खूबसूरत पड़ोसन और उसकी बहू की चुदाई-1

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अपने नये फ्लैट में शिफ्ट हुए हमें तीन महीने ही हुए थे कि हमारे सामने वाले फ्लैट में भी एक परिवार रहने आ गया. हफ्ते दस दिन में मेरी पत्नी और नये पड़ोसियों के सम्बन्ध बन गये.

एक दिन मेरी पत्नी ने बताया कि तीन लोगों का परिवार है, भाभी, उनका बेटा और बहू. मेरी पत्नी मुझे बताने लगी- भाभी बोलती बहुत हैं, अभी दस दिन हुए हैं और अपना पूरा इतिहास बता चुकी हैं कि मेरा नाम भूपिन्दर कौर है, वैसे सब मुझे बेबी कहते हैं. मेरी उम्र 45 साल है. 10 साल पहले हमारी कार का एक्सीडेंट हो गया था जिसमें मेरे पति और छोटे बेटे का निधन हो गया था. बेटे का नाम हैप्पी है, फॉर्मा कम्पनी में काम करता है, कमाता अच्छा है लेकिन टूरिंग जॉब है, शादी को 3 साल हो गये हैं, अभी कोई बच्चा नहीं है. मैंने कहा- तुम अपने काम से काम रखो. मतलब की बात सुनो, बाकी एक कान से सुनो, दूसरे से निकाल दो.

दो तीन दिन बीते तो मेरी पत्नी ने बताया- बेबी भाभी तो बहुत बेशर्म हैं, कैसी कैसी बातें करती हैं. मैंने पूछा- क्या हो गया? “अरे, बहुत गंदी बात करती हैं, वो भी खुले शब्दों में!” “ऐसा क्या कह दिया?” “कह रही थीं, पति के इन्श्योरेंस का इतना पैसा मिला कि पैसे की कोई तंगी नहीं आई और अब तो हैप्पी भी अच्छा खासा कमाता है. बस एक ही कमी है, चुदवाने का बड़ा दिल करता है.” “अईं … ऐसा कह रही थीं?” “हां बिल्कुल ऐसा … साफ साफ!” “चलो कोई बात नहीं, पड़ोसी हैं, सुन डालो.”

पत्नी को कह दिया कि ‘सुन डालो’ लेकिन मुझे अब नींद नहीं आ रही थी, मैं देखना चाहता था कि मोहतरमा हैं कौन? मैंने यदा-कदा आते जाते उस फ्लैट पर नजर रखनी शुरू की. जहाँ चाह वहाँ राह … तीसरे दिन ही वो महिला बॉलकनी में तौलिया फैलाती दिख गई. 5 फुट 6 इंच कद, भारी बदन, गोरा चिट्टा रंग, अस्सी पच्चासी किलो वजन. दो शब्दों में कहूँ तो स्मृति ईरानी की डुप्लीकेट थीं. मेरा तो दिमाग खराब हो गया, जल्दी से जल्दी चोदना मेरा मकसद हो गया.

मैंने अपनी पत्नी को आगे करके उस परिवार से आत्मीय सम्बन्ध बनाने शुरू किये. दिन में एक दो बार बेबी हमारे घर जरुर आती और घंटा, दो घंटा बैठती. मेरी भी कई बार मुलाकात हुई. मेरी पत्नी रोज रात को दिन भर की बातें बताती. मेरे इरादे दिनबदिन पुख्ता होते जा रहे थे.

मुझे अच्छे से याद है कि वो इतवार का दिन था जब सुबह सुबह मेरे साले का फोन आया- सीमा (साले की पत्नी) को नर्सिंग होम छोड़ दिया है, दीदी (मेरी पत्नी कामिनी) को लेने आ रहा हूँ. दरअसल सीमा का बच्चा होने वाला था.

आठ बजे के लगभग कामिनी अपने भाई के साथ चली गई और मैं वापस सो गया.

लगभग 11 बजे कॉलबेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तो मेरी जानेमन, गुले गुलजार बेबी खड़ी थी. उसने गाउन पहन रखा था. उसने मुस्कुराते हुए मुझे गुड मॉर्निंग कहा और अन्दर चली आई. इधर उधर देखने के बाद किचन की तरफ गई और वापस आ गई. मैं तब तक दरवाजा बंद कर चुका था.

बेबी ने मुझसे पूछा- कामिनी नहीं दिख रही, कहीं गई है क्या? मैंने उसे सब कुछ बताया और पूछा- कोई काम था क्या? वो कहने लगी- कुछ पूछना था. मैं बाद में आ जाऊँगी. ऐसा कहकर दरवाजे की ओर चलने को हुई तो मैंने कहा- मैंने भी आपसे कुछ पूछना है. “पूछिये साहब … पूछिये!”

“इधर आइये!” कहकर मैं बेडरूम में आ गया. “पूछिये, क्या पूछना चाहते हैं?” अपना मुंह बेबी के कान के पास ले जाकर मैंने धीरे से पूछा- चुदवाने का बड़ा दिल करता है? “ऊई माँ … कामिनी ने आपको सब बता दिया? मैं तो मजाक कर रही थी.” “कोई बात नहीं, हो सकता है आप मजाक ही कर रही हों. वैसे मैं सीरियसली पूछ रहा हूँ, मुझसे चुदवाओगी?” “नहीं बाबा नहीं!”

मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रखते हुए पूछा- बिल्कुल नहीं? “अब मेरा इम्तहान न लो, राजा.” यह कहकर उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया.

हम दोनों चिपक गये और मैंने उसका गाउन और नीचे पहना पेटीकोट कमर तक उठा दिया और उसके चूतड़ सहलाने लगा जबकि वो मेरे लण्ड से खेल रही थी.

मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और गाउन उतार दिया. अब वो ब्रा और पैन्टी में थी. मैंने अपनी टी शर्ट उतारी और उसकी ब्रा निकाल दी. बड़े साइज के दो सफेद कबूतर आजाद हो गये. बेबी को बेड पर लिटाकर मैंने उसके निप्पल चूसने शुरू कर दिये और चूत सहलाने लगा. कुछ देर बाद मैंने उसकी पैन्टी में हाथ डालकर चूत पर उंगलियां चलानी शुरू कर दीं तो उसने अपने चूतड़ उचकाकर पैन्टी नीचे खिसका दी जिसको अपने पैर से फंसाकर मैंने बेबी के शरीर से अलग कर दिया. बेबी सफेद हाथी का बच्चा लग रही थी.

मैंने निप्पल चूसते चूसते उसकी चूत में उंगली चलानी शुरू कर दी. बेबी पर मस्ती सवार हो रही थी. अब उसने अपना हाथ मेरे लोअर में डालकर मेरा लण्ड पकड़ लिया और बोली- डाल दो राजा. मैंने कहा- पहले गीला तो कर दो. सुनते ही बेबी उठी और मेरे लण्ड को चाट कर, चूस कर गीला कर दिया और लेट गई.

उसने लेट कर अपने चूतड़ उठाये और चूतड़ के नीचे तकिया रख लिया. दोनों टांगें फैला दीं और बोली- अब जल्दी आओ राजा. मैं उसकी टांगों के बीच आया, उसकी चूत के खुले हुए लबों के बीच लण्ड का सुपारा रखते हुए कहा- ये लो बेबी. और लण्ड उसकी गुफा में पेल दिया.

“रा…जा … रा…जा …” कहकर वो अपने चूतड़ चक्की की तरह चलाने लगी तो मैं भी फॉर्म में आ गया. मैंने तमाम लड़कियों औरतों को चोदा था लेकिन हाथी का बच्चा पहली बार चोद रहा था. जब एक बार रफ्तार पकड़ी तो पिचकारी छूटने पर ही रुका.

हम लोग अलग हुए, कपड़े पहने और चलते समय कह गई- एक घंटे में आती हूँ, तब मस्ती करेंगे. बेबी के जाने के बाद मैंने स्नान किया, ऑमलेट खाया और लेट गया.

थोड़ी देर में घंटी बजी, मैंने दरवाजा खोला तो बेबी थी. वो अन्दर आ गई और बोली- मैं अपनी बहू को यह कहकर निकली हूँ कि मैं नारायण नगर जा रही हूँ. मैं एक लिफ्ट से नीचे गई और दूसरी से ऊपर वापस आ गई.

बेबी ने अपनी साड़ी खोलकर सोफे पर रख दी, कहने लगी- कॉटन साड़ी है, इस पर सिलवटें पड़ जाती हैं. मैंने उसका पेटीकोट, ब्लाउज और ब्रा खोल दिया. पैन्टी उतारने लगा तो उसने हाथ पकड़ लिया और बोली- अभी नहीं राजा.

बेबी ने मेरी टी शर्ट उतारी, फिर लोअर उतार कर मुझे नंगा कर दिया और पास रखी कुर्सी पर बैठकर मेरा लण्ड चूसने लगी. जब लण्ड फूलकर मूसल जैसा हो गया तो उसने अपनी पैन्टी उतार दी. वो अपनी मक्खन जैसी चूत शेव करके आई थी.

अब मैं कुर्सी पर बैठ गया और बेबी खड़ी हो गई. अपनी जीभ को नुकीला बनाकर जब उसकी चूत में डाला तो उचकने लगी. उसने मुझे उठने को कहा और ‘इधर आओ’ कह कर रसोई में घुस गई. मैंने हैरानी से पूछा- यहां क्यों आई हो? तो बोली- मुझे किचन में कुतिया बनाकर चोदो.

उसने अपने दोनों हाथ किचन टॉप रखे और टांगें फैलाकर कुतिया बन गई. मैंने उसके पीछे खड़े होकर लण्ड का सुपारा उसकी गुफा के द्वार पर रखा और पेल दिया. लण्ड पेलकर मैं तो सीधा खड़ा रहा लेकिन उसने आगे पीछे होना शुरू कर दिया. जब आगे जाती तो आधे से ज्यादा लण्ड बाहर निकल आता लेकिन पीछे की और धक्का मारती तो लण्ड का सुपारा उसकी नाभि से टकराता.

उसके धक्कों में कोई रफ्तार नहीं थी इसलिये मुझे मजा नहीं आ रहा था. मैंने उसकी कमर (कमर क्या कमरा था) पकड़ी और धक्के मारने शुरू किये. धीरे धीरे स्पीड बढ़ने लगी तो उम्म्ह… अहह… हय… याह… करने लगी. वो पूछने लगी- कितना टाइम लगेगा? मैंने कहा- अभी कहाँ! तो बोली- फिर बेडरूम में चलो.

हम लोग बेडरूम आ गये तो मैंने पूछा- अब हथिनी बनकर चुदवाओगी या मोरनी बनकर? “मैं थक गई हूँ, राजा. मुझे लिटा दो और अपना काम पूरा कर लो.” “मेरा काम तो तुम लेटे लेटे हाथ और मुंह से भी कर सकती हो.” वो कहने लगी- जैसे तुम कहो.

मैंने अपना लण्ड उसके मुंह में दे दिया तो मजे से चूसने लगी, कुछ देर में बेबी थक गई तो बोली- कितनी देर लगाओगे? “अभी कहाँ?” “मेरी जान लेनी है क्या?” “नहीं, गांड लेनी है. उल्टी हो जाओ.” “नहीं राजा, गांड में न डालो.” “डलवा लो, रानी.” “नहीं राजा, नहीं. प्लीज.” “अच्छा उल्टी होकर हथिनी बन जाओ, हथिनी बनकर चुदवा लो.” “राजा, गांड में नहीं डालना प्लीज.” “नहीं डालूंगा, प्रामिस.”

वो पलटकर हथिनी बन गई. उसके गोरे गोरे मोटे मोटे चूतड़ देखकर लण्ड और अकड़ गया. बेबी के पीछे घुटनों के बल खड़े होकर अपने लण्ड का सुपारा उसकी चूत पर रखकर धकेला तो चूत में गया नहीं. इस आसन में चूत बहुत टाइट हो गई थी. मैंने अपनी हथेली पर थूका और उसे सुपारे पर मल दिया. अबकी धक्का मारा तो कोकाकोला का ढक्कन खुलने जैसे आवाज आई और सुपारा उसकी चूत के अन्दर चला गया. कमर पकड़कर धकेलने से पूरा लण्ड चूत में चला गया.

मैंने अपने दोनों हाथ अपनी कमर पर रख लिये और धकियाना शुरु किया. हर धक्के के साथ लण्ड फूलता जा रहा था और चूत को टाइट करता जा रहा था. अब ज्यादा देर रुकने की स्थिति नहीं थी. मैंने बेबी की कमर पकड़ी और धकाधक, धकाधक, धकाधक ठोकने लगा. जैसे ही मेरी पिचकारी छूटी मैंने अपने दोनों पैर हवा में उठा लिये और अपने पूरे शरीर का वजन बेबी पर डालकर धकाधक चोदने लगा. मैं बेबी की चूत चोदता रहा, चोदता रहा, वीर्य की आखिरी बूंद निकलने तक चोदा. फिर शिथिल होकर दोनों लोग लेट गये.

बेबी ने कहा- राजा मैं दस साल से भूखी हूँ. सच कहूँ तो जब से जवान हुई हूँ तब से भूखी हूँ. मेरा पति तुम्हारे जैसा शेर नहीं था. तुम मुझे चोद चोदकर जन्नत का दीदार कराते रहो.

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