मिनी मेरी बन गई

एक बार मैं फिर आपके सामने अपनी नई कहानी के साथ हाजिर हूँ। मैं अपना परिचय अपनी पिछली कहानी तनु- मेरा पहला प्यार मेरा प्यारा प्यार में दे ही चुका हूँ।

मेरी यह कहानी एकदम सच्ची है जो आप लोगो को एकदम अपने करीब लगेगी। मेरा अगला सैक्सपिरियन्स चाँद के साथ था। फिर नीना, फिर शैलजा, फिर कल्पना और फिर मिनी के साथ मेरा सैक्सपिरियन्स हुआ।

पर आज ना जाने क्यों मुझे मिनी बहुत याद आ रही है। इसलिये मैं चाँद, नीना, शैलजा और कल्पना को साईड करते हुए पहले मिनी के साथ हुए सैक्सपिरियन्स को आप लोगो के साथ शेयर करता हूँ। उस वक़्त मैं 20 साल का और मिनी 19 साल की थी।

मेरे माता-पिता दोनों टीचर थे। मेरी एक बडी बहन है। जो मेरे से लगभग दो साल बड़ी है। मेरी बहन की शादी बनारस में हुई।

मेरे जीजाजी एक मल्टी-नैशनल कम्पनी में परचेज़ मैंनेजर हैं। बी.एस सी के बाद मैंने बनारस युनिवर्सिटी में बी.फ़ार्मेसी में प्रवेश लिया। मैं होस्टल में रहने लगा। फिर दीदी ने अकेले होने की वजह से मुझे अपने साथ ही रहने को कहा। मैं होस्टल छोड़ कर दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा।

दीदी के पड़ोस में एक दुमंज़िला मकान था। जहाँ दो बहनें रहा करती थी। ऊपर बड़ी बहन जो कि मकान मालकिन भी थी और नीचे यानी ग्राउंड-फलौर पर छोटी बहन। बड़ी बहन लगभग 55 साल की थी और छोटी बहन लगभग 50 साल की थी।

हम उन्हें ऊपर वाली आन्टी और नीचे वाली आन्टी कहते थे। ऊपर वाली आन्टी के तीन बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी।

तीनों बच्चों की शादी हो चुकी थी और सभी बाहर रहते थे। इसलिये उपर वाली आन्टी-अकल ने अपनी सबसे बड़ी लड़की की लड़की को अपने साथ रखा हुआ था। उसका नाम लीनू था। लीनू बनारस महिला कॉलेज़ में बी.ए. प्रथम वर्ष में पढ़ती थी। लीनू बहुत ही ख़ूबसूरत थी। खैर वो बाद में…

नीचे वाली आन्टी के भी तीन ही बच्चे थे। दो लड़के और एक लड़की। लड़की सबसे बड़ी थी। तीनों बच्चे पढ़ रहे थे। लड़की का नाम मीनाक्षी था। घर में सब उसे मिनी कहते थे। मिनी लगभग 19 साल की थी और बनारस महिला कॉलेज़ में ही बी. एस सी. (बायो) अन्तिम वर्ष में पढ़ती थी।

मिनी भी बहुत ही ख़ूबसूरत थी मगर लीनू से कुछ कम। मेरी बहन ने भी बी.एस सी. (बायो) की थी। इसलिये मिनी मेरी बहन से कभी-कभी पढ़ने आती थी। जब मैं दीदी-जीजाजी के साथ में रहने लगा तो दीदी मिनी को मेरे से पढ़ने के लिये कह देती। मिनी को मेरा समझाना अच्छा लगता था, इसलिये वो अकसर मेरे से पढ़ने आने लगी।

धीरे-धीरे मैं और मिनी एक दूसरे को बहुत पसन्द करने लगे। मिनी से मेरी मुलाक़ातें बढ़ने लगी। ये मुलाक़ातें धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।

फिर एक दूसरे को बाँहो में भरना, किस करना, फिर एक दूसरे के अंगों को छूना भी शुरु हो गया। मैं मिनी के स्तनों को दबाने और सलवार के उपर से उसकी चूत को दबाने और फिर सलवार के अन्दर हाथ डाल कर चूत पर हाथ फिराने तक पहुँच गया। मिनी भी मेरी पैंट की ज़िप खोल कर मेरा लण्ड निकालने और दबाने तक पहुँच गई।

एक दिन मिनी घर आई। उसे मुझ से केमिस्ट्री में कुछ पढ़ना था। हम दोनों ड्राइंगरूम में पढ़ने लगे। हमें पढ़ते देख कर मेरी बहन बोली कि तुम लोग पढ़ाई करो और मैं मार्केट हो कर आती हूँ। दो-तीन घंटे तक आ जाउँगी। कह कर वो चली गई। बहन के जाते ही मैं मिनी को छेड़ने लगा।

मिनी ने कहा- क्या कर रहे हो। मैं बोला- मौके का फायदा उठा रहा हूँ।

मैंने मिनी को खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।

मैं मिनी के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर मैं उसके गालों पर हाथ फिराने लगा। मैं उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसके कुरते के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके स्तनों को दबाने लगा। फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा।

मिनी बोली- क्या करते हो! दीदी आने वाली होंगी।

मैंने कहा- वो दो-तीन घंटे तक नहीं आँएंगी। कह कर मैं फिर उसके कुरते को उतारने लगा।

मिनी बोली- प्लीज़! कोई आ जाएगा।

मैंने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर मैं मिनी का हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले आया। मैंने मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया, अपने जलते हुए होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा।

मिनी ने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ मिनी के जिस्म पर फिर रहे थे। कुछ देर बाद मैंने मिनी को बैड पर लिटा दिया। फिर मिनी का कुरता उपर करके उसके चिकने पेट पर अपने जलते हुए होंठ रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे पेट को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। मिनी के मुँह से आह निकलने लगी।

फिर मैं उसके कुरते को उतारने लगा। मिनी ने कोई विरोध नहीं किया। मैंने उसका कुरता उतार कर फ़ेंक दिया। मिनी के गोरे-गोरे स्तन गुलाबी ब्रा में फँसे थे। फिर मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी।

कुछ देर बाद मैंने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी। फिर मैं उसके गोरे-गोरे सख्त स्तन दबाने लगा। साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर मैं उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।

फिर मैं उसके पेट पर हाथ फिराते हुए उसकी सलवार के अन्दर ले गया। मैं उसकी सलवार का नाड़ा खोलने लगा तो मिनी ने कोई विरोध नहीं किया।

मैंने उसकी सलवार उतार कर फेंक दिया। मिनी ने गुलाबी पैन्टी पहनी हुई थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और सिर्फ जॉकी में मिनी से लिपट गया।

फिर मैं उसकी पैन्टी के ऊपर से पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत को दबाने लगा। मिनी ने अपनी आंखें बंद कर रखी थी। फिर मैं उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा। कुछ देर बाद मैंने उसकी पैन्टी भी उसके तन से जुदा कर दी।

मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया था और जॉकी को फाड़ कर बाहर आने को हो रहा था। मैंने जॉकी उतार कर फेंक दी। मैं मिनी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। फिर मैं मिनी की चूत के बालों में हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते मैंनें अपनी उँगलियॉ मिनी की चूत के अन्दर डाल दी।

फिर उंगलियों से मिनी की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर मैं मिनी की चूत के जी-पॉन्यट को रगड़ने लगा।

मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। मिनी ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। मेरा लण्ड मिनी की जांघों से रगड़ खा रहा था। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी।

मेरा लण्ड तन कर सख्त हो गया था। मिनी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर कर उपर-नीचे और आगे-पीछे करने लगी। मैं मिनी की चूत मारने को बेताब हो रहा था।

मैंने मिनी को कहा- मिनी! बहुत मन हो रहा है। कर लें क्या!

मिनी कुछ नहीं बोली। मैंने इसे मिनी की हाँ समझ लिया। मैं मिनी के उपर लेट गया।

मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दबा हुआ था। मैं अपने लण्ड को मुठ्ठी में भर कर मिनी की चूत के जी-पॉन्यट के उपर-नीचे करके रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लण्ड को पकड़ कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

मिनी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- हमें डर लगता है। प्लीज़! कंडोम के बिना कुछ नहीं करेंगे। प्लीज़! कंडोम हो तो लगा लीजिए।

मैंने एक बार दीदी के साथ साफ-सफाई में हाथ बँटाते हुए बैड की दराज में कंडोम देखे थे। मैंने फौरन उठ कर बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। मिनी ध्यान से मुझे कंडोम लगाते देख रही थी। कंडोम लगा कर मैं फिर से मिनी के ऊपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया।

फिर मिनी मेरे लण्ड को मुठ्ठी में भर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी और बोली- प्लीज़! ऐसे करते रहिए। अपने आप चला जाएगा।

मिनी की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। शायद उसको यह करना अच्छा लग रहा था। वो मेरे लण्ड को अपनी चूत से रगड़े जा रही थी। मुझे बहुत ज्यादा उत्तेजना हो रही थी। इसी उत्तेजना में मैंने मिनी का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले मैं कुछ समझ पाता मैं मिनी की चूत के ऊपर झड़ गया।

कंडोम लगे लण्ड को चूत से रगड़ने की वजह से कंडोम फट गया था और मेरा वीर्य मिनी की चूत के बालों में भर गया था। मैं मिनी के बगल में लेट गया।

मिनी उठ कर बाथरुम चली गई। कुछ देर बाद वो बाथरुम से अपनी चूत साफ करके आकर मेरी बगल में लेट गई। कुछ देर हम चुपचाप लेटे रहे।

थोड़ी देर बाद मिनी ने मेरी तरफ करवट ले कर अपनी टांगों को मेरी टांगों पर रख लिया। मैंने भी करवट ले कर मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया।

मैंने अपने जलते हुए होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए। फिर मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया। मेरे हाथ मिनी के गोरे-गोरे और चिकने-चिकने जिस्म पर फिर रहे थे। मिनी भी अपने हाथों को मेरी पीठ पर फिर रही थी। कुछ देर मैं मिनी के होठों को चूसता रहा। फिर मैं मिनी के ऊपर लेट गया।

फिर मैं साथ-साथ उसके गुलाबी निप्पल को हल्के-हल्के मसलने लगा। मेरा लण्ड फिर से तन कर खड़ा हो गया था और मिनी की चूत के बालों से रगड़ खा रहा था। मैं मिनी की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा।

मेरा लण्ड मिनी की जांघों के बीच फंसा हुआ था। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। मैं मिनी को चोदने को बेताब हो रहा था। मिनी की चूत से फिर से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैं अपने लण्ड को पकड़ कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा।

मिनी ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- प्लीज़ कंडोम लगा लीजिए।

मैंने फौरन फिर से बैड की दराज में से कंडोम निकाल कर अपने लण्ड पर लगा लिया। कंडोम लगा कर मैं फिर से मिनी के उपर लेट गया। मैंने अपने को मिनी की टांगों के बीच में सैट कर अपने लण्ड को पकड कर मिनी की चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा। मिनी ने मेरा लण्ड अपने हाथ में थाम लिया और अपनी चूत के सुराख पर लगा दिया और बोली- अब धीरे से डालिए।

मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया। मेरे लण्ड का सुपाड़ा मिनी की चूत में घुस गया। मिनी के मुँह से आह निकली।

उसने मुझे अपनी बाँहो में कस लिया और अपनी आँखें कस कर बन्द कर ली। मैंने थोड़ा ओर जोर लगाया। मेरा लगभग आधा लण्ड मिनी की चूत में घुस गया। मिनी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर मैंने तीसरा और आखिरी धक्का दिया तो मेरा पूरा लण्ड मिनी के कौमार्य को चीरता हुआ चूत में समा गया। मिनी के मुँह से जोर से आह निकली। उसने मुझे अपनी बाँहो में पूरी ताकत से कस लिया।

मैंने भी मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा ताकि वो अपना दर्द भूल जाए।

मेरा पूरा लण्ड मिनी की चूत के अन्दर समाया हुआ था। हम दोनों ने एक दूसरे को इस कदर अपनी बाँह में जकड़ा हुआ था कि हवा भी हम दोनों के बीच से पास नहीं हो सकती थी।

मिनी का नंगा जिस्म मेरे नंगे जिस्म के नीचे दबा हुआ था। मेरी टांगें मिनी की टांगों के बीच में फंसी हुई थी। मैं मिनी के माथे पर, फिर आँखों पर तथा गालों को किस करने लगा। मिनी भी मेरे गालों को किस करने लगी।

कुछ देर हम दोनों इसी तरह से एक-दूसरे को चूमते रहे। फिर मैंने अपने लण्ड को धीरे से मिनी की चूत से थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर अपने लण्ड को धीरे से मिनी की चूत में अन्दर घुसा दिया। फिर मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे से मिनी की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा।

कुछ देर बाद मिनी ने अपनी टांगें ऊपर की तरफ मोड़ ली और मेरी कमर के दोनों तरफ लपेट ली। मैं अपने लण्ड को धीरे-धीरे मिनी की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी। अब मेरा लण्ड मिनी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।

मैं मिनी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। मिनी को भी मजा आने लगा था। वो मेरे हर धक्के का स्वागत कर रही थी।

उसने मेरे हिप्स को अपने हाथों में थाम लिया। अब वो भी नीचे से मेरे धक्कों के साथ-साथ अपने हिप्स ऊपर-नीचे कर रही थी।

जब मैं लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपने हिप्स ऊपर उठा देती। जब मैं लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने हिप्स पीछे खींच लेती। मैं तेज-तेज धक्के मार कर मिनी को चोदने लगा। मैं बैड पर हाथ रख कर मिनी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड मिनी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था।

मिनी भी अब आँखें खोल कर चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। मैं मिनी को पागलों की तरह से चोद रहा था। अब मैं पूरी तेजी से मिनी के उपर कूद-कूद कर उसे चोद रहा था। मिनी इस चुदाई के नशे से मदहोश हो रही थी।

मैंने रुक कर मिनी से कहा- मिनी अच्छा लग रहा है क्या? मिनी बोली- हां बहुत अच्छा लग रहा है। करो ना। तेज-तेज करते रहो।

मिनी के मुहँ से ये सुन कर मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। मैंने मिनी के हिप्स को हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर मिनी को चोदने लगा।

मिनी के मुँह से मस्ती में “ओह्ह्ह्ह होहोह सस्स्स ह्ह्ह हाहाह्ह्ह आआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ राज, तेज-तेज करो ना।”

मैं मिनी के उपर लेट गया और मैंने मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया। फिर मैंने अपने होंठ मिनी के होंठों पर रख दिए और मैं उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसते हुए उसे ओर तेजी से चोदने लगा। मेरा लण्ड सटासट मिनी की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था।

अब मैं मिनी की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मार रहा था। हम दोनों सेक्स के नशे में चूर हो रहे थे। मिनी भी अपने होठों से मेरे होठों को चूसती हुई मजे से चुदाई का मजा ले रही थी। मैं मिनी को काफ़ी देर तक ऐसे ही चूमते हुए कस कर चोदता रहा। लगभग 5 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूसते हुए चुदाई का मजा लेते रहे। फिर अचानक मिनी ने मुझे कस कर अपनी बाँहो में भर लिया।

उसने अपने होंठ मेरे होठों से अलग करके कहा- ओह राज, मैं तो होने वाली हूँ। प्लीज़ तुम भी हो जाओ। दोनों साथ-साथ होंगे। जब तुम होने लगो प्लीज़ तो इसे मेरे अन्दर से बाहर निकाल लेना। कंडोम का भी कोई भरोसा नहीं होता है। प्लीज़ बाहर ही होना।

मैंने कहा- ठीक है मिनी।

और यह कह कर मैं तेज-तेज धक्के मार कर मिनी को चोदने लगा।

लगभग 2 मिनट बाद अचानक मिनी ने एक जोर से आह भरी और अपने हिप्स और अपनी चूत को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाया और फिर बैड पर अपने पैर पसार दिये। मैं समझ गया कि मिनी डिस्चार्ज हो चुकी है।

मैं भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये मैं बैड पर हाथ रख कर मिनी के उपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब मेरा लण्ड मिनी की चिकनी चूत में तेजी से आ-जा रहा था। मिनी आँखें बंद करके बैड पर सपाट लेट कर मेरे डिस्चार्ज होने का इंतजार कर रही थी।

लगभग 2 मिनट तक मिनी को तेज-तेज चोदने के बाद जब मैं डिस्चार्ज होने लगा तो मैंने मिनी के कहने के मुताब़िक, अपना लण्ड मिनी की चूत में से बाहर खींच लिया और मिनी की चूत के बाहर कंडोम में ही डिस्चार्ज हो गया।

फिर मैं मिनी के उपर लेट गया। मिनी का नंगा जिस्म मेरे नीचे दब गया। मेरा लण्ड कंडोम में सिकुड़ा हुआ मिनी की झाटों के ऊपर पडा था। कुछ देर तक मैं मिनी के ऊपर लेटा रहा और अपनी तेज-तेज चल रही सांसों को काबू में आने का इंतजार करता रहा। मिनी भी मेरे नीचे दबी हुई अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी।

कुछ देर बाद मैंने उठ कर अपने लण्ड पर से कंडोम उतार कर एक अखबार के कागज़ में लपेट कर डस्टबिन में फेंक दिया। फिर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड साफ करके मिनी की बगल में लेट गया। मिनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसका गोरा और नंगा बदन चमक रहा था।

कुछ देर बाद मैंने मिनी की तरफ करवट ली और अपनी टांग मिनी की टांगों पर रख दी। फिर उसके स्तनों पर हाथ फेरने लगा।

मिनी बोली- हो गई तुम्हारे मन की! मैंने कहा- हाँ मिनी, बहुत अच्छा लगा। मजा आ गया।

कह कर मैंने करवट ले कर मिनी को अपनी बाँहो में भर लिया।

कुछ देर तक हम ऐसे ही लिपटे हुए बातचीत करते रहे। फिर मिनी बोली- चलो अब उठो। दीदी आने वाली होंगी।

मैंने कोई खास नखरा नहीं किया और मिनी के कहते ही मैंने उठ कर अपने अन्डरवियर से अपना लण्ड फिर से साफ किया और अपने कपड़े पहन लिये। मिनी ने भी उठ कर अपने कपड़े पहन लिये। फिर हम दोनों ड्राइंगरूम में बैठ कर बातें करने लगे। हमने कुछ देर बातचीत की।

फिर मिनी बोली- मैं चलती हूँ। दीदी के आने से पहले मेरा चले जाना ही ठीक रहेगा। वरना दीदी को खामख्वाह शक होगा।

कह कर मिनी घर जाने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।

फिर मैंने उससे कहा- प्लीज़ कुछ देर ओर रुको ना। वो अपना हाथ छुड़ाने लगी और बोली- क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं।

वो जाने लगी। मैंने उसे खींच कर अपनी गोद में लिटा लिया।

मिनी बोली “क्या करते हो। दीदी आने वाली होंगी। प्लीज़ छोड़ो मुझे।

मैंने उसे छोड़ने की बजाय अपने सीने से चिपका लिया। फिर मैं अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसके कुरते के ऊपर से उसके स्तन दबाने लगा।

मैं मिनी से बोला- मिनी, एक बार फिर करने का मूड़ हो रहा है। एक बार फिर करें क्या?

यह सुनते ही वो एकदम छिटक कर अलग हो गई और बोली- पागल तो नहीं हो गये हो। दीदी आने वाली होंगी। मैं जा रही हूं। ओ.

के बाय!

उसने हाथ हिला कर बाय किया। फिर वो दरवाजा खोल कर तेजी से अपने घर जाने लगी। मैं उसे जाते हुए देखता रहा।

तो यह था मेरा मिनी के साथ ये मेरा पहला सैक्सपिरियंस। इसके बाद मौका मिलने पर लगभग एक साल में हमने 18 बार खुलकर सेक्स किया। हर बार सेक्स करने का अन्दाज और मजा अलग ही था। अगर समय मिला तो मिनी के साथ बाकी के 18 में से कुछ खास-खास सैक्सपिरियंस के बारे में भी जरुर बताऊँगा।

मिनी के साथ इसके बाद लगभग एक साल तक ही सेक्स हो पाया। क्योंकि मिनी की मम्मी और मौसी की आपस में अनबन हो गई और उन्होंने मकान बदल लिया। फिर जीजाजी ने भी बनारस वाली कम्पनी छोड़ कर फरीदाबाद में एक दूसरी कम्पनी ज्वाईन कर ली। मैं फिर से होस्टल में शिफ्ट हो गया। मकान बदलने के बाद, दीदी-जीजाजी के जाने के बाद मैं मिनी से मिलने उसके घर तो कई बार गया तथा मिनी से मिलना भी हुआ। मगर सेक्स ना हो सका।

फिर मेरे बी.फ़ार्मा अन्तिम वर्ष के पेपर शुरु हो गये। पेपर दे कर मैं मिनी से मिलने उसके घर गया और मिनी से जल्द मिलने का वादा करके गुड़गाँव वापस आ गया।

लगभग 3 महीने बाद मैं अपना रिजल्ट लेने फिर बनारस गया। चूंकि मैं होस्टल छोड़ चुका था, इसलिये मैं होटल में ठहरा था।

रिजल्ट लेकर मैं मिनी से मिलने उसके घर पास होने की खुशी में मिठाई ले कर गया। मिनी और उसके घरवालों ने मेरा जोर-शोर से स्वागत किया।

मैं काफी देर वहां रुका। वहीं लन्च किया। फिर लन्च के बाद जब मैं चलने लगा तो मिनी मुझे मेन-गेट पर छोड़ने के बहाने आ गई।

मैंने गेट पर मिनी को कहा- मिनी, परसों मैं वापस गुड़गाँव जा रहा हूँ। अब ना जाने कब मुलाकात होगी। मैं सम्राट होटल में रूम न:11 में ठहरा हूँ। क्या तुम कल मुझसे मिलने वहां आ सकती हो? प्लीज़ मिनी, प्लीज़ जरूर आ जाना। मैं पूरा दिन तुम्हारा इन्तज़ार करुंगा। ओके! बाय!

यह कह कर मैं मिनी की हां या ना सुने बगैर चल दिया। मैं जानता था कि मिनी जरुर आएगी और ऐसा हुआ भी।

अगले दिन मिनी लगभग 12 बजे होटल आई। मैं होटल लॉबी में उसका इन्तज़ार कर रहा था। फिर मिनी को साथ लेकर मैं होटल के कमरे में आ गया।

उस दिन हमने होटल के कमरे में और फिर बाथटब में कुल 3 बार सेक्स किया। बड़ा मजा आया। अगले दिन मैं गुड़गाँव वापस आ गया फिर चाहते हुए भी हम दोबारा नहीं मिल सके और हमारे प्यार की कहानी यहीं खत्म हो गई।

एक बार मिनी का भाई मेरे पास गुड़गाँव में मेरे घर पर आया। उसने बताया कि मिनी की शादी हो गई है और वो गुड़गाँव में ही किसी काल-सेन्टर में जॉब कर रही है। उसके दो बेटे है। उसका पति दिल्ली में किसी न्यूज़ चैनल में जॉब कर रहा है।

मैंने मिनी के भाई को अपना मोबाईल नम्बर दिया और कहा कि मिनी को कहना कि मेरे से बात करे। मगर आज इस बात को लगभग तीन साल हो गये है। मगर मिनी का आज तक फोन नहीं आया। या तो उसके भाई ने उसे मेरा नम्बर दिया ही नहीं। या फिर वो चूंकि अब शादीशुदा है, इसलिये वो शायद मुझसे बात ना करना चाहती हो। खैर जो भी हो।

सो मिनी आज तुम कहाँ हो। अगर तुम यह कहानी पढ़ोगी, तो जरूर मुझे पहचान लोगी।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये कहानी।

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