मुझे मेरे अपनों ने चोदा

हाय मैं प्रिया हूँ, आज मैं आपको मेरी सहेली निशा की सेक्स स्टोरी बता रही हूँ. उसने मुझे अपनी कहानी लिख कर अन्तर्वासना पर भेजने का कहा, तो मैंने उसकी कहानी को शब्द देने का प्रयास किया है. आइये निशा की जुबानी उसकी कहानी का मजा लेते हैं.

मेरा नाम निशा है. मेरी उम्र 27 साल है और फ़िगर 37सी-26-36 का है. दो साल पहले मेरी शादी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से हुई थी. पहले मेरे पति मुझे बहुत खुश रखते हैं, इतना अधिक खुश रखते हैं कि वो पिछले डेढ़ साल से अमरिका में हैं … और मैं इधर मुम्बई में हूँ.

मेरा मायका नासिक में है. मैं उधर ही पली बढ़ी. जब मैं कमसिन थी तभी से हमारा बाजू वाला मेरे हाथ से अपना लंड हिलवा कर मजे लेता था. उस वक्त मुझे पता नहीं था कि मैं क्या कर रही हूँ. तब मुझे लगता था कि ये एक खेल है.

लेकिन जैसे जैसे मैं बढ़ती गई, वैसे ही मेरे जीवन में हर बार एक अलग आदमी आता गया. आदमी क्या सेक्स पार्टनर आए. अब मेरी उमर 19+ की हो चुकी थी और मैं सेक्स के बारे में कुछ ज्यादा नहीं जानती थी.

तभी मेरे जीवन में पहला आदमी आया, वो मेरा भाई था. मेरे भैया की उम्र तब 23 साल की रही होगी. मेरे एग्जाम खत्म हुए थे और मैं घर आ गई थी. माँ काम में व्यस्त थीं और पापा काम पे गए थे. भैया टीवी देख रहे थे. मैंने माँ को बोला- माँ मुझे अब घूमने जाने का मन है, क्योंकि एग्जाम की वजह से मैं एक महीना कहीं भी नहीं गई हूँ. माँ बोलीं- एक काम करो, तुम अपने भैया के साथ नासिक के बड़े वाले तालाब में नहाने चली जाओ.

मैं उछल पड़ी. मैंने भैया को साइकिल निकालने को कहा और मैंने दौड़कर तालाब में नहाने के लिये कपड़े लिये और भैया के साथ साइकिल पर बैठ गई. तालाब हमारे घर से करीबन 1.30 घंटे के रास्ते पर था, लेकिन भैया ने शार्टकट रास्ता निकाला. जिससे हम आधे घंटे में ही उधर पहुंचने वाले हो गए थे.

जाते वक्त रास्ता पथरीला था. मैंने भैया को और साइकिल को कसके पकड़ा हुआ था. एक बार हमारी साइकिल एक बड़े से गड्डे में घुसने लगी थी. तब भैया ने झट से मुझे सीने पर हाथ लगाते हुए पकड़ा. मैं डर गई, लेकिन भैया ने अच्छी तरह से साइकिल निकाली. हम दोनों फिर आगे बढ़ गए. अब जब हम जा आगे रहे थे, तब मुझे अहसास हुआ कि भैया ने अभी तक अपना हाथ मेरे सीने से निकाला नहीं था और वो अपने हाथों से मेरे मम्मों को दबा रहा है.

उस वक्त मेरे मम्मों की साइज़ 30 हो चुकी थी.

उस वक्त मैंने मेरे भैया को नहीं, जैसे किसी और आदमी को भैया में महसूस किया. मैंने भैया को अपना हाथ निकालने को कहा. उसने हाथ हटा अलिया.

हम आखिर में तालाब पर पहुंच गए. हमने पहले बहुत खेल खेले. भैया ने मुझे उधर के अलग अलग नजारे दिखाए. बाद में हमने तालाब में जाने का फ़ैसला किया.

दोपहर का वक्त था, एक बजे थे. उधर लोग कम ही थे. इसलिये पहले हमने कुछ खाया और तालाब में उतरने के लिये आगे बढ़े. तभी मुझे याद आया कि मैं अपना स्विमिंग सूट तो लाना ही भूल गई. मैं अपने आप पे गुस्सा होकर बैठ गई.

भैया अपनी शर्ट पेंट निकाल कर निक्कर में तालाब में उतरा और मुझे बुलाने लगा. मैंने भैया को स्विमिंग सूट न होने का बताया.

तब भैया बोले कि देखो तुम तौलिया तो लाई हो ना, तो एक काम करो … अन्दर ब्रा और पेंटी के ऊपर तौलिया लपेट कर अन्दर आ जा. मैं बोली- पर भैया मुझे शर्म आ रही है. भैया बोले- काहे की शर्म … चल आ जा … इधर कोई दिख ही नहीं रहा है. तू ब्रा पेंटी में ही स्विमिंग कर ले. मैं बोली- नहीं भैया मुझे शर्म आ रही है. भैया बोले- कुछ नहीं, चल जल्दी से आ जा मौसम बड़ा सुहाना हो रहा है. जल्दी कर … मैं तो हूँ … तू क्यों घबराती है.

मैंने सोचा कि एक तो मैं पहली बार किसी मर्द के सामने आधी नंगी होने वाली हूँ … कैसा लगेगा. बाद में फिर ख्याल आया कि क्या बात है, ये तो अपने भैया ही हैं.

मैंने अपना ड्रेस निकाला और वैसे ही ब्रा और निक्कर पर नहाने तालाब में चली गई. हम दोनों ने तालाब में बहुत मजा किया. नहाते नहाते जब मैं पानी के ऊपर आई, तो मेरी ब्रा निकल गई और मैं अपने नंगे दूध छिपाने के लिए पानी के अन्दर घुस गई. मैं शर्म से पानी के अन्दर छिपी रही.

भैया खेल खेलने के मूड में थे. वे बोले- चल अब मैं तुम्हें पकड़ने आ रहा हूँ, तू जल्दी से भाग कर बचना.

भैया मेरे पास आए और मुझसे भागता न देख कर बोले- क्या हुआ तू भागी क्यों नहीं? मैं बोली- भैया मेरी ब्रा पानी के अन्दर चली गई है. भैया बोले- तो क्या हुआ … चल कुछ नहीं होता. मैं बोली- आपको क्या … एक तो मैं ऊपर से पूरी नंगी हूँ और आप बोल रहे हैं … तो क्या? भैया हंस कर बोले- अच्छा ये बात है … मेरी बहना तू एक काम कर. मैंने अपनी निक्कर भी निकाल दी. अब मैं भी नंगा और तुम भी नंगी हो गई हो. अब चल भाग.

मैं भागी कि भैया ने मुझे झट से पकड़ लिया.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में जकड़ा तो मुझे उनके लंड की सख्ती महसूस हुई. फिर उन्होंने मुझे छोड़ दिया और बोले कि अब तेरी बारी.

अब मैं भैया को पकड़ने गई, तो भैया इधर उधर पानी में गए और मैं भी पूरे जोश के साथ उनका पीछा कर रही थी. भैया भागते भागते पानी के बाहर किनारे पर आ गए. मैं भी उनके पीछे किनारे पर आ गई. हम दोनों बहुत दूर सुनसान इलाके की तरफ चले गए थे. तभी मुझे ख्याल आया कि मैं तो पूरी नंगी हूँ. मैं उधर ही खड़ी हो गई. भैया मेरे पास आ रहे थे.

तब मैंने भैया को देखा … उनका लंड खड़ा हुआ था, तो मेरे मुँह से निकल गया- अरे ये क्या है लम्बा सा. भैया भी मेरे पास आ के खड़े हो गए और मुझे और मेरे पूरे नंगे शरीर को देखने लगे. ऐसे ही हम दोनों 5 मिनट तक खड़े रहे. भैया के उस लटक रहे लंड को मैं देख रही थी. मुझे मालूम था कि ये वही है, जो पड़ोसी मुझसे सहलवाया करता था. लेकिन ये कुछ ज्यादा ही लम्बा और मोटा था.

मैंने भैया से पूछा- भैया ये क्या है? भैया ने स्माइल दे कर बोला- इसे लंड या जादू की छड़ी कहते हैं. मैंने बोला- क्या जादू करता है ये … बोलो ना? भैया बोले- सच में जानना है, तो एक काम करो, इसे अपने हाथ में लेकर मसलो और इसका जादू देखो.

वैसा ही किया मैंने तो ये क्या हुआ, जो हिस्सा मेरे हाथ में था, वो देखते ही देखते मेरे हाथ से बाहर जाने लगा और भैया का लंड लोहे जैसा हो गया. मैंने भैया से पूछा इससे क्या करते हैं? तो भैया बोले- इसे चूत में डालते हैं. वे मेरी चुत पर हाथ लगाकर बोले- इसको इधर से अन्दर डालते है. मुँह में डालते हैं और पीछे गांड में भी डालते हैं.

मैं शर्मा गई और जाने लगी. तब भैया मुझे रोकते हुए बोले- किधर जा रही हो? मैं बोली- कपड़े पहनने. भैया बोले- खाना ऐसा अधूरा नहीं छोड़ा जाता. मैंने पूछा- खाना किधर है? वो बोले- इसको तुमने गर्म किया है ना … अब इसको ठंडा भी तो करो. इस तरह कह कर वे मुझे किस करने लगे. मेरे मम्मों को को दबाने लगे.

फिर भैया ने मुझे लिटाया और मुझे उलटा होने को कहा. मैं बोली- नहीं भैया. भैया बोले- क्या नहीं … दो साल से इस दिन की मैं राह देख रहा हूँ और तुम कहती हो नहीं. चुपचाप सेक्स का मजा लो.

यह कहकर वे मेरी गांड मारने लगे. उन्होंने मुझे पानी में ही कुतिया बना कर मेरे पीछे से लंड को मेरी गांड में पेल दिया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
बाद में भैया ने मुझे सीधा किया और अपना मूसल लंड मेरी चुत में डालने लगे.

मेरी छोटी सी चुत के हिसाब से उनका लंड काफी बड़ा था. लेकिन वो उसे घुसाए जा रहे थे. मैं बोली- भैया, ये मेरी में अन्दर नहीं जाएगा. मेरी इसका छेद छोटा है. भैया मेरे दूध दबा कर बोले- चुप रह साली रंडी … अब तू मुझे समझाएगी कि क्या छोटा होता है और क्या बड़ा होता है … मैंने कइयों के छेद फाड़े हैं. ऐसा कहकर उन्होंने अपने लंड को आहिस्ता आहिस्ता मेरी चूत में पेलना शुरू किया. वे लंड मेरी चूत के अन्दर डालने लगे और आखिर में उन्होंने अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चुत में घुसेड़ ही दिया.

मैं दर्द से चिल्ला उठी. मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था. लेकिन कुछ देर बाद मुझे मज़ा आने लगा. मैं गांड हिलाते हुए लंड लेने लगी और मैंने भैया से कहा- मार और जोर से … और तेज मार … फाड़ डाल. भैया भी जोर से मेरी चुदाई करने लगे.

पांच मिनट बाद भैया ने अपना लंड निकाला और मेरे मुँह में दे दिया और मैंने लंड चूसना चालू किया. तभी उन्होंने अपना पानी मेरे मुँह में डाल दिया. मैं भी अच्छा फील कर रही थी.

फिर उस दिन के बाद से हम दोनों में भाई बहन का नहीं, मियां बीवी का रिश्ता बन गया. बाद में हम घर चले आए.

कुछ दिन भैया ने मुझे चोद चोद कर पूरी चुदक्कड़ बना दिया था. अब तो मुझे खुद से लंड लेने की खुजली होने लगी थी.

कुछ दिन बाद में चाचा के पास जाने वाली थी. इसलिये पापा ने मुझे छोड़ने का फ़ैसला किया. हम ट्रेन में बैठे थे. हमारा सेकंड एसी का पर्दा वाला केबिन था. उसमें हमारे अलावा दो अमेरिकी भी थे. उसमें एक लड़की थी और एक आदमी था. हमने सोचा कि मियां बीवी होंगे … क्योंकि वो कर ही ऐसा रहे थे कि कोई भी समझ जाए.

हमारा रास्ता 3 घंटे का था. आधे घंटे बाद उन दोनों में किस चालू हुआ और वे 10 मिनट तक किस करते रहे.

तभी उस लड़की ने आदमी के पेंट में हाथ डाला और उसका लंड मसलने लगी. बाद में टीसी के आने के समय वो जरा वक्त के लिए शांत हो गए.

तभी उन्होंने पापा से पूछा कि आप लोग कहां जा रहे हैं … ये कौन है?

तभी उस अमेरिकी लड़की ने उस आदमी को पापा नाम लेकर पुकारा, तो हम दोनों दंग हो गए. मेरे पापा ने उस आदमी से पूछा- क्या ये आपकी बेटी है? वो बोला- हां. मेरे पापा ने पूछा- फिर आप इसके साथ ये क्या कर रहे थे? वो बोले- हम ओशो के शिष्य हैं और सेक्स कभी ये नहीं देखता कि भाई बहन है या पिता पुत्री हैं.
सेक्स आखिर सेक्स होता है … उसे महसूस किया जाना चाहिये.

उन्होंने मेरी तरफ़ देख कर कहा- आप भी मेरे जैसा आनन्द उठाओ … बहुत मज़ा आएगा. उसने हम दोनों को एक गोली दी.

कुछ देर बाद गोली ने असर दिखाया और पापा मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुराने लगे. मैं भी मुस्कुरा दी. फिर मेरे पापा ने मुझे किस किया और अपने और मेरे कपड़े निकाले. हम सीट पर अच्छी तरह से नहीं कर पा रहे थे तो उन दोनों ने हमें नीचे बैठा दिया.

पापा ने मुझे चोदने बैठ गए और मैं भी सेक्स करना चाहती थी, इसलिये मैं पापा को कामुक इशारा करने लगी. मेरा मन कर रहा था कि फिर से एक बार इस वासना के तालाब में पापा के लंड के साथ डुबकी लगा लूँ. मेरे मन की झिझक को उन दोनों विदेशी बाप बेटी ने दूर कर दी थी.

इतने में सामने बैठा वो विदेशी आदमी पापा से बोला- क्या हुआ … ओल्डमैन … इतने में ही थक गए? मैं तो 3 बार चुदाई करने के बाद ही शांत बैठ पाता हूँ.

ऐसा कहकर उसकी लड़की अपने पापा के पास गई और अपने पापा का लंड मसलने लगी और अपने मुँह में अपने पापा का लंड लेने लगी. मैं भी सेक्स की भूख से उसे लंड चूसते हुए देखने लगी. तभी मेरे सामने उस आदमी ने अपने कपड़े निकले और मुझे खींच कर चोदना चालू किया. मैंने भी उसके लंड के साथ चुदना मंजूर कर लिया. मेरे पापा मुझे उसके साथ सेक्स करते हुए देखने लगे.

मेरे मुँह से ‘ऊऊऊह … आआअह्ह … ऊऊह..’ की आवाज निकलने लगी और दो शॉट लगने के बाद वो अपने लड़की को पेलने लगा. बाद में वो मेरे पापा से बोला- क्या हुआ … मज़ा आया ना? पापा बोले- हां. वो बोला- तुमने पानी नहीं डाला अन्दर. पापा बोले- तू पागल है, वो मेरी बेटी है. वो बोला- तो क्या हुआ, ये भी तो मेरी बेटी ही है … और अब ये मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है … और इससे जो बड़ी वाली है, उसकी भी शादी हो गई है, लेकिन वो अपने पति से नहीं, अपने पापा से बच्चा चाहती है. इसलिए मैंने उसे भी चोदा है और आज वो मेरे एक बच्चे की माँ है. इसको कहते हैं खुल्लम खुल्ला सेक्स.

मेरे पापा बस अपना लंड सहलाते हुए उसकी बातों को सुन रहे थे.

वो बोला- हमारे घर में मैं मेरी बीवी, दो बेटी और उसका पति हर संडे को हम सब मिलकर ग्रुप सेक्स एन्जॉय करते हैं. मेरी बीवी अस्पताल में है, वो मेरे बेटी के पति के बच्चे की माँ बनने वाली है. मेरी ये बेटी शादी नहीं करना चाहती है. ये बोलती है, अगर शादी के बाद सेक्स ही करना है, तो घर में लंड मौजूद हैं ना. पापा हैं, जीजा जी हैं … दो दो लंड मौजूद हैं, ये टेस्टेड लंड हैं. इसलिए वो शादी के बिना ही माँ बनना चाहती है. यह सुनकर मैं और पापा दंग रह गए.

कुछ देर बाद हम दोनों का स्टेशन आ गया था. हम दोनों ट्रेन से उतर कर अपने चाचा के घर आ गए. चाचा को दो लड़कियां थीं. चाचा की बीवी गुजर गई थीं. उनकी एक लड़की छोटी थी और दूसरी 20 साल की थी.

मेरे पापा ने जो कुछ ट्रेन में हुआ और सुना, वो सब चाचा को बताया. पापा चाचा से बोले- मैं अब सेक्स के बारे में इस बात से सहमत हूँ. चाचा ने मेरी तरफ़ देखा. यह मेरे पापा ने भी देखा तो वो बोले आज हम सब भी ग्रुप सेक्स एन्जॉय करेंगे.

खाना खाने के बाद हम सब गार्डन में बैठे थे. चाचा ने सिगरेट जलाई, तो मेरे पापा ने भी एक सिगरेट सुलगा ली. चाचा लंड पर हाथ फेरते हुए बोले- मैं ये सब अपनी लड़की को कैसे समझाऊं. तब तो मैं जाकर उससे सेक्स कर सकूँ?

मैंने कहा- मुझे उसको समझाने का मौका दो, मैं उसे देखती हूँ. मैंने उससे जाकर ट्रेन वाली सब बात कुछ इस तरह से बताई कि वो भी चुदाई के लिए राजी हो गई.

तभी चाचा और पापा उधर आ गए और मैंने उनको कह दिया कि हम दोनों आपसे सेक्स करने को राजी हैं.

बस फिर क्या था. महफ़िल जम गई पापा और चाचा ने दारू की बोतल खोली और हम सबने दो दो पैग खींचे. मैंने सबसे पहले डांस करना शुरू किया. मेरी कजिन ने भी मेरा साथ देना शुरू किया. मैंने धीरे धीरे अपने कपड़े उतार दिए और सिर्फ ब्रा पेंटी में आ कर अपने पापा और चाचा से लिपट चिपट कर डांस करना चालू किया. शराब ने हम सभी को मस्त कर दिया था. पापा और चाचा ने मिलकर हम दोनों मेरी और कजिन की चुदाई की.

पहले चाचा ने मेरे साथ सेक्स किया. उनका 3 साल पुराना जितना पानी इकठ्ठा हो गया था, उन्होंने सब मेरी चूत में निकाल दिया. उधर मेरे पापा ने अपनी भतीजी की चूत में अपना रस निकाल दिया. वो भी साली चुदाई की पुरानी खिलाड़िन निकली. वो अपने कई आशिकों से चुद चुकी थी इसीलिए उसको चूत में लंड की जरूरत महसूस हो रही थी.

इस इवेंट से ये हुआ कि हम दोनों लड़कियों को चूत के लिए लंड लेने की आजादी हो गई. अब हम किसी भी लंड से कभी भी और कहीं भी चुदाई का मजा ले सकते थे. हमको कोई रोकने वाला नहीं था.

कुछ दिनों बाद मैंने कुछ गलत फील किया, तो मैं डॉक्टर को चैक कराने गई. डॉक्टर बोली- कि बधाई हो आप माँ बनने वाली हैं. यह सुनकर मेरे होश ही उड़ गए. मैंने डॉक्टर से कहकर मेरा गर्भपात करवा दिया.

इलाज होने के बद कुछ महीनों तक मैं चाचा के पास रहने चली गई. इस दौरान मैंने दो महीने तक सेक्स नहीं किया था, इसलिए मेरे पूरे बदन में सेक्स चढ़ने लगा था.

एक दिन मैं दोपहर को उठी, तो देखा चाचा कमरे से बाहर गए हैं और बाकी के सब लोग अपने काम से बाहर गए थे. तभी मेरी नजर हमारे चाचा के नौकर पर गई. उसकी उम्र 42 साल की थी. मैंने उसको चाय लाने को कहा और मैं अपने रूम में चली गई. मैंने रूम का दरवाजा खुला ही रखा और अपने सारे कपड़े उतार कर अपने जिस्म में तेल लगाने लगी.

पांच मिनट बाद नौकर रामू मेरे रूम में चाय लेकर आया. उसने मुझे नंगी देखा तो वो सॉरी बोलकर बाहर जाने लगा. मैं बोली- नहीं रामू प्लीज़ कोई बात नहीं है … मैं तो रोज ही अपने बदन में ऐसे तेल लगाती हूँ. आज तुम हो तो मेरे जिस्म में ठीक से तेल लग जाएगा.

वो रुक गया और मैं वैसे ही नंगी उसके पास चली गई. वो झिझक रहा था तो मैंने उसकी धोती निकाली और उसका 2 इंच के पाइप जैसा मोटा और लम्बा देसी लंड देख कर मस्त हो गई. मैं उसके करीब घुटनों पर बैठ गई और उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

रामू भी काफी दिनों से सेक्स का भूखा था. उसने मेरी चूत में अपना लंड पेल दिया और मेरी चूत की खुजली को बड़े मस्त तरीके से शांत किया. उसने मुझे चोदते समय बताया कि वो मेरी कजिन मेरे चचा की बेटी को भी चोदता है.

इस तरह ये मेरा इन कुछ महीनों में सेक्स का गजब तजुर्बा था. पहले भैया ने मुझे तालाब पर चोदा. फिर पापा और चाचा ने मुझे चोदा. इसके बाद घरेलू नौकर रामू ने भी मेरी चूत का बाजा बजाया. अब शादी के बाद पति और देवर के साथ मेरी चुदाई का खेल जारी है. पति महोदय विदेश में हैं और देवर जी मेरी चूत का भोसड़ा बना रहे हैं.

फिलहाल आप मुझे मेल करके बताइये कि आपको मेरे परम आनन्द, परम सुख पाने की मेरी यह पहली कहानी कैसी लगी. प्लीज़ आप मुझे ईमेल करें, पर एक बात है. मुझे अंग्रेजी अच्छी नहीं आती है, इसलिए प्लीज़ हिंदी या मराठी में ही लिखें, तो आपकी बात मुझ तक पहुंचने आसानी होगी. आपका प्यार और आशीर्वाद मुझे आगे और कहानियां लिखने को प्रोत्साहित करेगा. मुझे आपके ईमेल का इंतज़ार रहेगा. तो यह थी मेरी सहेली की चोदन स्टोरी! ओके बाय आपकी अपनी प्यारी प्रिया चौहान [email protected]

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