भईया भाभी का साथ-5

कुछ ही देर बाद बाहर कमरे से आवाजें आने लगी- जोर से चोदो मेरे राजा, जरा जोर जोर चोदो !

मैं बाथरूम से बाहर निकली तो देखा कि अब भैया भाभी की चुदाई कर रहे थे। मैं उनके पास जा कर बैठ गई तो भाभी ने कहा- रोमा, कैसा लगा चुदाई करवा कर? कैसा चोदते हैं ये?

तो मैंने कहा- भाभी, मुझे तो बहुत मजा आया ! भैया बहुत मजेदार चुदाई करते हैं।

मैंने कहा- भाभी, आप बहुत लकी हो जो आपको इतनी अच्छी चुदाई करने वाला पति मिला है।

फिर भैया ने कहा- रोमा, मुझे भी तुमको चोद कर मजा आ गया !

भाभी कहने लगी- और चुदाई करवाना चाहोगी क्या रोमा?

मैंने हाँ कर दी। उस रात भैया ने भाभी और मेरी चार बार चुदाई की। इसी तरह चुदाई करते करते हमें 5 बज चुके थे और हम तीनों वैसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गये।

फिर सुबह 9 बजे के लगभग मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि भाभी बिस्तर पर नहीं थी और भैया मुझसे लिपटे हुए सो रहे थे।

मैंने भैया को अपने से दूर किया और अपने कपड़े ढूंढने लगी। मुझे मेरे कपड़े नहीं मिल रहे थे तो मैंने वहीं पर रखा भाभी का गाऊन ही पहन लिया और भाभी को आवाज लगाई- भाभी, कहाँ हैं आप?

तो भाभी की आवाज आई- रोमा, मैं किचन में हूँ।

मैं रसोई में गई तो देखा कि भाभी ने कोई भी कपड़ा नहीं पहना था, वो पूरी तरह नंगी थी। मैंने भाभी से कहा- भाभी, मुझे कमरे में मेरे कपड़े नहीं मिल रहे थे तो मैंने आपका यह गाउन पहन लिया।

फिर मैंने कहा- भाभी आपने कपड़े क्यूँ नहीं पहने?

तो भाभी के कहा- रोमा, अभी जब तुम्हारे भैया उठेंगे न, तो वो मेरी एक बार फिर से चुदाई करेंगे ! तो मुझे फिर कपड़े उतारने पड़ते ! इसलिए मैंने कपड़े पहने ही नहीं !

फिर भाभी ने कहा- रोमा तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाती हूँ !

मैंने कहा- हाँ ठीक है !

और मैं वही किचन में डायनिंग टेबल पर बैठ गई, फिर भाभी ने मुझे कॉफी बना कर दी और हम वहीं डायनिंग टेबल पर ही बैठ कर

बात करने लगे। भाभी मुझसे कहने लगी- रोमा, रात में कैसा लगा? सब ठीक रहा न ! तुम्हें अच्छा तो लगा न?

मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आया था !

तभी भैया की आवाज आई- पलक, कहाँ हो?

तो भाभी ने कहा- मैं यहाँ किचन में हूँ।

तब भैया रसोई में आए तो भैया ने भी कपड़े नहीं पहने थे, वो भी नंगे थे, मेरी नजर उनके लंड के तरफ गई जो छोटा सा सिकुड़ा हुआ नीचे लटक रहा था, उनके चलने से दाएं बाएं हिल भी रहा था।

भैया आकर डायनिंग टेबल की कुर्सी पर बैठ गए और कहा- पलक, चाय तो पिलाओ यार !

तो भाभी ने कहा- दूध तो खत्म हो गया है, मैंने और रोमा ने अभी अभी कॉफी पी ली है।

तब भैया भाभी पर गुस्सा करने लगे- तुम्हें पता है न कि मुझे सुबह सुबह चाय पीने की आदत है?

तो भाभी ने कहा- थोड़ी देर रुक जाओ ना, दूध वाला आता ही होगा, फिर बना दूंगी चाय, तब तक आप मेरा दूध पी लो !

और भाभी भैया की गोद में बैठ गई और अपने एक स्तन को भैया के मुँह में डाल दिया और कहने लगी कि इनमें बहुत सारा दूध भर गया है, तो ये भारी हो गए हैं, तुम ही दूध पीकर कुछ कम कर दो !

तब भैया भाभी के चूचे को चूस कर उससे दूध पीने लगे, भाभी उनके बालों में हाथ फिराते हुए उनके सिर को अपने वक्ष में दबाती जा रही थी।

अब भैया ने अपने एक हाथ से भाभी के दूसरे उभार को दबाते हुए हाथ को नीचे लाए और उनकी चूत पर रख कर चूत को सहलाने लगे। भाभी मस्त हुए जा रही थी। फिर भैया ने अपने हाथ की दो उंगलियाँ भाभी की चूत में डाल दी। तब भाभी के मुँह से एक जोर की आआहह्ह्ह निकली और फिर भैया उंगली को चूत में आगे-पीछे करने लगे और भाभी आहें भर रही थी।

फिर बाहर दरवाजे की घंटी बजी और आवाज आई- दूध वाला !

तो भाभी ने मुझसे कहा- रोमा जाओ जाकर दूध ले लो ! मैंने कपड़े नहीं पहने हैं और तुम्हारे भैया दूध पी रहे हैं तो मैं नहीं जा सकती,

तुमने कपड़े पहने हैं तो तुम जाकर दूध ले लो !

तो मैं उठ कर दूध लेने चली गई। मैंने दूध वाले से दूध लिया और रसोई में आकर दूध को गर्म करने के लिए गैस पर रख दिया।

तो फिर भाभी ने भैया को अपने से अलग किया और कहा- बस करो, कुछ दूध मिनी के लिए भी रहने दो। सारा दूध तुम ही पी लोगे तो मैं मिनी को क्या पिलाऊँगी, मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूँ, तुम चाय पी लो।

मिनी उनकी बेटी का नाम है।

और भाभी चाय बनाने लगी, तब उनकी बेटी की रोने की आवाज आने लगी तो भाभी ने मुझसे कहा- रोमा तुम चाय बना दो, मैं मिनी को दूध पिला कर आती हूँ, उसे भूख लगी होगी।

भाभी चली गई और मैं चाय बनाने लगी। मैं चाय बना रही थी कि भैया मेरे पास आए और मुझे पीछे से ही अपने आप से चिपका लिया और मेरी कमर में हाथ डाल कर मेरी गर्दन को चूमने लगे। मुझे उनका लंड मेरे नितम्बों के बीच की दरार में महसूस हो रहा था जो कुछ हद तक खड़ा हो चुका था पर पूरा खड़ा नहीं हुआ था।

वो एहसास मुझे बहुत अच्छा लग रहा था पर मैंने भैया से कहा- छोड़ो मुझे, अभी चाय तो बना लेने दो !

मैंने उन्हें चाय बना कर दी और वो डायनिंग टेबल पर बैठ कर चाय पीने लगे, फिर मैं नाश्ते की लिए ब्रेड पर जैम लगाने लगी, तभी भैया ने अपनी चाय खत्म की और फिर से आकर मुझ से चिपक गए, कहने लगे- रोमा, तुमने यह गाउन क्यूँ पहना है? देखो मैंने और पलक ने कपड़े नहीं पहने हैं तो तुम भी उतार दो इसे ! हम तीनों घर में अकेले हैं।

और भैया ने मेरा गाउन उतार दिया। भैया ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मुझे अपने सीने से लगा कर मेरे होंठों को चूमने लगे, मेरा हाथ उनकी पीठ से होता हुआ उनके नितम्बों पर आ गया और फिर मैं अपने हाथ को सामने लाकर उनके लंड को पकड़ कर सहलाने लगी।

भैया मेरे होटों को चूसे जा रहे थे और मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी। फिर मैं उनके होंठों को चूमते हुए उनकी छाती के निप्पल को चूमने लगी और धीरे धीरे नीचे आकर मैंने भैया के लंड को अपने मुँह में ले लिया।

कुछ देर मैंने भैया का लंड चूसा, फिर भैया ने मुझे उठाया और डायनिंग टेबल पर मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे पूरे शरीर को चूमने लगे, फिर उन्होंने मेरी चूत को डायनिंग टेबल के किनारे पर किया और खुद मेज से नीचे उतर कर मेरी चूत को चूसने लगे। भैया पूरे जोश में आ चुके थे, वो पागलों की तरह मेरी चूत को चूसे जा रहे थे, मैं आ आअह्ह अहह उइ उइ उइ करके सिसकारियाँ लेने लगी और कहने लगी- भैया, थोड़ा धीरे धीरे चूसिये, मुझे दर्द हो रहा है !

तो भैया कहने लगे- दर्द में तो मजा आयेगा रोमा मेरी जान !

फिर भाभी रसोई में आ गई, मैंने भाभी से कहा- भाभी, भैया को कहो न कि वो थोड़ा धीरे धीरे करें। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

भैया ने भाभी से कहा- पलक, जरा जैम की बोतल में से थोड़ा सा जैम तो निकाल कर दो, इस ब्रेड पर लगाना है !

फिर भैया ने मेरी चूत पर जैम लगा दिया और फिर से उसे चूसने लगे। उधर भाभी भी डायनिंग टेबल के नीचे घुटनों के बल बैठ कर

भैया का लंड चूसने लगी। काफी देर तक भैया मेरी चूत को चूसते रहे और भाभी भैया का लंड चूसती रही। मेरे मुँह से तो लगातार आआह्ह्ह ईइआअ आआअह्ह की सीत्कारें ही निकल रही थी।

भाभी ने लंड को जब अपने मुँह से बाहर निकाला तो भैया ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और भाभी से कहा- चलो डार्लिंग, बेडरूम में चलते हैं।

और हम तीनों बेडरूम में आ गये। भईया ने मुझे बेड पर लिटा दिया, भाभी भी बेड पर बैठ गई और भैया फिर से मेरी चूत को चाटने लगे। भाभी ने एक हाथ मेरे वक्ष पर रखा और दबाने लगी और दूसरे हाथ को उन्होंने मेरी चूत के पास लेजा कर चूत सहलाने लगी, भैया भी चूत को चुसे जा रहे थे। मेरी सिसकारियाँ और तेज हो गई, मुझे और मजा आने लगा था। मेरे मुँह से लगातार आ आह्ह्ह्ह्ह ओआअह्ह आआम्म म्मम्म की आवाजें निकल रही थी। अब भैया को चुदाई की जल्दी थी, उन्होंने चूत पर से मुँह हटाया और मेरे पैरों को फैला दिया। मैं उनके सामने अपनी चूत खोले लेटी हुई थी, भैया मेरे दोनों पैरों के बीच आकर बैठ गए और अपने लंड का सुपारा मेरी चूत पर लगा दिया, भाभी मेरे चूचे दबा रही थी और चूत को ऊपर से सहला रही थी, मैं तो पागल हुए जा रही थी और मचल रही थी। अब भैया ने लंड का सुपारा मेरी चूत पर टिका कर एक झटका मारा तो उनका लंड मेरी चूत में थोड़ा सा अन्दर चला गया और मेरे मुँह से एक जोर की चीख निकली।

भाभी कहने लगी- रोमा, मजा तो आ रहा है ना?

तब मैंने कहा- हाँ भाभी, बहुत मजा आ रहा है !

फिर भैया ने एक और जोर का झटका मार कर पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। भैया मेरी चुदाई करने लगे और भाभी जो मेरे बूब्स दबा रही थी, उन्होंने अब मेरे बूब्स को अपने मुँह में ले लिया और उनको चूसने लगी।

इधर भैया जोर जोर से धक्के लगा कर मेरी चुदाई कर रहे थे और मेरी आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। 5 मिनट की चुदाई के बाद भाभी अपनी चूत को हाथों से फैलाते हुए खड़ी हुई और चूत को भैया के मुँह पर लगा दिया।

मैं जान गई थी कि अब भाभी को भी लंड अपनी चूत के अन्दर लेना है। इस 5 मिनट तक हुई एकधार चुदाई से मैं थक चुकी थी और मेरा पानी भी निकल चुका था।

तो भैया ने लंड को मेरी चूत से बाहर निकाल कर भाभी को बेड पर लिटा दिया और एक झटके में ही उनका लंड भाभी की चूत में चल गया क्यूँकि यह लंड और चूत तो जोर के ही मित्र हैं। अब भैया भाभी को चोदने लगे और मैं भाभी की बगल में ही लेटी हुई थी तो मैंने भी भाभी के बूब्स को दबाना शुरु किया। उनके बूब्स बड़े थे, मैं बूब्स को दबा रही थी तो उनमें से दूध निकल रहा था।

भाभी ने कहा- रोमा, जोर से दबाओ इन्हें ! मुझे इनमें बहुत दर्द हो रहा है। तुम दबा रही हो तो मुझे अच्छा लग रहा है।

तो मैं भी उनके बूब्स को और जोर-जोर से दबाने लगी और भैया भाभी की जोरदार चुदाई कर रहे थे, भाभी की अब चीखें निकल रही थी, उनकी आवाजों से साफ पता चल रहा था कि वो अब क्लाइमेक्स के बिल्कुल करीब पहुँच चुकी हैं और उधर भैया की भी हालत खराब थी, उन्हें भी चरम सुख के समय किसी को जोर से भींचने की इच्छा हो रही थी तो उन्होंने मुझे पकड़ कर भाभी के बूब्स के ऊपर बैठा दिया, मेरे बाल पकड़ कर मुझे आगे झुका दिया और मेरे कूल्हे ऊँचे कर दिए। मेरी यह स्थिति बहुत ही उत्तेजक और शर्मनाक हो गयी थी पर मैं उन दोनों का चरम सुख बिगाड़ना नहीं चाहती थी इसलिए जैसे भैया ने चाहा, मैंने वैसे ही अपने चूतड़ उन्हें सौंप दिए।

भैया मेरे कूल्हों पर चांटे मारने लगे और उन्हें चूमने लगे।

फिर जब भैया और भाभी एक साथ डिस्चार्ज हुए तो भाभी ने मेरी चूत अपने मुँह में ले ली और भैया ने मेरे चूतड़ नौंच डाले और फिर हम तीनों ही एक दूसरे पर निढाल होकर पड़ गए और काफी देर तक ऐसे ही नंगे पड़े रहे।

वो पूरी रात और सुबह मेरे लिए कमाल सेक्स और क़यामत की रही, हम तीनों ने बेशर्मी की सारी सीमाएँ लांघ दी।

वो अनुभव आज यहाँ लिखते लिखते मैं फिर से उत्तेजित हो गई हूँ इसलिए अब इस उत्तेजक किस्से को यहीं समाप्त करती हूँ, इसके बाद क्या हुआ वो मैं आपको अगली कहानी में बताऊँगी।

तो यह थी दोस्तो, मेरी कहानी !

उम्मीद करती हूँ कि आपको पसंद आई होगी। आप लोगों को कैसी लगी, मुझे मेल करके बताइएगा जरूर !

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