भाई के दोस्तों ने मुझे रण्डी बनाया -1

हैलो दोस्तो.. मैं आपकी अपनी ज्योति.. जिसको भाई के दोस्त दीपक ने चूत चोद कर कली से फ़ूल बनाया था।

आप सबने मेरी कहानी भाई के दोस्त ने सील तोड़ दी पढ़ी थी। जिन्होंने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है वो प्लीज़ पहले उसको पढ़ लें.. क्योंकि भाई के दोस्त ने मेरी सील तोड़ दी.. के आगे की इस कहानी का पूरा मजा तभी आ पाएगा।

इस कहानी के बाद मुझे बहुत सारे ईमेल भी आए। आप सबके प्यार की वजह से मैं आपको बताना चाहती हूँ कि आगे मेरे साथ क्या हुआ और किस-किस ने मुझे चोदा।

आई लव यू ऑल फ्रेण्डस.. जिन्होंने मेरी कहानी पढ़ कर मुझे ईमेल किया। तो सुनिए आगे की कहानी..

तो उस दिन दीपक और भाई के घर से जाने के बाद मैंने अपना खून साफ़ किया और फ्रेश होकर घर का काम खत्म किया। जब तक दिन का एक बज चुका था। मैंने खाना बनाने की तैयारी की और जैसे ही खाना बनाने के लिए रसोई में गई.. तब तक डोर बेल बज उठी।

मैंने दरवाजा खोला तो बाहर भाई और भाई के 3 दोस्त उनके साथ में खड़े हुए थे। जिसमें दीपक भी साथ था.. जिसने आज सुबह मेरी चूत का मुँह चौड़ा कर दिया था।

दरवाजा खोलने के बाद सब लोग अन्दर आए और मैंने सबको ‘भैया नमस्ते कहा’.. सब अन्दर आ कर बैठने लगे। अंत में दीपक अन्दर आया और अन्दर आते टाइम दीपक ने मेरे चूतड़ पर चुटकी काट दी और मेरी तरफ़ देख कर स्माइल देने लगा। मैंने भी जबाव में स्माइल पास कर दी। सब लोग कमरे में चले गए थे।

कमरे में जाने के बाद मैंने फ़्रिज़ से पानी निकाला और सबको दिया। तब भाई ने मुझसे कहा- खाना मत बनाना.. हम साथ लेकर आए हैं.. आज आर्यन का बर्थडे है। तो पार्टी मनाएँगे। आर्यन भाई का दोस्त था.. तो मैं भी खुश हो गई कि खाना बनाने से तो बची।

तब भाई ने मुझसे कहा- हमें 4 गिलास और प्लेट दे दो। मैंने उनको गिलास और प्लेट दी.. वो सब लेकर भाई ने मुझसे कहा- तुम अपने लिए खाना निकाल लो।

मैंने अपने लिए खाना निकालते टाइम देखा कि साइड वाले बैग में शराब की बोतल भी रखी हुई है। मैं समझ गई कि आज मेरे साथ कुछ तो पक्का होगा। मैंने चुपचाप खाना निकाला और रसोई में रखने के लिए चली गई।

तब भाई और भाई के दोस्त अपने काम में लग गए। सबने अपने-अपने पैग बनाए और पीने लगे। मैं दूसरे कमरे में जाकर बैठ गई और फटाफट से मैंने कपड़े बदली किए। मैंने सलवार सूट की जगह एक स्कर्ट और टॉप पहन लिया.

. जिसके नीचे मैंने जानबूझ कर ब्रा और पैन्टी नहीं पहनी।

मैंने अपना खाना खत्म किया और रसोई में जाकर बर्तन साफ़ करने लगी। जब बर्तन साफ़ करके मैं रखने लगी.. तभी पीछे से दीपक आया और मुझे पीछे से पकड़ कर मेरी चूचियाँ दबाने लगा। मैं भी चुपचाप चूचियाँ दबवाने लगी। कुछ मिनट तक मेरी चूचियाँ दबाने के बाद दीपक ने धीरे से मेरे कान में कहा- आज तुझे रंडी बनाऊँगा.. तू तैयार रहियो। वो यह कह कर वापस कमरे में चला गया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैं भी सोच कर उत्तेजित हो रही थी कि आज दीपक ऐसा क्या करने वाला है। मैं दूसरे में कमरे जाकर लेट गई, सोचते-सोचते मेरी आँख कब लग गई.. पता ही नहीं चला। कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी स्कर्ट में हाथ डालने की कोशिश कर रहा है।

मैंने एकदम से आँख खोली तो सामने दीपक को पाया। फिर मैंने घड़ी की तरफ़ देखा तो 6 बज रहे थे। मैं जल्दी से उठ कर बैठ गई और दीपक से पूछा- सब लोग कहाँ है..? तो दीपक ने कहा- सब छत पर हैं। इतना कहते ही दीपक ने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरे मुँह में दे दिया।

मैं कुछ बोल ही नहीं सकी। लगभग दस सेकंड तक उसने अपना लण्ड मेरे मुँह में ही घुसेड़े रखा, उसके बाद लण्ड बाहर निकाल कर हँसने लगा, वो दुबारा बोला- आज तुझे रंडी बनाऊँगा.. फिर वापस चला गया।

मैं उठी और दूसरे कमरे में गई.. तो देखा सब कुछ बिखरा पड़ा है.. और सब छत पर गए हुए हैं। मैंने वहाँ साफ़-सफाई की.. और टीवी देखने लगी। करीब एक घंटे बाद 8 बजे के आस-पास सब नीचे आए और भाई ने मुझसे कहा- खाना मत बनाना.. बाहर से लेकर आ जाएँगे।

तब मैं समझ गई कि आज पूरी रात पार्टी का प्लान है.. तब मुझे पक्का यकीन हो गया कि आज तो मेरी चुदाई पक्का होनी ही है.. वो भी जी भर के..

सब बाहर चले गए और मैंने गेट बंद कर लिया। तब मेरे मोबाइल में मैसेज आया.. तो मैंने देखा अननोन नम्बर से मैसेज था.. उसमें लिखा हुआ था- आज रात के लिए रेडी हो जइयो.. तुझे रंडी बनाएँगे.. मुझे समझते देर ना लगी कि यह मैसेज दीपक का है.. पर मैं ये सोचने लगी कि कौन-कौन मुझे चोदेगा और कैसे-कैसे?

मैंने ये सोचते-सोचते पता ही नहीं चला.. कि कब मैंने ‘ओके’ लिख कर.. मैंने जबाव मैसेज सेंड कर दिया। उसके बाद दीपक का दुबारा मैसेज आया- आई लव यू रंडी.. तब मैं पक्का समझ गई कि आज मैं मरी..

करीब एक घंटे बाद सब आ गए और मैंने दरवाजा खोला.
. फिर अपना खाना अलग निकाल लिया। मैंने देखा कि बैग में अब शराब की 3 बोतलें और रखी हुई हैं। मैं दूसरे कमरे में चली गई और उन्होंने अपना पीने का प्रोग्राम चालू किया। लगभग 5 मिनट बाद भाई दूसरे कमरे में आया और कहने लगा- दरवाजा बंद करके सो जा.. हम सब दूसरे कमरे में हैं। मैंने कहा- ओके भैया।

फिर भाई दूसरे कमरे में चला गया और मैंने कमरे का गेट बंद कर लिया.. पर उसमें कुण्डी नहीं लगाई और मेरे कमरे में एक गेट है.. जो दूसरे कमरे में खुलता है.. वो हमेशा बंद ही रहता था.. पर उस दिन मैंने जानबूझ कर थोड़ा खुला छोड़ दिया.. ताकि मैं देख सकूँ कि भाई वाले कमरे में क्या हो रहा है।

मैंने गेट के पास में कुर्सी डाल ली और वहाँ छुप कर देखने लगी कि क्या हो रहा है। सबने कपड़े निकाले हुए थे और सबका मुँह टीवी की तरफ़ था। मतलब मुझे उनकी पीठ दिख रही थी। मुझे टीवी साफ़ दिख रहा था। सबने अपनी शर्ट पैन्ट निकाली हुई थीं और सब केवल अंडरवियर में थे।

दीपक ने कहा- मैं सीडी प्ले करता हूँ। तो भाई ने कहा- रुक जा.. ज्योति अभी सोई नहीं होगी.. थोड़ी देर बाद चलाएँगे.. तब तक बोतल तो फिनिश कर ले। सब मान गए और दस मिनट बाद भाई ने कहा- मैं देख कर आता हूँ.. वो सो गई क्या..

जैसे ही भाई मेरे कमरे की तरफ़ आए.. मैं बिस्तर पर जाकर लेट गई और सोने की एक्टिंग करने लगी। भाई ने दरवाजे के बाहर से मुझे 2-3 आवाजें लगाईं और मैं कुछ नहीं बोली। भाई को लगा कि मैं सो गई हूँ और भाई वापस चला गया, वो कमरे में जाकर बैठ गया।

मैं भी बिस्तर से खड़ी हुई और अपनी जगह वापस पहुँच कर देखने लगी। तो दीपक ने सीडी ऑन की, उस सीडी में एक इंडियन लड़की 3 लड़कों से चुद रही थी। मैं भी फिल्म देख कर गर्म हो गई थी, मैं अपनी चूत को सहलाने लगी।

अभी 10 मिनट ही हुए देखते-देखते.. तभी दीपक ने कहा- यार दूसरी बोतल खोलो.. सब पीने लगे.. मैंने गौर से देखा कि सबसे ज़्यादा ड्रिंक भाई को पिलाई जा रही थी, सबने ड्रिंक फिनिश की और सिगरेट पीने लगे। तभी आर्यन ने कहा- यार सिगरेट खत्म हो गई.. अब क्या करें.. तो भाई ने कहा- चल और ले आते हैं। फिर दीपक ने कहा- अब कहाँ दुकान खुली होगी? तो भाई ने कहा- वसंत विहार में तो 24 घन्टे दुकानें खुली होती हैं। तब दीपक ने कहा- मेरा तो कहीं जाने का मन नहीं कर रहा.. मुझे ज़्यादा चढ़ गई है।

इस बात पर सब हँसने लगे और भाई ने कहा- बाइक से चलते हैं.
. पर किसी के पास लाइसेन्स नहीं है.. और 2 बजे हर जगह चैक पोस्ट लगा होगा। तब दीपक ने भाई से कहा- तेरे पास लाइसेन्स है.. तू चला जा। तो भाई ने कहा- ओके.. मैं जाकर लाता हूँ.. तब तक तुम एंजाय करो।

भाई ने कपड़े पहने और आर्यन को साथ में लिया, वे दोनों चले गए। बाद में दीपक और उसके 2 फ्रेण्ड घर में बचे थे। भाई के जाते ही दीपक मेरे कमरे में आया। मैं उसे आता देख कर जल्दी से जाकर बिस्तर पर उल्टी होकर लेट गई। दीपक ने आते है मेरी स्कर्ट मेरी गाण्ड से ऊपर उठा दी और अपना लण्ड मेरे चूतड़ों के बीच रख दिया। दीपक को लगा कि मैं सो रही हूँ तो उसने मेरी टांगें खोलीं और टांगों के बीच में बैठ गया।

दोस्तो.. अब आप समझ ही गए होंगे कि मेरी पोज़िशन क्या थी। मेरी चूत तो ब्ल्यू फ़िल्म देख कर पूरी ही गीली हो चुकी थी। दीपक ने मेरे पैरों के बीच में बैठ कर अपना लण्ड मेरी चूत के मुँह पर रखा और एक ही झटके में आधा लण्ड चूत में डाल दिया। मेरे मुँह से ‘आईईई ईईई..’ निकल गई।

दीपक ने कहा- क्यों क्या हुआ रंडी.. अभी तो आधा लण्ड बाकी है। यह कह कर एक झटका और लगाया और अपने हाथ मेरी चूचियाँ पर लेजा कर मुझे गोद में उठा लिया। अब वो उठ कर दूसरे कमरे में जाने लगा। मेरी हालत आप समझ ही गए होंगे कि मैं कैसे उसकी गोद में थी और उसका लण्ड मेरी चूत में घुसा हुआ था।

दूसरे कमरे में आने के बाद मैंने देखा कि 3 लोग और बैठे हैं। वो भी बिल्कुल नंगे थे। मुझे समझते देर ना लगी कि आज पक्का मेरी चुदाई 4 लौड़ों से होने वाली है।

दोस्तो, मेरी रस भरी चूत के मजे ले लिए हों तो लौड़ा हिलाना छोड़ कर मुझे ईमेल ही लिख दो.. आपके लौड़े को मेरा प्यार भरा चुम्मा- ऊम्म्ह्हाह्ह..

कहानी जारी है। [email protected]

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