मन्त्र-जाल से चाची सास को चोदा-6

मैं खड़े होकर उनके चेहरे को चूसने लगा फिर उनके होंठों को छोड़ कर पूरे चेहरे से मांड निकाल लिया।

अब वो भी जानती थीं कि मैं कौन सी जगह से मांड निकालने वाला हूँ।

मैंने जैसे ही उनके होंठ से मेरे होंठ को लगाया तो सासूजी ने संतुलन खोने का नाटक करते हुए मेरे दोनों हाथों को पकड़ लिया।

फिर क्या था.. मैंने भी अपना एक हाथ उनके सर के पीछे ले जाकर उनके बालों को पकड़ कर उनके होंठ चूसने लगा। मैं अपनी पूरी जीभ उनके मुँह में डाल कर उनकी जीभ को टटोल रहा था और सासूजी भी इतनी मदहोश हो चुकी थीं कि वो भी मेरी जीभ को अपनी जीभ से टटोल रही थीं।

करीब 5 मिनट तक मैं उन्हें मांड निकालने के बहाने उनको चूमता रहा।

फिर मैं उनसे दूर हटने जा रहा था लेकिन वो इतनी कामुक और अधीर हो गई थीं कि मेरे हाथ नहीं छोड़ रही थीं।

फिर भी मैं उनसे दूर हो गया.. अब मेरी भी हिम्मत खुल चुकी थी और मैं जान चुका था कि आज सासूजी को चोदने का मेरा ख्वाब जरूर पूरा होगा।

फिर मैं उनके दोनों पैरों के सामने घुटनों के बल बैठा और मैंने उनकी दोनों टाँगों को पकड़ कर थोड़ा फैलाया.. जिसकी वजह से उनकी रसीली चूत के दर्शन हुए। अब धीरे से मैंने अपनी जीभ उनकी चूत पर रखी.. उनका पूरा शरीर काँप रहा था और वो अति चुदासी हो कर सिसकियां भर रही थीं।

तब मैंने अपनी पूरी जीभ उनकी चूत में डाल दी.. सासूजी के मुँह से, “उफ.. हाय..ईई.. उंम्माआआह.. हय.. उई.. हे..भगवानन्.. क्या.. मस्त विधिईईईई.. है.. मेरीइईई.. हालतत्त.. बुरीईई हो रहिईईईई है..ईए..”

मैं पूरी तरह से उनकी चूत को चाट कर खड़ा हो गया।

मैंने देखा तो उनकी चूत से अब भी पानी निकल रहा था.. वो झड़ चुकी थीं..।

फिर वो लड़खड़ाते हुए कदमों से बाथरूम में गईं और दूसरी ब्रा और पैन्टी पहन कर आ गईं..।

उनके चेहरे से लग रहा था कि वो मुझसे ये कह रही हों कि इतना कुछ होने के बाद भी मैंने क्यों उन्हें चोदे बिना छोड़ दिया।

आप लोग भी शायद यही सोचते होंगे..

लेकिन दोस्तों मुझे भी अपना लण्ड उन्हें चुसवाना था.. इसलिए जब वो आईं तो मैंने उन्हें कहा- आप थोड़ी देर अन्दर रुकी रहें.. मैं ये मलाई के डिब्बे से अपने शरीर पर मलाई लगा लूँ..।

तब वो मुस्कुराती हुई अन्दर चली गईं।

फिर मैं पूरी तरह से नंगा हुआ और मलाई मेरे चेहरे पर और लण्ड पर लगा कर उन्हें आवाज़ दी, “अब आप आ जाइए.

.”

वो आकर थोड़ी शरमाते हुए बोलीं- आपने अपने पूरे शरीर पर मलाई नहीं लगाई..?

तब मैंने कहा- शरीर के जो भाग में बाल हैं.. वहाँ मलाई नहीं लगानी है।

तब उन्होंने तिरछी नज़र से मेरे खड़े लण्ड की ओर देखा कि मैंने वहाँ मलाई लगाई है कि नहीं.. लेकिन मैं पहले ही अपने लौड़े के पूरे बाल साफ़ कर चुका था। वहाँ कोई बाल ना होने की वजह से मैंने सबसे ज़्यादा मलाई मेरे लण्ड पर ही लगा रखी थी। जिसकी वजह से वो मेरा लण्ड पूरी तरह से देख नहीं पा रही थीं।

थोड़ी देर हम दोनों चुपचाप खड़े रहे.. फिर मैंने चुप्पी तोड़ी और बोला- विधि को आगे बढ़ाया जाए..?

तब उनके चेहरे पर एक अद्भुत चुदास की चमक आ गई और बोलीं- मुझे शर्म आ रही है.. इसलिए आप अपनी आँखों पर पट्टी बाँध लीजिए और दीवार के सहारे से खड़े हो जाइए।

मैं उसकी बात सुनकर सोचने लगा कि विधि मैं करवा रहा हूँ या वो..

फिर मैंने अपनी आँख पर पट्टी लगाई और दीवार का सहारा लेकर खड़ा हो गया।

इन सब बातों से मेरा लण्ड किसी रॉड की तरह खड़ा हो गया था।

फिर सासूजी मेरे पास आईं और मेरे सर को जीभ से चाटने लगीं।

दोस्तों क्या बताऊँ.. मेरा तो हाल बेहाल हो गया था।

फिर सासूजी ने मेरे पूरे चेहरे को अपनी कोमल जीभ से साफ़ कर दिया.. इसके बाद सासूजी ने अपने कोमल होंठों को मेरे होंठों पर रखे और चूसने लगीं।

वो मेरे होंठों को ऐसे चूस और चाट रही थीं.. जैसे कि आइसक्रीम चाट रही हों..।

फिर सासूजी ने मेरी ओर देखा कि मैं कहीं से देख तो नहीं रहा हूँ ना.. क्योंकि हम-दोनों जानते थे कि आगे क्या होने वाला है।

फिर वो मेरे सामने आकर घुटनों के बल बैठ गईं और अब कांपने की बारी मेरी थी।

मैंने अपने आप पर संयम रखा और चुपचाप खड़ा रहा।

फिर वे अपनी कोमल मक्खन जैसी जीभ को मेरे लण्ड के पास लाईं और मेरे लण्ड पर जीभ फिराते हुए उसको अपने मुँह में ले लिया.. लेकिन लण्ड की साइज़ बड़ी होने की वजह से मेरा पूरा लण्ड उनके मुँह में समा नहीं रहा था।

लेकिन वो इतनी कामुक हो गई थीं कि मेरे लण्ड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं।

फिर लण्ड को बाहर निकल कर बाकी के आधे लण्ड को अपनी जीभ से चाट कर पूरा लण्ड साफ़ कर दिया।

मैं आँख पर लगाई हुई पट्टी के नीचे से सब कुछ देख रहा था।

वो उन्हें पता नहीं था.
.

जब मैंने देखा कि लण्ड पूरी तरह से साफ़ हो चुका है.. तब मैंने कहा- हो गया ?

तब वो बोलीं- अभी थोड़ा सा बाकी है..

मैं समझ गया कि सासूजी मेरे लण्ड को और चूसना चाहती थीं। ये सोच कर मेरा लण्ड और फड़फड़ाने लगा और झटके मारने लगा।

मुझे महसूस हो रहा था कि अगर सासूजी जल्द से लण्ड को अपने मुँह में नहीं लेगीं.. तो शायद बाहर ही लण्ड से पानी का फुव्वारा छूट जाएगा।

फिर सासूजी ने मेरे दोनों पैरों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मेरा लण्ड अपने मुँह में भर लिया।

मुझे महसूस हो रहा था कि वो मेरे लण्ड के सुपारे पर अपनी जीभ घुमा रही हैं और मेरा लण्ड भी उनके मुँह में झटके मार रहा था।

अब मुझसे और कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए करीब 10 मिनट के बाद.. जैसे पिस्टल से बुलेट छूटती है.. ठीक उसी रफ़्तार से मैंने उनके मुँह में लण्ड से पानी छोड़ा..

आह्ह.. और ये मैं क्या महसूस कर रहा हूँ.. मुझे ऐसा लगा था कि लण्ड से निकला सारा पानी.. सासूजी बाहर निकाल देंगी.. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. सासूजी ने लण्ड से निकला सारा पानी मिल्क-शेक की तरह पी लिया।

अब मैं भी पानी छूटने की वजह से थोड़ा ठंडा हुआ.. तो अचानक मेरे मुँह से निकल गया- अब विधि सम्पन्न हुई।

मैं अपनी आँख पर लगी पट्टी को हटा कर स्नान करने चला गया।

जब वापिस आया तो मैंने सासूजी का मायूस सा चेहरा देखा। वो कुछ सोच रही थीं और मैं जानता था कि वो क्यों मायूस थीं और क्या सोच रही थीं।

क्योंकि मेरे मुँह से विधि सम्पन्न हुई.. ये बात सुनकर सासूजी का मुझसे चुदवाने का ख्वाब.. बस ख्वाब ही रह गया था।

मैं भी मन ही मन यही सोच रहा था कि ये मेरे मुँह से क्या निकल गया.. लेकिन दोस्तों मैं यही चाहता था कि सासूजी यही समझें कि ये सब मैंने सिर्फ़ ज्योति की भलाई के लिए किया है।

अब मैं बस यही चाहता था कि सासूजी खुद अपने मुँह से मुझसे चुदवाने के लिए मुझसे कहें और मुझे पक्का यकीन था कि वो ऐसा कहेंगी।

तीन दिन बाद मेरी छुट्टियाँ पूरी हुईं और मैंने जॉब ज्वाइन कर ली।

अब तो सासूजी भी मुझसे फ्री होकर बातें करने लगी थीं। शाम को जब मैं घर आया तो सासूजी ने मेरे लिए चाय बनाई और हम दोनों चाय पीने लगे।

चाय पीते-पीते सासूजी ने मुझसे कहा- आपने जो विधि की.. उसकी वजह से मुझे पूरा यकीन है कि अब ज्योति के ससुराल वाले उसे यहाँ से ले जाएंगे.
. क्योंकि आज उनकी सास का फोन आया था और अगले हफ्ते उसे ले जाने की बात कर रही थीं, लेकिन…

“लेकिन” कह कर सासूजी चुप हो गईं.. तब मैंने कहा- लेकिन क्या..?आपको जो भी कहना है बेहिचक कह सकती हो..।

तब सासूजी थोड़ा शर्मा कर बोलीं- मुझे जानना है कि ऐसी कोई विधि है कि जो करने से ज्योति और उसके पति और पास आएं और जल्द से जल्द ज्योति माँ बन जाए.. अगर उसे बच्चा हो जाएगा तो उन दोनों के बीच मन-मुटाव नहीं होंगे और उनके ससुराल वाले भी ज्योति से खुश रहेंगे।

मैं समझ गया कि सासूजी क्या कहना चाहती हैं.. वो मुझसे चुदवाने के लिए बेताब हो चुकी थीं और मुझसे विधि के नाम पर चुदवाना चाहती हैं।

लेकिन मेरे मुँह से सुनना चाहती थीं.. इसलिए मैंने कुछ देर सोचने का नाटक किया और बोला- सासूजी विधि तो है.. लेकिन बहुत कठिन है.. शायद आपसे नहीं हो पाएगा..।

तब सासूजी बोलीं- कितनी भी “कठिन” विधि क्यों ना हो… मैं ‘करवाने’ के लिए तैयार हूँ.. आप बताइए तो सही..

तब मैंने सासूजी को कहा- ये विधि सिर्फ़ पति-पत्नी या औरत-मर्द साथ में मिलकर ही कर सकते हैं।

तब वो बोलीं- यह तो सचमुच कठिन है क्योंकि ज्योति के पापा तो नहीं रहे और आप तो जानते हैं कि मेरा कोई देवर भी नहीं है.. जिनके साथ मिलकर विधि की जाए..।

वो अपना चुदास भरा चेहरा गंभीर बनाने का नाटक करते हुए कुछ सोचने लगीं।

तब मुझे लगा कि शायद मेरा प्लान फेल हो जाएगा.. तभी वो अचानक बोलीं-

दामाद जी.. आपने कहा ना कि औरत-मर्द साथ मिलकर भी विधि कर सकते हैं

मैंने सर को ‘हाँ’ में हिलाया।

तो वे अपने चेहरे पर शर्म के भाव लाते हुए बोलीं- क्या आप और मैं मिलकर ये विधि नहीं कर सकते..?

आज कहानी को इधर ही विराम दे रहा हूँ। आपकी मदभरी टिप्पणियों के लिए उत्सुक हूँ। मेरी ईमेल पर आपके विचारों का स्वागत है। राज हॉट [email protected]

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