज़े दे रहा था.

मैं भी अब धीरे धीरे अपने धक्कों की गति को बढ़ाने लगा, जिससे प्रिया के मुँह से सिसकारियां फूटनी‌ शुरू हो गईं. मेरे धक्कों के साथ साथ प्रिया भी अब अपने कूल्हों‌ को‌ जोरों से उचकाने लगी थी. उसने मेरे होंठों को छोड़ दिया और जोरों से अपने कूल्हों को उचका उचका कर अपनी चुत से मेरे लंड का स्वागत करने लगी.

वो अब पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी थी, इसलिये उसकी चुत ने भी अब कामरस उगलना शुरू कर दिया. कामरस ने चुत की दीवारों की चिकनाई को और भी बढ़ा दिया और मेरा लंड अब आसानी से चुत के अन्दर बाहर होने लगा.

आप इस मस्त सेक्स कहानी पर अपने विचार मुझे ईमेल से भेज सकते हैं. [email protected] कहानी जारी है.

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