मासी के संग चुदाई की वो रात

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नमस्ते दोस्तो, मैं आपका दोस्त आज फिर आपके लिए एक न्यू सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ, जो कि मेरी और मेरी सगी छोटी मासी के बीच की है. मेरी मासी का नाम आशा है और उनकी शादी हो चुकी है. आपको तो पता ही है कि मुझे शादीशुदा औरतें चोदना बहुत पसंद हैं. जिन्होंने मेरी पहली वाली सेक्स स्टोरी मोसी की वासना जगा कर चुदाई पढ़ी होगी, उन्हें मेरे बारे में सब पता होगा. फिर भी एक बार दुबारा लिख देता हूँ.

मैं अनिकेत … मेरी उम्र 21 साल की है और मेरा रंग सांवला है. मेरा लंड 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटे पाइप जितना मोटा है. आशा मासी का फिगर मैं क्या बताऊँ आपको … सच में मेरी मासी बहुत ही मस्त माल हैं. वो बहुत ही ज्यादा गोरी गुलाबी हैं. मासी ऐसी लगती हैं, जैसे कि मक्खन में एक उंगली सिंदूर की लगा दी हो.

मासी का फिगर करीब 36-30-38 का है. मासी को देख कर ही मुझे ऐसा लगने लगता है कि इनको अभी ही पकड़ कर चुम्मी ले लूं.

ये कहानी तब की है, जब मेरी मासी हमारे घर कुछ एक सप्ताह के लिए रहने आई थीं. तब वो अकेली ही आई थीं. वे अपने साथ अपने बच्चों को नहीं लाई थीं. उस वक्त मेरे घर पर मैं ही अकेला था. मेरी माँ और पिताजी दोनों दो दिन के लिए गांव गए थे. चूंकि मासी अचानक से बिना सूचना दिए आ गई थीं, तो माँ पिताजी को इस बात की कोई खबर ही नहीं थी.

मैं ही अकेला घर पर था, तभी वो आ गईं और मासी ने बेल बजा दी. मैंने जाकर देखा, तो मेरे सामने मेरे सपनों की रानी मेरी मासी खड़ी थीं. मैंने झट से दरवाजा खोला और उन्हें अन्दर ले लिया.

उस समय मासी ने काली रंग की साड़ी और काले रंग का ही ब्लाउज पहना हुआ था. मासी का ब्लाउज काफी गहरे गले और पीछे से छोटी सी एक इंच वाली पट्टी का ब्लाउज डाला था. उस वजह से उनकी पूरी पीठ खुली थी और मासी एकदम मस्त माल लग रही थीं.

उन्होंने अन्दर आने के बाद मुझे प्यार से गले लगाया, तो उनकी चूचियों के निप्पल मुझे अपने मर्दाना सीने में गड़ से गए. मुझे तो मानो बहुत ही मज़ा आ गया था. मैंने भी मौका नहीं गंवाया और अपने हाथों से उनकी पीठ को अपने सीने से जकड़ लिया.

मैं मासी की चूचियों की गर्माहट से अपने सीने को ठंडक दिला रहा था और उनकी लगभग नंगी पीठ पर हाथ फिरा रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था … मानो आज अपना सपना पूरा ही होकर रहेगा.

फिर वो मुझसे अलग होकर सोफे पर बैठ गईं. मैंने उन्हें पानी लाकर दिया. तब उन्होंने मुझसे मम्मी और पापा के बारे में पूछा. मैंने बताया कि वो गांव गए हैं. वो कुछ हैरान सी होते हुए बोलीं- तो अब? मैंने बोला- मैं हूँ ना. वो बोलीं- वो तो है रे … पर मेरे कुछ काम थे. मैं बोला- वो क्या कल तक आ जाएंगे … फिर आप अपने काम कर लेना.

उन्होंने उसी समय मेरी माँ को कॉल किया और बाद में मुझसे कहा- मुझे चेंज करना है. मैं उन्हें माँ के बेडरूम में ले गया और वहां उनको चेंज करने के लिए कहा. मैं उनको छोड़कर बाहर आ गया.

लेकिन मासी के हाथों से गड़बड़ी हुई और वो दरवाजा लॉक करना भूल गईं. मुझे ये बात नहीं मालूम थी कि दरवाजा खुला रह गया है.

मेरी मासी बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आ गई थीं … और कपड़े पहन रही थीं. तब वो मैक्सी पहन रही थीं, तो उस वजह से उन्होंने अपना पेटीकोट और ब्लाउज दोनों निकाले हुए थे और सिर्फ ब्रा औऱ पैंटी में खड़ी थीं.

मैं वो छिप कर देख कर लंड को सहला रहा था. जब उनका सब चेंज हो गया, तो मैं वहां से निकल कर हॉल में आकर बैठ गया.

मासी बाहर आ गईं, तो मैं एक पल के लिए तो ठगा सा ही रह गया. मैं उन्हें ताकता ही रह गया, क्योंकि वो इतनी ज्यादा हॉट लग रही थीं कि मस्त माल की सही परिभाषा दिख रही थीं.

वो आकर मेरे पास बैठ गईं और मुझसे बातें करने लगीं. हम दोनों बातें करते करते भूल गए कि रात काफी हो गई है. खाने का मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि खाना बाजार से लाना था.

मैंने उनसे कहा- चलो मासी, आज हम दोनों बाहर खाना खाने चलते हैं. मासी फट से राजी हो गईं और वो फिर से चेंज करने चली गईं. मैं भी चेंज होकर आ गया.

उन्होंने फिर से वही काली साड़ी पहन ली थी. मैंने बाइक निकाली और हम दोनों खाना खाने निकल गए.

वो मेरे पीछे मुझसे कुछ दूर होकर बैठी थीं. मैंने स्पीड ब्रेकर पर ब्रेक दबाना शुरू किया, तो वो मेरे साथ चिपक गईं और मुझे पकड़ कर बैठ गईं. अब मुझे उनकी गर्माहट महसूस हो रही थी.

हम दोनों ने खाना खाया और वापस निकल पड़े.

तभी अचानक से तेज बारिश आ गई. हम दोनों बहुत भीगने लगे. जब तक मैं गाड़ी रोकता, तब तक हम दोनों काफी भीग चुके थे.

मैंने गाड़ी एक शेड के नीचे रोक दी और वहां पर रुक कर बारिश रुकने का इंतजार करने लगे. इस वक्त मासी तो मानो एक अप्सरा लग रही थीं. वो पूरी तरह से भीग चुकी थीं और उनकी साड़ी उनके हॉट जिस्म से मानो चिपक सी गई थी. मैं तो बस उन्हें ही देख रहा था.

दस मिनट बाद बारिश रुक गई, तो मासी बोलीं- चलो बारिश रुक गई. हम दोनों घर आ गए.

मैं अपने कमरे में चला गया और वो उनके कमरे में चली गईं. कपड़े आदि बदल कर हम दोनों वापिस से आकर हॉल में बैठ गए. हमारी इधर उधर की गपशप शुरू हो गई. मासी ने सोने की कहा, तो हम दोनों सोने के लिए जाने लगे.

मासी बोलीं- अनि … मुझे अकेले में नींद नहीं आती. मैं बोला- फिर! तो मासी बोलीं- तुम मेरे साथ सो जाओ.

मेर तो मानो लॉटरी निकल पड़ी थी. मैं उन्हें ना कैसे कहता. आज मेरा सपना पूरा होने जा रहा था.

फिर मैंने उन्हें मेरे कमरे में आकर सोने का कहा. वो बिना किसी हील हुज्जत के मेरे कमरे आ गईं.

मैंने सब लाइट बंद कीं और सोने के लिए लेट गया. हम दोनों ने एक ही कम्बल लिया था और बाहर बारिश होने के कारण हमें ठंड भी लग रही थी … तो हम दोनों जरा चिपक कर लेटे थे.

कुछ देर बाद मासी सो गईं, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी … क्योंकि मुझे मेरे अन्दर का जानवर सोने नहीं दे रहा था. मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था, इसलिए मेरी हिम्मत नहीं हुई और मैं भी जैसे-तैसे सो गया.

थोड़ी देर बाद मुझे कुछ महसूस हुआ, तो मैं उठ गया.

मुझे दिखा कि मेरा पैर मासी की चूत पर रगड़ रहा था. मैं सोचने लगा कि साला लंड बड़ा हरामी है, सोते में भी पिटवाने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन मैंने मासी की तरफ देखा तो मुझे उनकी तरफ से कुछ भी विरोध नहीं दिखा. मैंने महसूस किया कि वो भी अपनी चूत फैला कर मेरे पैर की रगड़ का मजा ले रही थीं.

एक मिनट रुकने के बाद मैंने हिम्मत बढ़ाई और अपना हाथ उनके मम्मों पर रख दिए. कुछ भी नहीं हुआ, तो मैंने मासी के मम्मों को सहलाना शुरू कर दिया और उनके गुंदाज मम्मों की मुलायमियत का मजा लेने लगा.

तभी मासी जाग गईं और मैं शांत होकर सोने का नाटक करने लगा. मेरे हाथ अभी मासी के मम्मों पर ही थे … बस मैंने चूचे दबाना बंद कर दिए थे.

तभी मासी ने मुझे अपने तरफ खींचा और मेरे लंड को हिलाने लगीं. मेरा मुँह हैरानी से खुल गया … तो वो मेरे मुँह में अपनी उंगली डाल कर मजा लेने लगीं. मैं उनका इशारा और इरादा दोनों ही समझ गया और मैं भी उनको अपने पास खींच कर किस करने लगा.

मासी ने मेरी जीभ को अपनी मुँह में ले लिया. अब कभी मैं उनकी जीभ को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था, कभी मेरी जीभ को चूस रही थीं.

करीब दस मिनट तक हम दोनों ऐसा करते रहे. अब हम दोनों ही चुदास से एकदम गर्म हो चुके थे. मैंने उठते हुए मासी को सीधा किया और सबसे पहले उनके पैर को किस किया. मासी ने अपने पैर को उठा कर मेरे मुँह से लगा दिया. मैं उनका अंगूठा चूसने लगा.

धीरे धीरे मैं ऊपर की तरफ आता गया और उनके पूरे जिस्म को चूमता रहा. वो तड़पने लगी थीं.

मैं धीरे धीरे उनकी मैक्सी ऊपर करते आगे बढ़ता जा रहा था. मैंने उनकी जांघों को किस किया, तो उन्हें मानो करंट सा लगा … वो सिसकारते हुए हिल गईं. मासी को बहुत मजा आ रहा था और अब वो चिल्लाने लगी थीं. उनकी मादक आवाज निकल रही थी.

“आ … उह … आं … इस्स.” वो गर्म सिसकारी भर रही थीं.

फिर मैंने उनकी पैंटी को ऊपर से किस किया, तो वो एकदम से चुदासी हो गईं और तड़पने लगीं. मैंने देखा कि मासी की पैंटी पूरी तरह से भीग गई थी. उस वजह से मासी की चूत का बहुत मस्त महक आ रही थी.

मैं भी उनकी चुत पर किस कर करके उन्हें और मजा दे रहा था.

अब मैंने उनकी मैक्सी को और ऊपर कर दिया. उनकी नाभि पर किस करने लगा. नाभि के आजू बाजू में किस करने लगा था. उन्हें बहुत मजा आ रहा था और वो हल्के स्वर में कामुक आवाजें निकाल रही थीं- आ … उह … आं … इस्स.

फिर मैं ऊपर होकर उनकी चूचियों को सहलाने लगा और उनकी चूचियों को चूसने लगा … निप्पलों को बारी बारी से चाटने लगा. मैं मासी के मम्मों को अभी आम के जैसे चूस रहा था.

अब मैंने मासी की मैक्सी को निकाल दिया और अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में रह गई थीं और मुझसे चुदने के लिए बेताब हो गई थीं.

उन्होंने मुझे चुदाई करने का इशारा किया.

मैं शांत होकर सीधा लेट गया. वो मेरे ऊपर चढ़ गईं और मुझे होंठों पर किस करते हुए मेरी गर्दन को किस करने लगीं. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था.

उन्होंने धीरे से मेरी बनियान को निकाला और मेरे सीने पर किस करते हुए मेरी छाती की घुंडियों को चाटने लगीं. मुझे तो एकदम से आग लग गई … बहुत मजा आ रहा था.

उसके बाद वो मेरी नाभि के पास जाकर मेरी नाभि को जीभ से चाटने लगीं. मैं धीरे धीरे सिसकारियां भर रहा था- आआंह … मासी … बड़ा मजा दे रही हो … इस्स.

इस तरह से मादक आवाज से मेरे बेडरूम में पूरा वातावरण गर्म हो गया था.

फिर मैंने उन्हें अपनी गोद में बिठा कर ऊपर उठाया और उनके मम्मों को सहलाते हुए और चूमते हुए उनकी ब्रा के हुक्स खोल दिए. अब मासी के मदमस्त मम्मे मेरे सामने फुदक रहे थे. उनके दो रसीले आम देख कर मैं पागलों की तरह उन पर टूट पड़ा और उन्हें दबा दबा कर चूसने लगा.

मासी भी उसका मजा लेने लगीं. वो मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुझसे प्यार करती रहीं. मैंने मासी के दोनों मम्मों को दीवानगी की हद तक चूसा और लाल करके ही छोड़ा.

अब मैंने मासी को नीचे लिटाया और उनकी पैंटी को निकाल दिया. आह … मुझे जो चीज चाहिए थी, वो मेरे सामने थी. मेरे सामने मासी की शेव की हुई चुत चमक रही थी.

मुझसे रुका ही न गया और मैं धीरे धीरे से मासी की चुत को सहलाने लगा और उन्हें भी मजा देने लगा. मैं बीच बीच में अपनी उंगलियों को मासी की फूली हुई चूत के थोड़ा अन्दर तक डाल कर मजा लेता और देता रहा. इससे मासी को बहुत मजा आ रहा था.

उनकी आंखों में वासना के डोरे साफ़ दिख रहे थे. मैं धीरे से उनकी चुत को चाटने लगा, तो उन्हें इससे बहुत मजा आने लगा. क्योंकि मैं अपनी जीभ की नोक से उनकी चुत के ऊपर वाले हिस्से को मस्ती से चाट रहा था और मजा ले रहा था.

कुछ ही देर में मासी जोर से चिल्लाने लगीं- आंह … आह … आ …

मैं अपनी जीभ से उनकी चुत में डालकर उन्हें जीभ से चोदने लगा. उन्होंने करीब दस मिनट के बाद अपना पानी छोड़ दिया. मैंने वो सब रस बड़े मजे से पी लिया और उनकी पूरी चुत चाट कर साफ कर दी.

दो मिनट यूं ही मासी पड़ी रहीं. फिर वो बैठ गई और मेरी चड्डी निकाल दी. मेरा लंड एकदम से टाइट होकर उन्हें सलामी दे रहा था.

मासी ने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और धीरे धीरे उसे चाटने लगीं. सबसे पहले मासी ने अपनी जीभ की नोक से लंड के ऊपर के हिस्से पर फिरा दी. मासी लंड के टोपे पर चाटने लगीं.

मुझे तो मानो उड़ने के लिए सारा आसमान मिल गया था और मैं लंड चुसाई का मजा ले रहा था. मासी धीरे धीरे से पूरे लंड को अन्दर बाहर करने लगीं.

मुझे कुछ मिनट के बाद लगा कि मैं अपना पानी छोड़ने वाला हूं. मैंने मासी से पूछा- मासी क्या करूँ … मैं निकलने वाला हूँ?

मासी बोलीं- अन्दर ही छोड़ दो.

मैंने स्पीड बढ़ा दी और अपना पूरा पानी उनके मुँह में छोड़ दिया. उन्होंने लंड का पूरा पानी गटक लिया और बहुत अच्छे से लंड चाट कर साफ कर दिया.

हम दोनों थोड़ी देर के लिए रुक गए. इस बीच वो मेरे लंड को हिलाती रहीं और मैं उनकी चुत को सहलाता रहा.

कुछ देर बाद हम दोनों फिर से चार्ज हो गए. इस समय रात के करीब 12 बजे थे.

हम दोनों एक दूसरे के पास आ गए और किस करने लगे. मैं उनकी चुत में उंगली डाल कर उन्हें मजा दे रहा था.

मासी ने चुदाई करने का इशारा किया.

मैंने उन्हें अपने नीचे लिया और उनकी गांड की नीचे एक तकिया लगा दिया, जिससे उनकी चुत ऊपर की तरफ उभर कर आ गई.

अब मैंने अपना लंड उनकी चुत की छेद पर रखा और सुपारे को मासी की चुत की फांकों में फिराने लगा.

उन्हें लंड के स्पर्श से बहुत मजा आने लगा और वो तड़पने लगीं.

मासी बोलीं- मेरी जान अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं होता … जल्दी से लंड अन्दर डाल दो. मैंने थोड़ा जोर से झटका मारा और मेरा आधा लंड चुत के अन्दर चला गया.

मासी चिल्ला दीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई! मैं जरा रुक गया और उनके मम्मों को चूसने लगा. मासी को मजा आने लगा.

कोई 5 मिनट बाद मैंने मेरा पूरा लंड अन्दर पेला, तो वो धीरे से चीख उठीं और लंड को जज्ब करने लगीं. मैंने लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. अब उन्हें बहुत मजा आने लगा.

उस वक्त मासी मजे से सीत्कार भर रही थीं- ओह. … आंह … बड़ा अच्छा लग रहा है … उन्ह … उनके साथ मैं भी आवाज निकाल रहा था- आह … ले … पूरा ले लो …

चुदाई के साथ साथ मैं मासी को किस भी करता जा रहा था. मासी को बहुत मजा आ रहा था.

करीब 20 मिनट तक हमारा ये खेल चलता रहा था. उसके दौरान हमने बहुत सारी पोजीशनों में सेक्स का आनन्द लिया. मैं कभी डॉगी स्टाइल में मासी को चोदने लगता, तो कभी मैं नीचे लेट कर मासी को अपने लंड पर कुदाने लगता.

ऐसी बहुत सारी पोजीशनों में हम दोनों ने चुदाई का आनन्द लिया. जब मैंने मासी को कुतिया बना कर चोदा था उस समय मेरा मन हो गया था कि मासी की गांड भी मारना है.

इस सबके दौरान वो एक बार अपना पानी छोड़ चुकी थीं, अब मैं अपना पानी छोड़ने वाला था.

मैंने उनसे पूछा, तो वो बोलीं- अन्दर ही छोड़ दो.

मैंने अपनी स्पीड को बढ़ा दिया और लंड का पूरा गर्म गर्म पानी उनकी चुत में छोड़ दिया. झड़ने के बाद मैं शांत होकर उनकी ऊपर ही पड़ा रहा और उनको किस करता रहा.

वो कहने लगीं- आई लव यू … आज तो मजा आ गया..

मुझे गांड मारना बहुत पसंद है और मासी की गुलाबी गांड ने मेरा मन भी बना दिया था. मैंने मासी से कहा- मुझे पीछे से भी एक बार करने दो. वो तुरन्त बोलीं- हां आ जाओ.

वो झट से डॉगी स्टायल में हो गईं. मैंने उनके पीछे से अपने लंड को उनकी गांड के छेद पर रख दिया और उनकी गांड पर मैंने अपना थूक लगा दिया. उससे मेरा लंड अन्दर जाने में आसानी हो गई.

मैंने पहले शॉट में ही अपना आधा लंड मासी की गांड में पेल दिया.

मासी बहुत जोर से चीख पड़ीं- आह … मर गई … निकालो बाहर …

पर मैं वहीं रुक गया और उनके मम्मों को दबाता रहा. फिर मैंने उनकी गांड में अपना पूरा लंड घुसा दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा.

अब वो भी आगे पीछे हो कर लंड का मजा ले रही थीं. पूरे कमरे में ‘ठाप ठाप और पच…पच..’ की आवाजें गूंजती रहीं.

करीब 20 मिनट तक हम दोनों एनल सेक्स करते रहे. बाद में मैंने अपना सब पानी उनकी गांड के अन्दर ही छोड़ दिया. कुछ रस उनके चूतड़ों पर भी टपका दिया. उस रस से मैंने मासी की गांड की मालिश कर दी.

चुदाई के बाद हम दोनों शांत होकर पड़े रहे. हमें पता था कि जो भी मजा करना है, बस आज की रात करना है. क्योंकि कल मॉम डैड आने वाले थे.

मैंने मासी की तरफ देखा, तो उन्होंने 69 पोजीशन में सेक्स करने का कहा.

मैं झट से तैयार हो गया. वो मेरे ऊपर उल्टा लेट गईं और मेरे लंड को चूसने लगीं. मैं मासी की चुत को चाटने लगा.

करीब 20 मिनट के बाद हम दोनों ने पानी छोड़ दिया और हम दोनों ने एक दूसरे के लंड चुत को अच्छे चाट चाट कर साफ कर दिया.

काफी रात हो गई थी और हम दोनों काफी थक भी गए थे. इसलिए हम दोनों किस करके चिपक कर सो गए. हम दोनों नंगे ही सो गए थे.

फिर सुबह मैं जल्दी से उठा, तो देखा कि मासी मेरे बगल में ही नंगी सोई थीं और बहुत मस्त लग रही थीं. वो बड़े सुकून से आंखें मूंदे पड़ी थीं. मुझे बड़ी प्यारी लग रही थीं.

मैं उनको चूम कर बाथरूम में चला गया. वहां से नहा धोकर कमरे में आया और मासी को उठाया.

उन्होंने उठते ही मुझे प्यार से किस किया और कहने लगीं- तुमने मुझे जो मजा दिया, वो मैं कभी भूल नहीं पाऊंगी.

मैंने उन्हें चाय दी और चाय के बाद वो नहाने चली गईं.

दो घंटे बाद माँ पिताजी भी आ गए. हम दोनों बस यूं ही एक दूसरे को प्यार से देखते और हंस देते.

आज भी जब हम दोनों मिलते हैं और मौका मिलता है, तो सेक्स कर लेते हैं. मासी के संग किस वगैरह तो होता ही रहता है.

मेरी न्यू सेक्स स्टोरी पढ़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद. लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.

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