बुआ का दूध और चूत

हैलो, मेरा नाम रोहित है। यह मेरी पहली प्रेम कहानी है, आशा है आपको अच्छी लगेगी।

बात उन दिनों की है, जब मैं नया नया जवान हुआ था और 12 वीं के इम्तिहान देकर छुट्टियाँ मना रहा था।

मेरे इम्तिहान से कुछ समय पहले सर्दियों में मेरी बुआ जी ने एक बच्चे को जन्म दिया था जिसकी मृत्यु जन्म से समय ही हो गई थी। तभी मेरी बुआजी के घर से फ़ोन आया कि फ़ूफ़ाजी कुछ समय के लिए बाहर जा रहे हैं, तो रोहित को यहाँ भेज दो।

मेरी बुआजी से काफी पटती थी। उन की उम्र 30 साल थी और 6 साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। देखने में वो बहुत सुन्दर थीं। मैं उन के घर जाने के नाम पर बहुत खुश था। बुआजी मुझे प्यार भी बहुत करती थीं।

मेरा मन उन दिनों कुछ अजीब सा रहता था और लंड भी खड़ा होने लगा था। एक-दो बार हस्तमैथुन भी किया था, लेकिन उसके बाद तो और अजीब लगता था। बुआजी के घर जाकर शायद मन कुछ ठीक हो जाए, ये सोच कर भी खुश था।

अगले ही दिन मैं बुआजी के पास पहुँच गया। वहाँ जाने पर बुआजी मुझ से बड़े प्यार से मिलीं। वो तो और भी सुन्दर लगने लगी थीं और बड़ी सेक्सी लग रही थीं। उनके मम्मे और कूल्हे तो बहुत ही मस्त लग रहे थे। उनको देख कर मुझे फिर अजीब सा लगने लगा और बदन में कुछ चीटियाँ सी चलने लगीं लेकिन बुआजी कुछ उदास लग रही थीं।

शाम को नाश्ता करने के बाद मैंने बुआजी से उसका कारण पूछा तो वो रोने लग गईं। यह देख कर मेरे भी आँसू निकल आए।

बुआजी ने मुझे प्यार से अपने गले लगा लिया और बोलीं- तू आ गया है न.. तो मेरी उदासी दूर हो जाएगी।

अगले दिन मैंने नोट किया कि 3-4 घण्टों बाद बुआ जी का ब्लाऊज गीला हो जाता था तो बाथरूम जाती थीं, मैंने पता लगाया कि बाथरूम में बुआ अपने मम्मे दबा कर के दूध निकालती थीं। वे काफी परेशान लग रही थीं।

2-3 दिन बाद उनकी एक सहेली आई, तो उसके साथ वो अपनी इस समस्या के बारे में बातचीत कर रही थीं कि हाथ से दूध निकालने में बड़ी दिक्कत होती है। मैं उनकी कुछ बातें सुन रहा था।

थोड़ी देर बाद उनकी सहेली ने मुझे बुलाया और कहा- रोहित तुम्हें पता है कि तुम्हारी आंटी परेशान हैं? “जी !” “क्या तुम एक मदद करोगे?” “क्या?” मैंने पूछा। “तुम्हारी बुआ का दूध बंद नहीं हो रहा और वो बड़ी तकलीफ में हैं। क्या तुम आंटी का दूध पी लोगे? उससे इसकी तकलीफ कुछ हद तक दूर हो जाएगी।”

यह सुन कर मेरा मन कुछ अजीब हो गया और मैं वहाँ से बिना कोई जवाब दिए दूसरे कमरे में आ गया।

थोड़ी देर में जब बुआजी की सहेली चली गईं, तो बुआजी मेरे पास आईं और कहने लगीं- सॉरी.

. पर प्लीज तुम यह बात किसी से कहना नहीं, मैं तकलीफ में हूँ इसलिए उसने ऐसा कहा। तब तक मैं भी कुछ सोचने लगा था।

मैंने कहा- नहीं बुआ.. ऐसा कुछ नहीं। मुझे तो यह बुरा लगा कि ये सब उन्होंने मुझसे कही.. जबकि आप खुद भी तो कह सकती थीं। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूँ। “सच?” “हाँ जी..”

यह सुन कर वो बहुत खुश हुईं, थोड़ी देर में वो फिर बाथरूम जाने लगीं, तो मैंने पूछा- कहाँ जा रही हो? तो वो कुछ नहीं बोलीं. मैंने कहा- बुआ मैं हेल्प करूँ क्या?

तो वो चुपचाप मेरे पास आ गईं और बोलीं- ये सब तेरे और मेरे बीच ही रहेगा.. प्रोमिस करो। मैंने बुआ का हाथ पकड़ कर कहा- कसम से।

बुआ ने अपना कुर्ता ऊपर करके ब्रा में से अपना उरोज निकाला.. हय, क्या मस्त था वो नज़ारा…! गोरा रंग, गुलाबी किशमिश, मैं उसे मुँह में लेकर चूसने लगा। बारी-बारी से मैंने दोनों मम्मों को चूसा, चूसते-चूसते मेरा लंड खड़ा होने लगा।

थोड़ी देर चुसवाने के बाद बुआ ने कहा- बस…! आज कितने दिनों बाद एक राहत सी मिली। मैंने कहा- बुआजी आप को कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा।

फिर बुआ घर के काम में लग गईं। रात को सोने से पहले बुआ ने फिर मुझे बुलाया। बुआ लेटी हुई थीं। मैं भी पास में ही लेट गया और बुआ ने अपना कुर्ता ऊपर करके ब्रा हटाई लेकिन इससे उनको थोड़ी तकलीफ होने लगी. मैंने कहा- बुआ, यह कुर्ता उतार दो ना! और मैं कुर्ता उतारने में बुआ की मदद करने लगा।

कुर्ता उतार कर मैंने कहा- बुआ इसे भी (ब्रा) उतार दो ना! बाद में पहन लेना। फिर बुआ ने ब्रा का हुक खोल कर वो भी उतार दी और मैं मस्त हो कर एक दूद्दू चूसने लगा और दूसरे मम्मे को हाथ में लेकर सहलाने लगा। ऐसे मैंने दोनों मम्मों को चूसा। चूसते हुए मेरा लंड बिल्कुल सख्त हो गया और बुआ की जाँघों से लगने लगा।

बुआ के मुँह से भी धीमी-धीमी ‘आहें’ निकल रही थीं। मैंने पूछा- क्या तकलीफ हो रही है? तो बुआ ने कहा- नहीं, आराम मिल रहा है। मैं काफी देर तक मम्मे चूसता रहा, बुआ ने भी मना नहीं किया।

मैंने महसूस किया कि बुआ की कैपरी गीली-गीली सी हो रही थी। मैंने पूछा- बुआ ये क्या हो रहा है? “मुझे ये अच्छा लग रहा है न ! इसलिए थोड़ा गीलापन आ गया है।” “ओह..!”

फिर बुआ ने मेरे शॉर्ट्स के ऊपर से मेरे लंड पर हाथ फेरा और बोलीं- पर तुझे क्या हुआ? मैंने कहा- पता नहीं बुआ.. जब भी मैं आप का दूध पीता हूँ तो ये हो जाता है। “क्या बुरा लगता है तुझे?” “नहीं बुआ.
. पर आप हाथ लगा रही हो.. तो बहुत अच्छा लग रहा है।” “अच्छा तो एक बार देखने दे मुझे !” बुआ ने कहा। “नहीं बुआ, शर्म आती है।” “अरे हम दोनों के बीच ही तो रहेगा ये सब..!” ये कह कर बुआ ने मेरा शॉर्ट्स उतार कर मेरा लंड निकाल कर अपने हाथ में ले लिया। “अरे, यह तो बहुत ही अच्छा है।”

मेरा लंड और कड़ा हो गया। मैं भी बुआ की टाँगों पर हाथ फेरने लगा। “बुआ तुम भी तो दिखाओ.. कहाँ से गीलापन आ रहा था।” मेरे ऐसा कहने पर बुआ ने अपनी कैपरी उतार दी।

वाओ.. ! बिल्कुल चिकनी चूत मेरी आँखों के सामने थी। मुझे ये सपना सा लग रहा था। बुआ ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखा। वो गीली और गर्म थी। बुआ ने पूछा- कैसा लग रहा है? “बहुत अच्छा।” “और मज़ा लेना चाहते हो?” “वो कैसे बुआ?” “ये जो तुम्हारा है न..! जब इस में जाएगा तो बहुत मज़ा आएगा।” “कैसे बुआ?”

मेरे ऐसे कहने पर बुआ ने मुझे अपने ऊपर आने को कहा और खुद टाँगें खोल कर लेट गईं। मेरे ऊपर लेटने पर…! आगे आप खुद समझ सकते हैं… आगे का हाल क्या हुआ होगा। आपके ईमेल के इन्तजार में आपका रोहित [email protected]

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