जीना इसी का नाम है-8

अनीता सेठ को नीचे छोड़ कर मुझे लेकर ऊपर के कमरे में आई, मुझसे कहा- तुम ऊपर ही रहना, मैं बुड्ढे को निपटाती हूँ। मैं ऊपर के कमरे में जाकर सो गया।

रात को करीब 12 बजे मुझे अनीता ने जगाया, मैं बोला- क्या हुआ?

अनीता ने जवाब दिया- साला बुड्ढा… ठीक से खड़ा भी नहीं होता है उसका, आग लगा कर सो गया है, अब तुम ही कुछ करो…

मुझे न चाहते हुए भी उसकी चुदाई करनी पड़ी।

इसके बाद अनीता बोली- मैं नीचे जा रही हूँ, सोना तो उसी के साथ पड़ेगा, 50 हजार जो लेना है।

इस घटना के बाद बड़े ऑफिसर, नेता, अमीर और रसूखदार लोग कभी कभी हमरे घर आने लगे, घर एक टॉप क्लास का रण्डीखाना बन गया। जब भी ऐसा कुछ होता मैं घर छोड़ कर कहीं लॉज में रात बिताता!

एक रात 8 बजे अनीता नशे में आई और कहा- सौरभ, आज रात मैंने रॉकी को बुलाया है, बहुत दिनों मुझे अच्छा सेक्स नहीं मिल पा रहा है। तुमने देखा है न उसका… ही इज़ अ गुड बॉय… डार्लिंग वो कैसे तेज शॉट मारता है, तुम भी उसकी बराबरी नहीं कर सकते हो, ही इस गुड फकर…

मैं गुस्से में बोला- अनीता, तुम भाड़ में जाओ, मैं जा रहा हूँ लॉज में सोने!

अनीता बेशर्मी से मुस्कुरा कर बोली- थैंक यू… तुम मेरे अच्छे पति हो।

मैं चला गया। अनीता के प्रति मेरी नफरत बढ़ती जा रही थी। इसके बाद एक घटना और हो गई जिसने मुझे हिला कर रख दिया। उस दिन शाम के 6 बजे मैं ऑफिस से आया, तभी एक गुंडे टाइप का नेता और उसका साथी मेरे घर आ टपके। दोनों नशे थे और गालियाँ दे रहे थे।

मुझे देख उसका साथी बोला- भाई ये है अनीता का आदमी!

वो गुंडा बोला- है तो लंड से मेरे… बहनचोद हफ्ते भर से झुला रही है। फिर मेरी तरफ देख कर बोला- क्यों रे, कब आयगी तेरी बीवी?

मैंने कहा- फोन करके पता करता हूँ।

‘जल्दी बुला उसको…’ फिर अपने साथी से बोला- छेनू क्वार्टर निकाल!

फिर मेरे से बोला- तू जा और पानी और नमकीन ले कर आ…

दोनों पीने लगे।

मुझसे बोला- तेरे को लेना हो तो बोल?

मैंने इन्कार में सर हिला दिया।

दोनों बात कर रहे थे… छेनू, इसकी बीवी जैसी रांड मैंने आज तक नहीं चोदी… साली क्या चिकनी है… मजा आ जाता है..

‘गुरु शहद लगा कर चुदाती है क्या?’

‘नहीं रे… पर चुदाते समय ऐसे नाटक करती है कि पहली बार मरवा रही है, और फिर ऐसे उचक उचक कर चुदाती है कि इससे बड़ी कोई चुदैल है ही नहीं.

.’

फिर मेरी तरफ देख कर बोला- ठीक है न, साले तेरे को तो महीने में एक दो बार ही मिलती होगी… साला… बाहर तो क्या मार्किट है इसकी बीबी की, लाइन लगी है सेठों की!

‘अरे हाँ गुरु, आजकल तो घर पर भी मरा लेती है, वो इन्कम टैक्स में साहब है न पाटिल साहेब, पिछले हफ्ते यहीं बजा कर गए हैं।’

‘अरे यार छेनू, मेरा लंड पानी छोड़ने पर आ गया और यह कुतिया कहाँ माँ चुदा रही है? फोन करके जल्दी बुला नहीं तो इसके आदमी की ही गांड मार लूँगा।’

मुझे बहुत गुस्सा आया पर वे खतरनाक लोग थे और ताकत में ज्यादा उनके पास चाकू और रिवाल्वर भी थे, मैं उनसे लड़ने की हालत में नहीं था। वो गन्दी गन्दी बात कर रहे थे- अगर आज इसकी बीवी नहीं आई तो उसकी चूत में चाकू फंसा दूँगा, साली पैसे ले लेती है और झटके मारती है।

उसका लंड काबू से सचमुच बाहर हो गया, उसने पैंट और अंडरवियर निकाल दिया, उसका काला लंड सामान्य साइज़ का था पर मोटा कुछ ज्यादा था, छेनू हँसते हँसते बोला- गुरु क्या कर रहे हो? क्या सचमुच इसकी गांड मारोगे?

वो बोला- हाँ! मेरी तरफ देख कर बोला- चल रे चिकने निकाल पैंट!

मेरी हालत ख़राब हो गई, मैं बोला- नहीं, मैं ऐसा नहीं हूँ।

तो वो बोला- चल मुठ मार मेरे लंड की।

मुझे उसका लंड हिलाना पड़ा। मैं सोच रहा था कि क्या जीना इसी का नाम है? इसके बाद मैंने अनीता को फोन करके यहाँ के हालत बताये, कुछ देर बाद अनीता वहाँ एक पुलिस ऑफिसर और चार सिपाही के साथ पहुँची, पुलिस को देखते ही दोनों हाथ पैर जोड़ने लगे, पुलिस वालों ने दोनों की जम कर धुलाई की, उनके हथियार छीन लिए, दोनों ने फिर इधर न आने की कसम खाई तब उन्हें छोड़ा।

सिपाही चले गए। अनीता ने उस ऑफिसर को रोक लिया और उसको ड्रिंक पेश की।

ऑफिसर बोला- मैडम, कोई भी काम हो, आप बस फोन कर देना।

इसके बाद मैंने अनीता के साथ रहना बंद कर दिया और वापस किराये के रूम में रहने लगा।

एक दिन सन्डे अनीता मेरे रूम पर आई और कहने लगी सौरभ तुम मुझे तलाक दे दो तो मैं तुम्हें वो मकान, 3 लाख के जेवर और 5 लाख नगद दे सकती हूँ।

मैंने कहा- ऐसा क्या हो गया जो तुम मुझे इतना सब दे रही हो?

अनीता बोली- सेठ धर्मचंद जैन मुझसे शादी करना चाहते हैं, इसके लिए तुम्हारे से तलाक लेना जरूरी है।

मैं समझ गया कि अनीता सेठ की पत्नी बन कर करोड़ों की जायजाद हथियाना चाहती है, मुझे भी उससे छुटकारा मिल रहा था, मैं मान गया, तलाक के कागज साइन करने के बाद कोर्ट ने हमें 6 महीने का नोटिस दिया इसके बाद हमारा तलाक हो गया। तलाक होते ही अनीता ने क़ानूनी रूप से सेठ धर्मचंद से शादी कर ली एक साल और सात महीने में अनीता से मेरी शादी और तलाक दोनों हो गए।

इस बीच कंपनी ने एक छोटे कसबे में नई यूनिट चालू की। पर जगह छोटी होने से कोई भी वहाँ जाने के लिए तैयार नहीं हो रहा था जबकि कम्पनी अच्छा पैसा दे रही थी। मैं मेरे बॉस भंडारी साहब से मिला और अच्छे पैसे और प्रमोशन लेकर नई जगह के लिए रवाना हो गया।

अनीता से मिले पैसे और जेवर दहेज मिली नगद रकम और मकान बेचने से आया पैसा, सब करके मेरे पास 70 लाख रुपये हो गए थे, मैंने इस कसबे में आकर शहर की अपेक्षा कम कीमत में एक काफी बड़ा प्लाट खरीद कर उस पर एक बंगला बना लिया और यहाँ खर्चे कम थे, सेलेरी अच्छी मिल रही थी, यहाँ शहर की भीड़ भाड़ और टेंशन नहीं थी, सबसे अच्छी बात यह थी कि यहाँ के लोग सीधे सादे थे और मुझे सम्मान देते थे। अनीता के साथ बिताई जिंदगी मैं एक बुरे सपने की तरह भूल गया। कहानी जारी रहेगी।

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