रिश्तों में चुदाई स्टोरी-5

इस पोर्न हिंदी स्टोरी में पढ़े कि जब पति ने अपनी पत्नी को अपने पिता के साथ नंगी देखा तो क्या किया? पत्नी भी जानबूझ कर अपने पति को चिढ़ाती हुई चली गयी.

इस पोर्न हिंदी स्टोरी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि ससुर की योजना के मुताबिक बहू अपने ससुर के साथ अपने पति समीर के आने से पहले ही अपने बेडरूम में नंगी हो गई थी और जब उन दोनों के नंगे जिस्म एक दूसरे से टकराए तो ससुर और बहू दोनों ही गर्म हो गये और नीलम की चूत ने महेश के लंड से टकराते ही अपना पानी फेंक दिया. लेकिन तभी दरवाजे पर महेश आ गया और उन दोनों को इस तरह से नंगे पड़े देख कर उसका मुंह खुला का खुला रह गया.

अब आगे की पोर्न हिंदी स्टोरी का मजा लें:

नीलम दरवाज़े की आवाज़ को सुनकर अपने ससुर से अलग हो गई और जल्दी से अपनी साड़ी को उठाकर अपने जिस्म को आगे से ढक लिया। “बापू जी आप भी न … दरवाज़ा तो बंद कर लेते! आप को पता है जब हम दोनों साथ में होते हैं तो टाइम कितनी जल्दी आगे बढ़ता है.” नीलम ने एक क़ातिल मुस्कान के साथ समीर को देखते हुए कहा। “सॉरी बेटी, मैं अगली बार ख़याल रखूँगा.” महेश ने भी अपनी धोती उठाकर पहनते हुए कहा और चुपचाप वहां से निकल गया।

“नीलम तुम बापू के साथ नंगी? नहीं! मुझे अब भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा है.” समीर ने अपने पिता के जाने के बाद बेड पर अपना माथा पकड़ते हुए कहा। “डार्लिंग, ज्यादा मत सोचो, वरना सर में दर्द हो जायेगा। सच्ची में मुझे तो आज पता चला है कि चुदाई का असल मजा क्या होता है और बापू के साथ तो मुझे इतना मजा आया कि पूछो मत। मैं तो अपने ससुर की दीवानी हो गई। असली मर्द है वह. कितना लम्बा और मोटा था उनका ओफ्फ … मेरी तो जान ही निकल गयी उनके साथ करते हुये!” नीलम अपने पति को जलाने के लिए जाने क्या क्या बोल गयी. उसे खुद हैरानी हो रही थी कि वह अपने पति से इतना गन्दा कैसे बोल गयी।

“नीलम तुम इतना गिर सकती हो, मैं सोच भी नहीं सकता!” समीर ने गुस्से से अपनी पत्नी को देखते हुए कहा। “अभी तो शुरुआत है मेरे पति देव. मैं तुम्हें बताऊँगी कि जब औरत अपने पर आती है तो वह क्या कर सकती है!” नीलम ने मुस्कराते हुए कहा और अपने कपड़ों को लेकर बाथरूम में चली गयी।

“ख़ाना डार्लिंग!” नीलम कुछ देर में ही बाथरूम से निकलकर किचन से खाना ले आई और उसे अपने पति के सामने रखते हुए कहा। “क्यों आज तुम नहीं खाओगी?” समीर ने नीलम की तरफ देखते हुए कहा। “डार्लिंग, मैंने अपनी हर भूख को तुम्हारे बिना ही मिटाने का बंदोबस्त कर लिया है.

” नीलम ने अपने पति को देखते हुए मुस्कराकर कहा।

समीर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। कहाँ कल उसकी पत्नी उसके पीछे पीछे भागती थी. आज वह उसके साथ खाना खाने के लिए भी तैयार नहीं थी। समीर ने अपने हाथों को साफ़ करके जैसे तैसे खाना खाया और सोचते हुए बेड पर लेट गया, नीलम खाने के बर्तनों को वापस रसोई में छोड़कर खुद बाहर जाकर टीवी ऑन करके देखने लगी।

नीलम आज बुहत खुश थी, मगर वह अपने ऊपर शर्मिंदा भी थी कि वह अपने ऊपर कण्ट्रोल न रख सकी और अपने ससुर के साथ ही वह इतना आगे बढ़ गयी। नीलम ने दिल ही दिल में सोच लिया था कि वह अब अपने ससुर से अपनी गलती की माफ़ी माँगेगी। “क्या हो रहा है बेटी?” अचानक महेश अपने कमरे से निकलकर अपनी बहू के पास खड़ा होकर बोले।

“पिता जी थैंक्स, आपकी वजह से आज मुझे अपने पति को सजा देने में मदद मिली.” नीलम ने अपने ससुर को देखते ही सोफ़े से उठकर उनके गले से लगते हुए कहा। “बेटी इसमें शुक्रिया की क्या बात है, यह तो मेरा फ़र्ज़ था.” महेश ने मौके का फ़ायदा उठाते हुए अपनी बहू को जोर से अपनी बांहों में दबाते हुए कहा। नीलम को अपने ससुर से गले लगते ही अहसास हो गया था कि उसने गलती कर दी है क्योंकि महेश से गले लगते ही उसका लंड जो उस वक्त भी बिल्कुल तना हुआ था वह आगे से नीलम की चूत पर टक्कर मारने लगा।

“पिता जी मुझे माफ़ कर दें.” नीलम ने जल्दी से अपने ससुर से अलग होते हुए कहा। “क्या हुआ बेटी अब माफ़ी किस बात के लिए माँग रही हो?” महेश ने हैरान होते हुए कहा। “वो … पिता जी हमें इतना आगे नहीं बढ़ना चाहिए था.” नीलम ने शर्म से अपना मुँह दूसरी तरफ कर रखा था। “बेटी इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है, बस हम दोनों इंसान हैं और गलती तो इन्सानों से ही होती है. मगर मैं उस बात के लिए तुम से बिल्कुल ख़फ़ा नहीं हूँ। हकीकत तो यह है कि उस वक्त मैं भी बहक गया था तुम्हारे साथ!” महेश ने अपनी बहू के पीछे जाकर खड़ा होते हुए कहा।

“बापू, मगर यह सब ठीक नहीं है, हमें अपने ऊपर कण्ट्रोल रखना चाहिये.” नीलम ने चिंता जताते हुए कहा। “बेटी तुम हो ही इतनी सुंदर कि तुम्हें देखकर कोई भी कण्ट्रोल खो बैठेगा.” महेश ने थोड़ा आगे होते हुए अपनी बहू को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया।

“पिता जी यह आप क्या कर रहे हैं?” नीलम ने अपने ससुर के खड़े लंड को अपने चूतड़ों पर साड़ी के ऊपर से ही महसूस करके ज़ोर से साँसें लेते हुए कहा। “बहू सच कह रहा हूँ, मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ.
” महेश ने अपनी बांहों को अपनी बहू के जिस्म पर कसते हुए कहा। “पिता जी छोड़िये मुझे, यह सब ठीक नहीं है.” नीलम ने अपने आप को अपने ससुर से छुड़ाकर सोफ़े पर जाकर बैठते हुए कहा।

नीलम की साँसें ज़ोर से चल रही थी. उसे खुद पर हैरानी हो रही थी कि वह अपने ससुर के क़रीब आते ही इतनी गर्म क्यों हो जाती है कि उसे अपने ससुर की हर हरकत मजा देने लगती है।

“बहू तुम बस मेरी एक बात का जवाब दो, जब मैं तुम्हें छूता हूँ तो तुम्हें कैसा महसूस होता है?” महेश ने भी अपनी बहू के पास जाकर बैठते हुए कहा। “पिता जी, यह कैसा सवाल है?” नीलम ने शरमाते हुए कहा। “बेटी, जो मैं पूछ रहा हूँ उसका जवाब दो.” महेश ने अपनी बहू का हाथ पकड़ते हुए कहा।

अपने ससुर का हाथ लगते ही नीलम के पूरे शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गयी। “बापू जी, जब आप मुझे छूते हैं तो मुझे पूरे शरीर में कुछ होने लगता है.” नीलम ने शर्म से अपना सर नीचे करते हुए कहा।

“बेटी आखिरी सवाल, जब मैं तुम्हारे क़रीब आता हूँ तो तुम्हारा मन मुझसे दूर भागने की सोचता है या और क़रीब आने की?” नीलम की बात सुनकर महेश ने उसके हाथ को सहलाते हुए पूछा। नीलम का पूरा चेहरा शर्म से लाल हो गया था वह कुछ बोले बिना ही अपने सर झुकाये बैठी थी। “बताओ न बेटी… मैं वादा करता हूँ इसके बाद मैं तुमसे कोई सवाल नहीं करूंगा” महेश ने नीलम की तरफ देखते हुए कहा।

“पिता जी सच तो यह है कि आपके क़रीब आने से मेरा अंग अंग झूम उठता है और न चाहते हुए भी मेरा दिल आपके क़रीब आने को कहता है। मगर बाद में मुझे यह सब गलत महसूस होता है.” नीलम ने अपने ससुर को जवाब देते हुए कहा।

“बेटी जब तुम्हें मेरा छूना अच्छा लगता है, मेरे क़रीब आने को दिल करता है तो फिर तुम्हें किस चीज़ की चिंता है. जब तुम्हारा पति ही तुमसे बेवफ़ाई कर रहा है तो फिर तुम क्यों घुट घुट कर जी रही हो?” महेश ने नीलम को समझाते हुए कहा। “पिता जी शायद आप सच कह रहे हैं, मगर मेरा मन आपके साथ सम्बन्ध बनाने को पाप मानता है.” नीलम ने अपने ससुर से कहा।

“ठीक है बेटी मेरा तुम से वादा है जब तक तुम अपने मुँह से नहीं कहोगी मैं तुम्हारे साथ आगे नहीं बढूँगा मगर जितना हम एक दूसरे के क़रीब आ गये हैं उतने का तो मजा ले सकते हैं.” महेश ने आखिरी पत्ता फेंकते हुए कहा। “मैं कुछ समझी नहीं पिता जी!” नीलम ने अपना चेहरा ऊपर करते हुए कहा। “बेटी मेरे कहने का मक़सद है कि हम भले ही एक दूसरे के साथ सारी हदें पार न करें मगर थोड़ा बहुत जो हम एक दूसरे से जुड़ चुके हैं उसे तो हमें ख़त्म नहीं करना चाहिये.
” महेश ने अपनी बहू की आँखों में निहारते हुए कहा।

नीलम समझ गयी कि उसके ससुर क्या कहना चाहते हैं इसीलिए उसने शर्म से अपना कन्धा नीचे कर दिया।

“बेटी इसका मतलब अब तुम मुझसे कोई रिश्ता बाकी रखना नहीं चाहती?” महेश ने नाटक करके वहां से उठते हुए कहा। “पिता जी आपके सिवा मेरा कौन है यहां?” नीलम ने अपने ससुर के हाथ को पकड़ते हुए उनको रोका।

“ओह्ह बेटी, मैं तो समझा था कि तुमने मुझसे दूर होने का फैसला कर लिया है.” महेश ने ख़ुशी से अपनी बहू के साथ सोफ़े पर बैठते हुए कहा और अपनी बहू का हाथ पकड़कर उसे अपने ऊपर गिराते हुए खुद भी सोफ़े पर सीधा होकर लेट गया।

महेश के ऐसा करने से नीलम सीधा अपने ससुर के ऊपर गिर गयी और उसकी चूचियां सीधे उसके ससुर के सीने में दब गयीं। नीलम का मुँह अपने ससुर के मुँह के बिल्कुल क़रीब हो गया और दोनों की साँसें एक दूसरे से टकराने लगी, नीलम की साँसें ज़ोर से चल रही थी। महेश ने थोड़ी देर तक अपनी बहू के गुलाबी होंठों को देखने के बाद अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।

अपने ससुर के होंठों से अपने होंठ मिलते ही नीलम पर अजीब किस्म का नशा छाने लगा और वह अपने ससुर के साथ लम्बी फ्रेंच किस में खोती चली गयी। कुछ देर बाद जब दोनों की साँसें फूलने लगीं तो दोनों ने अपने होंठ एक दूसरे से अलग किये, नीलम फिर से बुहत ज़ोर से हाँफते हुए साँस लेने लगी।

“आहह बेटी … क्या मीठे होंठ हैं तुम्हारे!” महेश ने अपने होंठों पर अपनी जीभ फिराते हुए कहा। “पिता जी, चलो मैं आप से बात नहीं करती.” नीलम शर्म से अपने ससुर के सीने पर मुक्के मारकर वहां से उठते हुए बोली।

“बेटी, तुम तो नाराज़ हो गई, क्या करूँ तुम्हारी हर चीज़ मुझे इतनी सुंदर लगती है कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाता!” महेश ने अपनी बहू को बाज़ू से पकड़ते हुए कहा।

“छोड़ो पिता जी, इस वक्त यह सब ठीक नहीं है, हम रात को मिलेंगे.” नीलम ने अपने ससुर को समझाते हुए कहा। “बेटी यह देखो तुम्हारे साथ थोड़ी देर रहने पर भी यह कैसे उठ जाता है.” महेश ने सोफ़े से उठकर अपने खड़े लंड को धोती के ऊपर से ही पकड़कर अपनी बहू को दिखाते हुए कहा।

“पिता जी आप बड़े बेशर्म हैं छोड़िये मुझे!” अपने ससुर के खड़े लंड को देखकर नीलम का पूरा शरीर सिहर उठा और उसने शर्म से अपना मुँह दूसरी तरफ करते हुए कहा। “क्यों बेटी, तुम्हें यह अच्छा नहीं लगता?” महेश ने अपनी बहू के पीछे जाकर उसे अपनी दोनों बांहों में भरकर अपने लंड को उसके चूतड़ों से रगड़ते हुए कहा।

“आह्ह्ह्ह पिता जी छोड़िये ना!” नीलम ने अपने ससुर के लंड को अपने चूतड़ों पर लगते ही सिसककर कहा। नीलम को अपने ससुर का लंड अपने चूतड़ों पर इतना अच्छा लग रहा था कि वह उनसे दूर हटने की कोशिश भी नहीं कर रही थी।

महेश ने अपने दोनों हाथों को अपनी बहू की साड़ी में डालकर उसकी नंगी कमर को पकड़ लिया और उसे पकड़कर अपने लंड का दबाव देने लगा। “आह्ह्ह्ह पिता जी छोड़िये न… कोई आ जायेगा.
” नीलम ने फिर से सिसकते हुए कहा।

नीलम को अपने पूरे शरीर में एक अजीब किस्म के मज़े का अहसास हो रहा था, उसे खुद पता नहीं था कि उसके ससुर में क्या जादू है… जब भी वह उसके जिस्म को छूते हैं तो वह सब कुछ भूलकर उसका साथ देने लगती है।

महेश अब मज़े से अपने लंड को अपनी बहू के चूतड़ों में धक्के मार रहा था। ऐसा करते हुए महेश को जन्नत का मज़ा आ रहा था। इधर नीलम की चूत भी गीली हो चुकी थी. उसका पूरा शरीर कांप रहा था और उसने मज़े के सागर में डूबकर अपनी आँखें बंद कर ली थी।

अचानक महेश अपनी बेटी को दूर से आता देखकर अपनी बहू को छोड़कर सोफ़े पर बैठ गया। नीलम ने जैसे ही महसूस किया कि उसके पीछे कोई भी नहीं है वह होश में आई और अपनी आँखें खोलकर देखने लगी।

“क्या हुआ भाभी खड़े खड़े नींद आ गयी क्या आपको?” नीलम के सामने ज्योति खड़ी थी जो मुस्कराकर उसे टोक रही थी। “नहीं तो!” नीलम ने अपने आपको संभालते हुए कहा और वहां से अपने कमरे में चली गयी।

नीलम के जाते ही ज्योति अपने पिता के सामने सोफ़े पर जा बैठी। महेश चुपचाप सोफ़े पर बैठा हुआ था। उसे पता था कि ज्योति ने उसे नीलम के साथ चिपके हुए देख लिया है। “पिता जी इस वक्त आप यहाँ…? क्या बात है?” ज्योति ने शरारती मुस्कान के साथ अपने पिता को देखते हुए कहा। “वो बेटी बस ऐसे ही अपने कमरे में बोर हो रहा था तो यहाँ पर टीवी देखने आ गया.” महेश ने अपनी बेटी को जवाब देते हुए कहा ।

“ह्म्म्म पिता जी, फिर कैसा लगा प्रोग्राम?” ज्योति ने फिर से मुस्कराते हुए कहा। “मैं समझा नहीं बेटी?” महेश ने चौकते हुए कहा। “पिता जी जिस टीवी के प्रोग्राम को आप देख रहे थे वह कैसा लगा?” ज्योति ने इस बार अपने सोफ़े से उठकर अपने पिता के साथ बैठते हुए कहा। “अभी तो प्रोग्राम स्टार्ट ही नहीं हुआ है” महेश ने झेंपते हुए कहा।

“पिता जी, जब मैं आई तो उस वक्त तो देसी पोर्न प्रोग्राम चल रहा था.” ज्योति ने अपने पिता की टांग खींचने की कोशिश की जिसका मतलब अब महेश भी समझ गया था। “ह्म्म्म… तो तुम उस प्रोग्राम की बात कर रही हो… उसे तो तुमने बीच में आकर खराब कर दिया.” महेश ने इस बार अपनी बेटी को देखकर हिम्मत जताते हुए कहा। “हाँ वो तो है, मैं उसके लिए सॉरी कहती हूँ. मगर यह पोर्न हिंदी स्टोरी कब से चल रही है और कहाँ तक पहुंची है?” ज्योति ने अपने पिता के खुल जाने पर उनसे दूसरा सवाल करते हुए पूछा।

“अभी तो शुरू ही हुआ है और वह भी तुम्हारी मेहरबानी से …” महेश ने अपनी बेटी को गौर से देखते हुए कहा। ज्योति उस वक्त सलवार कमीज में थी। कमीज पुरानी होने की वजह से उसका गला बुहत बड़ा था जिसमें से ज्योति की गोरी गोरी चूचियां आधी नज़र आ रही थी।

“मेरी वजह से? पिता जी वह कैसे?” ज्योति ने अपने पिता को अपनी तरफ यूं देखता पाकर झेंपते हुए कहा। “अब बेटी इतनी भी भोली मत बनो, उस रात बहू ने तुम्हारा प्रोग्राम समीर के साथ लाइव देख लिया. तब से वह समीर से नफरत करने लगी है जिस का कुछ फ़ायदा मैं उठा रहा हूं.” महेश ने इस बार अपना हाथ अपनी बेटी की जाँघ पर उसके कपड़ों के ऊपर से ही रखते हुए कहा।

अपने पिता की बात सुनकर ज्योति का सिर शर्म से झुक गया और वह बगैर कुछ बोले चुप होकर बैठी रही। “क्या हुआ बेटी? बोलो न … तुमने तो अपने भाई के साथ ही प्रोग्राम सेट कर लिया?” महेश ने ज्योति की जाँघ पर अपने हाथ को फेरते हुए कहा। “पिता जी मुझसे गलती हो गई. इतने सालों से प्यासी थी और ऊपर से नीलम भाभी भैया को हाथ भी लगाने नहीं दे रही थी इसीलिए हम दोनों जवानी की हवस में अंधे हो गये.” ज्योति ने वैसे ही शर्म से अपना कन्धा नीचे किये हुए कहा।

पोर्न हिंदी स्टोरी अगले भाग में जारी रहेगी. अपने विचार नीचे दिये गये मेल आई-डी पर लिखें. [email protected]

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