पलक की चाची-5

This website is for sale. If you're interested, contact us. Email ID: [email protected]. Starting price: $2,000

प्रेषक : सन्दीप शर्मा

वो आकर मेरे बगल में बैठ गई और जब उसने मेरे हाथ देखे तो चीखते हुए आंटी से बोली- यह क्या है?

आंटी के बजाय मैंने ही जवाब दिया- कुछ नहीं रे, आंटी का प्यार है।

मेरी बात सुन कर उसने मेरे दोनों हाथों को टी शर्ट की बाहें ऊपर करके देखा, फिर मुझे खड़ा करके मेरी टीशर्ट ऊपर करके मेरी पीठ और पेट को देखा, मेरे पैरों को देखा और फिर जब मैंने उसे देखा तो पाया कि उसकी आँखें भरी हुई थी।

मैंने कहा- क्या हुआ पागल रो क्यों रही है चल खाना खा !

तो मुझसे बोली- आय एम् सॉरी यार मेरे कारण तुझे इतनी तकलीफ हुई।

मैंने उसे गले लगाते हुए कहा- अब चुपचाप खाना खा और कोई तकलीफ नहीं हुई है मुझे !

तो वो मेरे साथ खाना खाने बैठ तो गई पर उसके गले से तब भी कोई निवाला नहीं उतर रहा था, मैंने और आंटी दोनों ने ही बहुत बोला, आंटी ने उसे कई बार सॉरी बोला फिर भी उसका मूड ठीक नहीं हुआ फिर अचानक बोली- हाँ, यह ठीक रहेगा।

और फिर उसने ठीक से खाना खाना शुरू कर दिया। न मुझे समझ में आया की क्या ठीक रहेगा न ही आंटी को, पर हम दोनों यह समझ गये थे कि इस शैतान की नानी ने अपने दिमाग में कोई न कोई बात जरूर सोच ली है।

फिर खाने के बाद पलक बोली- मैं शाम को तेरे लिए पूरी बाजू वाली कमीज़ और बन्द गले की इनर ले आऊँगी, तब तक यू बोथ एन्जॉय ( तुम दोनों मजे करो )।

तो आंटी बोली- तू भी रुक जा, तीनों साथ में मजे करेंगे।

मैं जानता था कि पलक इस बात के लिए तो राजी होने वाली नहीं है किसी भी हालत में, पलक बोली- नहीं जब ये और मैं होंगे तो कोई और नहीं हो सकता, कोई भी नहीं, और मैं रुक भी जाती पर अब तो बिल्कुल नहीं !

जाते जाते पलक मुझसे कान में बोली- आज शनिवार ही है तुझे आज कहीं जाने की जरूरत नहीं है और कल जब मैं वापस आऊँ तो मुझे यही हालत आंटी की दिखनी चाहिए, नहीं तो तेरी खैर नहीं है।

मैं पलक की बात समझ गया था और यह भी समझ गया था कि वो शाम को वापस नहीं आने वाली है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

पलक के जाने के बाद आंटी ने दरवाजा बंद किया, मैंने आंटी को बाँहों में जकड़ लिया और उनकी गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया।

आंटी बोली- थोड़ी देर पहले मुझे जाने दो की रट लगा रखी थी और अब मुझे ऐसे चूम रहे हो जैसे मैं तुम्हारा माल हूँ, शैतान हो बहुत तुम।

मैंने अपने शायराना अंदाज में उन्हें जवाब दिया-

.

“हमें करते हो मजबूर शरारतों के लिए, खुद ही हमारी शरारतों को बुरा बताते हो !!

अगर इतना ही डरते हो तुम आग से, तो बताओ तुम आग क्यों भड़काते हो?

.

मेरी बात सुन कर आंटी वाह वाह करने लगी, पलट कर मुझे भी बाँहों में भर लिया, मेरे होंठों को चूम लिया और मैं आंटी को लेकर हाल में पड़े हुए सोफे पर ही बैठ गया, आंटी को चूमने लगा और आंटी मुझे !

इसी बीच कब हम दोनों के कपड़े उतरे पता ही नहीं चला, कब आंटी मेरे ऊपर आई और कब कपड़े उतरने के बाद मैं आंटी के स्तनों को काटने और चूसने लगा, पता ही नहीं चला।

मैं आंटी के स्तनों को चूस रहा था और स्तनों के नीचे की तरफ थोड़े थोड़े निशान भी बना रहा था दांतों से, जिससे आंटी को बड़ा मजा आ रहा था, मेरे हर काटने पर ओह संदीप, आह्हह्ह …नहीं, मत काटो …जैसे शब्द आंटी के होंठों से निकल रहे थे पर उनकी ना में एक भी बार ना नहीं था।

मेरा साढ़े पांच इंच का लण्ड पूरी तरह से खड़ा हुआ था और आंटी मेरी जांघों पर कैंची बना कर बैठी हुई थी सोफे पर दोनों घुटने टिका कर उन्होंने मेरा लण्ड अपने एक हाथ से पकड़ा उसे अपनी चूत पर लगाया और एक झटके में मेरा पूरा लण्ड उनकी चूत में पहुंच गया।

यह सब इतनी तेजी से हुआ कि मेरे मुँह से भी एक आह निकल गई और आंटी उसी हालत में आकर उचक उचक कर चुदवाने लगी। हम दोनों ही अब तक पसीने पसीने हो चुके थे।

उनके मुँह से इस वक्त आह आह उह्ह्ह उह्हह्हह्हह्ह … मजा आ गया जैसे शब्द निकल रहे थे और मैं एक हाथ से उनकी कमर पकड़ कर कभी उनके स्तनों को काट रहा था और कभी उनके होंठों को चूम रहा था।

हम दोनों इसी तरह वासना के आवेग में बहते जा रहे थे, तभी आंटी का झरना फूट पड़ा, आंटी का पूरा बदन अकड़ गया, उन्होंने मेरे सर को अपने गीले हो चुके स्तनों पर कस कर दबा लिया और झड़ती रही। मैं भी झड़ने की कगार पर ही था तो आंटी के झड़ते ही मैंने उन्हें नीचे बिछे कालीन पर लिटाया और उनके एक स्तन को मुँह में ले कर दूसरे स्तन को हाथ से मसलते हुए उन्हे जोर जोर से चोदने लगा।

आंटी जैसे मेरी हर बात समझ गई थी तो उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया और मैं कुछ झटके मार कर उनकी चूत में ही झड़ने लगा और झड़ कर एक बार फिर उनके ऊपर ही लेट गया।

थोड़ी देर बाद मैं आंटी के ऊपर से उठा और बगल में लेट गया, आंटी भी लेटी रही। उसके बाद आंटी ने अपना गाऊन उठा कर पहले मेरे बदन का पसीना पौंछा और फिर खुद के बदन का, और मुझसे बोली- तुम थोड़ा आराम कर लो, मैं तब तक घर का काम कर लूं !

पर मैंने कहा- मुझे भूख लगी है, पहले खाना खा लूँ फिर सोने जाऊँगा।

मैंने अंडरवियर पहना और खाना खाने लगा। भूख आंटी को भी लग चुकी थी तो उन्होंने भी एक दूसरा गाऊन पहना और मेरे साथ खाना खाने लगी।

खाना खाने के बाद मैंने अपने कपड़े उठाये और कहा- मैं सोने जा रहा हूँ !

तो आंटी बोली- तुम मेरे कमरे में सो जाओ, वो कमरा साफ़ नहीं है।

मुझे क्या फर्क पड़ना था, मैं आंटी के कमरे में सोने के लिए चला गया, कपड़े पहने और बिस्तर पर लेट गया, लेटते ही मुझे नींद आ गई और जब नींद खुली तो शाम के साढ़े सात बज चुके थे, आंटी मेरे बगल में चिपक कर सोई हुई थी वो भी बिना कपड़ों के।

मैंने इस मौके का फायदा उठाने की सोची, मैं जाकर सुबह वाले कमरे से रस्सियाँ ले आया और आकर बड़ी ही सावधानी से आंटी को बाँध दिया।

उसके बाद मैंने अपने पसंदीदा रेस्तरां से खाने का ऑर्डर दिया और उसे कहा- रात को साढ़े नौ बजे तक खाना पहुँचा दे।

जब मैं वापस आया तब तक आंटी की नींद भी खुल चुकी थी और वो भी समझ चुकी थी कि उन्हें मैंने ही बाँधा था।

मुझे देख कर बोली- मुझे बांधने की कोई जरूरत नहीं है, जो चाहो कर लो, मैं तो तैयार हूँ तो खोल दो रस्सी।

मैंने कोई जवाब देने के बजाय अपनी टीशर्ट उतार दी और आंटी के बगल में आकर आंटी के स्तनों पर सीना रख दिया और दांतों से आंटी को बांये कंधे पर काट लिया।

आंटी बोली- अरे काटो मत ! निशान हो जायेगा।

और जवाब मैं मैंने फिर से उनके कंधे पर बगल में ही काट दिया।

आंटी ने कहा- अरे, क्या कर रहे हो??

और जवाब मैंने एक बार और काट कर दिया और इस बार आंटी का सुर बदल चुका था, इस बार आंटी ने बड़ी ही याचना के स्वर में कहा- प्लीज मत काटो ना संदीप ! निशान जायेंगे नहीं !

और मैंने थोड़ा ऊपर उठ कर आंटी को उतनी ही प्यार से जवाब दिया- अगर आपको निशान ना दिए तो मैं तकलीफ में आ जाऊँगा और अब आपको समझ में आया कि आपको बांधना क्यों जरूरी था।

मेरे जवाब को सुन कर आंटी ने विरोध करने का इरादा ही छोड़ दिया और एक ठंडी सी साँस छोड़ कर खुद को समर्पित कर दिया मानो वो इस दर्द भरे आनन्द को अनुभव करना चाहती थी, मैंने भी तय कर लिया था कि उन्हें निशान तो देता रहूँगा पर पूरा आनन्द भी दूंगा।

मैं फिर से आंटी के कंधे पर आया और उनके दांये कंधे को मेरे मुँह में भरा दांतों से निशान बनाया और उसे चूसते हुए मुँह को वहाँ से हटाया।

मेरे ऐसा करने से आंटी के मुँह से एक मीठी सी सिसकारी निकल गई, उनके पूरे बदन में हलचल मच गई।

उनकी वो सिसकारी पूरी होती उससे पहले ही मैंने उस निशान के बगल में ही एक निशान बनाते हुए उसी तरह से फिर चूस लिया और फिर सिसकारी और हलचल की एक लहर उठ गई।

मैंने आंटी के चेहरे की तरफ देखा उनके चेहरे पर असीम आनन्द दिख रहा था, उनकी दोनों आँखे बंद थी और वो जैसे अगले बाईट का इन्तजार ही कर रही थी।

मैंने इस बार उनके दांये गाल को मुँह में लिया और गाल को चूसने लगा और मेरे इस चूसने का आंटी भरपूर आनन्द ले रही थी।

फिर मैं नीचे खसका और मैंने आंटी के स्तनों को काटना और चूसना शुरू किया और इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मेरा एक पैर या घुटना आंटी की चूत को रगड़ ही रहा था जिससे आंटी को मजा दुगुना मिल रहा था और उनके मुँह से लगातार सिसकारियाँ और आह्ह उह्ह जैसी आवाजें निकल रही थी। नीचे मैं आंटी की चूत को पैर से रगड़ रहा था और ऊपर उनके शरीर को कभी स्तनों पर कभी पेट कर कभी कांख पर और कभी कंधों पर काट रहा था।

इसी बीच मुझे लगा कि आंटी झड़ने वाली हैं, और जैसे ही मुझे इसका आभास हुआ मैं रुक गया।

आंटी मुझसे बोली- प्लीज, करता रह ना ! मत रुक !

पर मैं कहाँ उनकी बात मानने वाला था मैंने उन्हें अपने ही अंदाज में कहा-

.

तब तुम्हारी तैयारी थी, अब ये हमारी तैयारी है

तब तुमने तड़पाया था, अब तड़पाने की हमारी बारी है !

.

और इस बीच मैं बार बार रुक कर उनके स्तनों को चूम लेता था या उनके माथे और होंठों को जिससे उनका जोश बना रहता था।

मैं कुछ देर रुका और मैंने फिर से वही काम शुरू कर दिया और इस बार मैं उनके निचले भागों को चूम रहा था, चूस रहा था और काट रहा था। मैंने उनकी जांघों से शुरु किया और फिर नीचे की तरफ उनके घुटनों और तलवों तक भी चला गया।

उनके तलवे बहुत ही नाजुक थे उतने ही मुलायम जितने मेरे हाथ की हथेलियाँ या शायद ऐसा कहूँ कि मेरे हाथों की हथेलियाँ भी कड़क ही होंगी तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

मैंने उनके पैरों पर निशान दिये और फिर से उनके ऊपरी भाग की तरफ बढ़ने लगा, बढ़ते हुए मैं उनके पेडू पर पहुँचा, मैंने वहाँ काटना और चूसना शुरू कर दिया और एक हाथ से आंटी की चूत को भी सहलाना शुरू कर दिया।

इसका नतीजा यह हुआ कि आंटी फिर से चरमसीमा पर पहुँच गई और तड़पने लगी।

और जैसे ही आंटी इस स्थिति में पहुँची, मैंने उन्हें सहलाना, काटना और चूसना बंद कर दिया। इससे आंटी की तड़प और बढ़ गई और मैं वापस जब आंटी के माथे को चूमने लगा तो मैंने देखा उनकी आँखों से कुछ बूंदें गिर रही थी जी कुछ सेकंड पहले ही आई थी।

आंटी की यह हालत देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने एक हाथ आंटी की चूत पर रखा, दूसरा हाथ आंटी के सर के नीचे रखा और उनके होंठों को अपने होंठों में भर कर आंटी के होंठों को चूसते हुए उनकी चूत को रगड़ने लगा, आंटी भी मेरे चुम्बन का जवाब चुम्बन से ही दे रही थी।इस सबका नतीजा यह हुआ कि आंटी लगभग तुरंत ही झड़ गई और उनकी चूत के रस से मेरे हाथ की उंगलियाँ भीग गईं।

जब मैं आंटी के होंठों से अलग हुआ तो मैंने देखा कि उनके चहेरे पर एक अलग ही सुकून था।

कहानी अभी बाकी है !

तब तक आप अपनी राय मुझे भेजिए और अगले भाग का इन्तजार कीजिए।

मेरा फेसबुक पता है http://www.facebook.com/indore.sandeep13

This website is for sale. If you're interested, contact us. Email ID: [email protected]. Starting price: $2,000