Party Me Buddhon Ne Mera Band Bajaya

हैलो दोस्तो, मैं अर्शदीप कौर उर्फ चुद्दकड़ अर्श फिर से अपनी चुदाई की कहानी लेकर आपकी कचहरी में हाजिर हुई हूं। सब को मेरी तरफ से चूत एवं गांड फैला कर और नंगे बूब्ज़ हिलाते हुए प्रणाम। मेरे चाहने वालों के लंड अपने मुंह, गांड एवं चूत में लेकर और बड़े-बड़े बूब्ज़ मसलाते हुए एवं लंबे मोटे लंडों पर अपनी मोटी गांड उछालते हुए ढेर सारा प्यार। ये कहानी नए साल की पार्टी में तीन बूढ़ों के द्वारा मेरा बैंड बजाने की है और मैंने अपने बज रहे बैंड की धुनों पर खूब डांस किया।

ये बात 2016 साल की आखरी रात की बात है। हम दोस्तों ने नए साल कई पार्टी होटल में मनाने की सोची। हम चार सहेलियों ने घर पर झूठ बोला कि किसी सहेली के घर जा रही हैं और वहीं पार्टी करेंगी। हम सब लड़कियां होटल में आ गईं।

हम घर से तो सिंपल कपड़े पहन कर आईं थीं लेकिन होटल में पहुंच कर हमने सेक्सी कपड़े पहन लिए। सब लोग हमें डांसर समझ रहे थे। मैंने नीली शार्ट स्कर्ट, टाईप गुलाबी टॉप, गुलाबी हाई हील के सैंडिल पहने हुए थे और नीचे से नीले रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। हम सब सहेलियों ने जम कर शराब पी और डांस फलोर पर डांस करने लगीं। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है..

तभी डीजे पर चिकनी चमेली गाना चलने लगा और हम सब सिगरेट फूंकते हुए गांड हिलाते हुए डांस करने लगीं। अचानक कुछ लड़के हमारे साथ डांस फलोर पर आ कर डांस करने लगे। एक एक सहेली के साथ तीन तीन चार चार लड़के डांस करने लगे और वो भी शराबी थे।

कुछ देर बाद वो लड़के हमारे बदन को छूकर डांस करने लगे। वो लड़के हमारे बूब्ज़ एवं गांड को छूते और अपने खड़े लंड हमारी गांड पर रगड़ जाते। कुछ देर बाद फलोर पर हमारे साथ चार लड़के रह गए। हमने एक एक लड़का चुन लिया और डांस करने लगीं। मेरी तीनों सहेलियां बारी बारी से अपने चुने हुए लड़के से चुदने केलिए निकल गईं।

लेकिन जिसके साथ मैं डांस कर रही थी वो चुतिया निकला और मुझे गर्म करके बिना चोदे होटल से निकल गया। मैं डांस करते-करते कोई लड़का देखने लगी जो मुझे चोद कर मेरी नए साल की पार्टी रंगीन कर सके लेकिन वहां सब मर्द अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड के साथ थे। वो मेरे बदन को निहार रहे थे लेकिन चोदने नहीं आ सकते थे। मुझे उस लड़के पर बहुत गुस्सा आ रहा था कि मुझे बिना चोदे चला गया और मैं उसको मन में गालियां दे रही थी।

मैं वहां से अपने बुक किए हुए कैबिन में आ गई और शराब पीने लगी। मुझे साथ वाले कैबिन से कुछ आवाजें सुनाई दीं। मैंने पतली सी लकड़ी की दीवार से कान लगाकर सुना। वो लोग किसी रंडी की बात कर रहे थे। वो लोग बोल रहे थे साली ने खड़े लंड पर डंडा मार दिया, साली ने बिल्कुल मौके पर बहाना बना दिया और अब किसी और का जुगाड़ भी नहीं होगा।

मुझे ये भी सुनाई दिया कि उन लोगों ने सेक्स की गोलियां खा रखी हैं और लंड बैठ नहीं रहा। तभी एक बोला कि अगर उसको चूत नहीं मिली तो उसका सिर फट जाएगा और सब ने हां में हां मिलाते हुए कहा बाकी का भी वही हाल है। एक ने किसी को फोन किया और बाकी से कहा ये भी किसी के साथ गई हुई है अब तो अपना हाथ जगन्नाथ।

मुझे मालूम हो गया कि वो लोग चुदाई की आग में जल रहे हैं और मुझे भी चुदाई की आग लगी हुई थी। मुझे यकीन हो गया कि अगर मैं उनके सामने चली गई तो वो लोग मुझे चोद ही देंगें। मैं अपने कैबिन से निकली और मोबाईल में देखते-देखते उनके कैबिन में घुस गई। कुछ आगे जाकर मैंने देखा, वहां 55-60 साल के तीन बूढ़े बैठे थे।

उन सब के बाल सफेद थे और क्लीन शेव थे। सब के सब थोडे़ मोटे थे। मुझे अचानक अपने कैबिन में देखकर वो मेरी तरफ सवालिया नज़रों से देखने लगे। मैंने अनजान बनते हुए कहा सॉरी अंकल मैं गलती से आ गई, मेरे दोस्तों ने बोला था ये कैबिन बुक किया है। शायद किसी और होटल में होगा और मेरा मोबाईल भी नहीं उठा रहे। मैं बाहर जाने लगी तो उनमें से एक बोला अब तुम क्या करोगी बेटी। मैंने जवाब दिया यहां देखती हूं नहीं तो घर चली जाऊंगी।

एक ने मुझे कहा ऐसे किसी कैबिन में मत जाना बेटी, क्या मालूम अंदर कौन होगा शर कोई गलत आदमी भी हो सकता है। एक ने मुझ से पूछा क्या मैंने खाना खा लिया और मैंने न बोल दिया। तीनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और कहा अगर तुम्हारे दोस्त नहीं मिल रहे तो यहां बैठ जाओ क्या मालूम कोई फोन कर ले। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

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मैंने उनसे पूछा आपको कोई ऐतराज तो नहीं तो उन्होंने मुझे बैठने को बोला। मैं उनके साथ खाली कुर्सी पर बैठ गई। वो तीनों मुझसे बातें करने लगे और एक-दूसरे को देखकर स्माईल दे रहे थे। मैंने अपना सैंडिल ठीक करने के बहाने टेबल के नीचे से देखा सब अपना अपना लंड सहला रहे थे और मैं ठीक होकर बैठ गई।

एक बूढ़े ने मुझसे पूछा क्या वो मेरे सामने शराब और सिगरेट पी सकते हैं तो मैंने हां बोल दिया। सब ने गिलासों में शराब डाल ली और जब सिगरेट निकालने लगे तो उनका पैकिट खाली था। एक बोला बिना सिगरेट शराब का मजा नहीं आएगा और दूसरे को सिगरेट लाने को कहा।

इससे पहले कोई जाता मैंने अपने ब्रा में हाथ डालकर सिगरेट का पैकिट निकाल कर टेबल पर रख दिया और कहा अंकल ये पी लो। तभी एक बूढ़े ने मुझ से कहा अगर बुरा न मानों तो क्या तुम सिगरेट जला कर दे सकती हो। मुझे यकीन हो गया कि लोहा गर्म है चोट मार देनी चाहिए कहीं शराफ़त के चक्कर में ये लंड भी निकल जाएं।

मैंने एक एक करके तीन सिगरेट जलाईं और सिगरेट को चूम कर अपने हाथ से उनके होंठों पर लगा दीं। मैं बारी बारी से उनके मुंह से सिगरेट लेती और कश खींच कर वापस उनके मुंह में लगा देती।

तीन गिलासों में शराब पड़ी हुई थी और मैंने तीनों गिलासों से एक एक घूंट पीकर गिलास रख दिए और उन्होंने बची हुई शराब पीकर खाली गिलास टेबल पर रख दिए। मैंने गिलासों में शराब एवं सोडा डाला और बारी बारी से सब को अपने हाथों से शराब पिलाई और गिलासों में थोड़ी-थोड़ी शराब बचा ली। वो लोग बारी बारी से उठे और अपना अपना गिलास मेरे होंठों को लगाकर शराब पिला दी।

वो तीनों मेरे पास खड़े हो गए और उनके लंडों के खड़े होने से उनकी पैंट में तंबू बने हुए थे। मैंने बारी बारी से पैंट के ऊपर से चूमा और कहा लगता है ये बेचारे किसी के मिलन को तड़प रहे हैं। एक बूढ़े ने अपनी जिप खोल ली लेकिन उसका साथी बोला यहां नहीं अपने ठिकाने पर चलते हैं और उसने जिप बंद कर ली। उन्होंने मुझे अपने साथ चलने को पूछा और मैंने हां कर दी।

वो आगे चल पडे़ और मैं पीछे। आगे जाकर उन्होंने कुछ बात की और अपनी गाड़ी के पास रुक गए। जब मैं गाड़ी के पास पहुंची तो एक ने मुझ से पूछा रात का कितना लोगी? मैंने फटाक से बोला कि मुझे पैसे नहीं सिर्फ लंड चाहिए। उन्होंने मुझे गाड़ी में बैठने को बोला और मेरे पास अपनी गाड़ी थी तो मैंने उनको कहा आप आगे चलो मैं पीछे-पीछे आती हूं। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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दो लोग गाड़ी लेकर चल पडे़ और एक मेरी गाड़ी में बैठ गया। मैंने उसको गाड़ी चलाने को बोला और उसके साथ आगे वाली सीट पर बैठ गई। उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने कहा नाम से क्या फर्क पड़ता है जो दिल करे बुला लो। वो गाड़ी चलाने लगा और मैं उसके लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी। उसका लंड तन कर खड़ा हो गया। मैंने उसकी पैंट की जिप खोलकर लंड बाहर निकाल लिया और उसकी गोद में सिर रख दिया। मैं उसके लंड को हाथ से हिलाने लगी और बीच बीच में उसके लंड के टोपे को होंठों से चूम लेती।

उसका लंड करीब 7 इंच लंबा और करीब ढाई इंच मोटा था। उसका लंड देखकर मुझे अच्छा लग रहा था कि ये मुझे अच्छी तरह चोदेगा और सोच रही थी कि सब के लंड इतने ही लंबे और मोटे हों। वो एक हाथ से मेरे बूब्ज़ दबाते हुए गाड़ी चला रहा था। अचानक उसने मुझे बैठने को बोला और जल्दी से अपना लंड अंदर करके जिप बंद कर ली। मैंने सामने देखा तो पुलिस की चैकिंग हो रही थी। एक पुलिस वाला हमारे पास आया और उस अंकल से मेरे बारे पूछा।

अंकल ने मुझे अपनी बेटी और खुद को मेरा बाप बताया। हम लोग वहां से निकल गए। कुछ दूर जाकर हंसने लगी। अंकल ने मुझ से हंसने की वजह पूछी तो मैंने कहा आज मेरा बाप अपने दोस्तों के साथ मुझे चोदेगा। तब उसने मुझे बताया कि वो लोग दोस्त नहीं हैं बल्कि सगे भाई हैं। वो सब अपनी-अपनी बेटियों को चोद चुके हैं और एक-दूसरे की बेटियों को भी चोदा है। ऐसी बातें करते-करते हम एक जंगल नुमा जगह पर पहुंच गए जहां एक घर था। वहां अंदर बहुत सुंदर था और सोफे और बैॅड लगे हुए थे।

जब मैं अंदर गई दोनों अंकल लंड निकाल कर सोफे पर बैठे थे। उनके लंड देखकर मैं बहुत खुश हुई, सब के लंड एक जैसे लंबे और मोटे थे। मैं मन ही मन रोमांचित होने लगी कि आज की रात धड़ल्लेदार चुदाई होगी और ऊपर से उन्होंने सेक्स की गोलियां भी खा रखी थीं। एक अंकल ने मुझे एक गोली दी और कहा ये खा लो बेटी चुदाई में बहुत मजा आएगा।

मैंने शराब के साथ गोली ले ली और वो सब शराब पीने लगे। कुछ देर बाद गोली का असर होने लगा और मेरे रोम रोम में चुदाई की आग लगने लगी। तभी वो अंकल जो मेरा बाप बना था मेरे पास आया और कहा सामने रूम में चली जाओ और जिसका लंड पहले लेना है बता दो वो अंदर आ जाएगा। बाकी एक एक करके आएंगे। मैंने कहा एक एक क्यों सब मिलकर मजा करते हैं।

वो मान गए और सभी सोफे पर बैठ गए। अंकल जो मेरा बाप बना था उसने मुझे कहा कि आज की रात मैं तुम्हारा पापा हूं। उसने दूसरे अंकल की तरफ इशारा करके कहा ये तुम्हारा चाचू और तीसरे की तरफ इशारा करके कहा ये तुम्हारा ताऊ। आज तुम्हारा पापा, ताऊ और चाचा मिलकर तुझे चोदेंगे। मैं उनसे सहमत हो गई और उनको पापा, चाचा और ताऊ मान लिया।

वो तीनों अपने-अपने कपड़े निकाल कर नंगे हो गए और मैं सोफे के पास खड़ी थी। चाचू ने मेरा टॉप निकाल दिया और ताऊ ने मेरी स्कर्ट और मुझे सोफे पर बैठा दिया। चाचू मेरे बांए, ताऊ दांए बैठ गए और पापा सोफे के पीछे खड़े हो गए। चाचू और ताऊ मेरी जांघों को सहलाने लगे और पापा मेरे कंधों को।

चाचू मेरे बांए बूब को और ताऊ दांए बूब को मेरी ब्रा के ऊपर से दबाने लगे। पापा ने मेरा मुंह ऊपर को किया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं चाचू और ताऊ के लंड पकड़ हिलाते हुए दोनों बूब्ज़ मसलाने और होंठ चुसवाने के मजे ले रही थी। मेरा अभी बना बाप मेरे नीचे वाले होंठ को अपने मुंह में खींचने लगा और मैं भी उनके होंठ को खींच कर चूसने लगी।

पापा ने मुझे थोड़ा आगे किया और मेरी ब्रा की हुक खोल दी और मेरे बड़े-बड़े गोल बूब्ज़ ब्रा की कैद से आजाद होकर लहराने लगे। चाचू और ताऊ मेरे बूब्ज़ पर टूट पडे़ और मेरे बूब्ज़ चूसने लगे। पापा ने मेरी पैंटी निकाल कर मेरी टांगें खोल दीं और मेरी भरी हुई जांघों को सहलाते एवं चूमते हुए मेरी शेवड चिकनी चूत पर मुंह रख दिया।

चाचू और ताऊ मेरे नाजुक, गोरे, मुलायम एवं चिकने पेट को सहलाते हुए जोर जोर से मेरे बूब्ज़ चूसने लगे और पापा मेरी चिकनी जांघों को जोर से रगड़ते हुए मेरी चूत के दाने को जीभ से मसलने लगे। मैं चाचू एवं ताऊ के सिर को अपने बूब्ज़ पर दबाते हुए और गांड हिलाकर पापा के मुंह पर रगड़ते हुए मस्ती में मचल उठी।

उन्होंने मुझे बैॅड पर लेटा लिया और खुद भी बैॅड पर आ गए। सब से दांईं तरफ ताऊ, बीच में बाईं तरफ पापा और अखीर में दांईं तरफ चाचू बैठ गए।ताऊ ने मेरे माथे, आंखों एवं गालों को चूमते हुए मेरे होंठों से अपने होंठ मिलाकर चूमने लगे। पापा ने मेरे बूब्ज़ संभाल लिए और बारी से मेरे दोनों बूब्ज़ एवं हलके भूरे निप्पलों पर जीभ घुमाते तथा मुंह में लेकर चूसते।

चाचू मेरे नाजुक गोरे पेट को जीभ से चाटते हुए और मेरी गहरी नाभि में जीभ घुमाने लगे। चाचू अपनी एक ऊंगली मेरी चूत में घुसा कर अंदर-बाहर करने लगे। मैं ताऊ और पापा का लंड हिलाते हुए फुदक रही थी। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
. थोड़ी देर बाद ताऊ ने पापा की, पापा ने चाचू की और चाचू ने ताऊ की जगह ले ली। अचानक वो तीनों जंगली हो गए और मेरे होंठों, बूब्ज़ एवं पेट को मुंह में खींच कर चूसने लगे और ताऊ ने मेरी चूत में अपनी दो ऊंगलियां घुसेड़ दीं और अंदर-बाहर करने लगा। मैं उनके इस जंगलीपन से और भी रोमांचित होने लगी और पापा के होंठों को जोर से चूसते और काटते हुए चाचू एवं ताऊ के लंड जोर से मसल दिए। अब एक बार फिर उन्होंने जगहा बदल ली और सेक्सी तरीके से मेरा बदन चूसने लगे और मैं भी वहशीपन दिखाते हुए उनको नोचने लगी।

उन्होंने ने मुझे खड़ा कर लिया और पूछा सबसे पहले किसका लंड मुंह में लेना है। मैंने कहा मुंह में देने लंड देने का सबसे पहला हक तो बाप का ही होना चाहिए। चाचू बाएं, ताऊ दाएं और बाप बीच में खड़ा हो गया। मैंने बीच में बैठ कर पापा का लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और चाचू एवं ताऊ का लंड हाथों से हिलाने लगी। थोड़ी-थोड़ी देर बाद सब अपनी जगह बदल लेते और मैं बारी बारी से लंड चूसती और हिलाती। मैंने सब का लंड तीन तीन बार चूसा।

उन्होंने मुझे टेबल पर लेटा लिया और मेरा सिर नीचे लटका दिया। चाचू मेरे ऊपर आ गया और मेरे बूब्ज़ के बीच अपना लंड रख दिया। मैंने दोनों बूब्ज़ की हाथों से दबा कर चाचू का लंड बूब्ज़ के बीच ले लिया। ताऊ ने मेरी टांगें खोल दीं और मेरी भरी हुई चिकनी जांघों को चूमते हुए मेरी चूत पर मुंह रख दिया। पापा सिर के पास आ गया और मेरे नर्म रसीले होंठों पर अपने लंड का लाल टोपा लगा दिया। मैंने लंड के टोपे को होंठों से चूमते एवं उस पर गोल गोल जीभ घुमाते हुए मुंह में ले लिया और चूसने लगी।

ताऊ मेरी चूत को जोर जोर से चूसने लगा और मेरी चूत में जीभ घुसेड़ कर चाटने लगा। ताऊ की जीभ मेरी चूत के अंदर-बाहर बाहर होने लगी और मैं गांड हिलाने लगी। चाचू अपनी कमर आगे-पीछे करके मेरे बूब्ज़ में लंड घिसाने लगा। पापा ने मुझे चेहरे से पकड़ा और मेरा मुंह चोदने लगा। पापा का लंड मेरे गले की गहराई में सैर कर रहा था। उसके बाद उन्होंने जगह बदल कर बारी बारी से मेरे बूब्ज़, मुंह एवं चूत का मजा लिया और जी भर कर मेरे बदन को मसला।

उन्होंने मुझे बैॅड पर लेटा लिया और मेरी टांगें नीचे लटका लीं। ताऊ और चाचू मेरे दाएं-बाएं बैठ गए। चाचू ने मेरे बूब्ज़ को दबाना और चूसना चालू कर दिया और ताऊ ने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। ताऊ मेरे होंठों को जोर से चूसने लगा और मेरी जीभ खींच कर चूसने लगा।

पापा ने मेरी चूत पर लंड टिका कर जोर से धक्का दिया और लंड मेरी चूत की दीवारों को फाड़कर जड़ तक बैठ गया। मेरे मुंह से जोरदार चीख निकली जो ताऊ के मुंह में दब गई। ताऊ ने अपने घुटने मोड़कर गर्दन के दोनों तरफ़ रख दिए और कोहनियों के बल आगे बैॅड पर झुक गया। ताऊ का लंड मेरे होंठों को छूने लगा और मैंने मुंह खोलकर ताऊ का लंड मुंह में ले लिया।

चाचू मेरे बूब्ज़ को जोर जोर से चूस रहा था एवं मेरे निप्पलों को काट रहा था और मैं उसके लंड को हाथ से हिला रही थी। नीचे पापा मेरी चूत में जोरदार शाॅट मारकर चूत चोद रहा था और ऊपर से ताऊ अपनी गांड हिला हिला कर अपना लंड मेरे मुंह में पेल रहा था। मैं नीचे लेटी हुई चाचू का लंड हाथ से मसल रही थी और अपने बूब्ज़ के निप्पलों पर लंड मसल रही थी।

अपनी गांड उछाल उछाल कर चूत में पापा का लंड ले रही थी और सिर को ऊपर-नीचे करके ताऊ का लंड अपने गले की गहराई में उतार रही थी। मुझे लग रहा था मैं रंडी हूं और रंडी जैसे चुदने का मजा लूट रही थी। सब बारी बारी मेरी चूत एवं मुंह चोद रहे थे और मेरे हाथ में लंड देकर मेरे बूब्ज़ पर रगड़ रहे थे। मुझे उनसे ऐसी चुदाई कई उम्मीद नहीं थी और मैं मस्त होकर इस जबर्दस्त चुदाई का आनंद लूट रही थी।

तीनों बूढ़े बैॅड से नीचे उतर गए और ताऊ सोफे पर बैठ गया। मैंने घुटने मोड़कर सोफे पर रखे और चूत को ताऊ के लंड पर टिका कर गांड को नीचे धकेल दिया। ताऊ का लंड सीधा मेरी बच्चेदानी के मुंह पर टकराया और मेरे मुंह से कामुक आहह निकल गई।

पापा सोफे के पीछे आया और मेरे मुंह में लंड पेल दिया। पीछे से चाचू ने मेरी गांड ऊपर उठाई और मेरी गांड पर ढेर सारा थूक लगा दिया। चाचू ने मेरी गांड के छेद पर लंड लगाया और जोर से धक्का मारा। चाचू का लंड मेरी गांड को खोलता हुआ अंदर तक बैठ गया। ताऊ मेरे बूब्ज़ को चूसता हुआ मेरी चूत में लंड पेलने लगा।

बाप मुझे सिर से पकड़ कर मेरे गले के अंदर तक लंड घुसा कर मुंह चोदने लगा और चाचू पीछे से मेरी कमर पकड़ कर जबर्दस्त शाॅट मारकर मेरी गांड पेलने लगा। चाचू मेरी गांड के अंदर-बाहर लंड करते हुए मेरी गांड पर चपत लगाने लगा और मेरे गोरे गोरे चूतड़ लाल हो गए। मेरे तीनों छेदों की जबरदस्त ठुकाई हो रही थी।

मैं गांड हिला हिला कर चूत एवं गांड और सिर हिला कर मुंह चुदाई के मजे ले रही थी। मैं किसी और दुनिया में पहुंच चुकी थी यहां काम देव के दर्शन हो रहे थे। चाचू मेरी कसी हुई गांड को ज्यादा देर झेल नहीं पाया और ठंडी आहह भरता हुआ मेरी गांड में झड़ गया। उसने अपना लंड मेरी गांड से निकाला और साफ करके दारू पीने लगा। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.
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तभी मेरा थोड़ी देर पहले बना बाप मेरे पीछे आ गया और मेरी गांड के छेद पर लंड लगा कर धक्का मारा। उसका लंड मेरी गीली गांड में फटाच से घुस गया और वो पीछे से मेरी गर्दन को चूसता हुआ मेरी गांड में जबरदस्त शाॅट मारने लगा। चूत में ताऊ का लंबा मोटा लंड और गांड में बाप का शानदार लंड मुझे पेलने लगे और मैं एक साथ आगे-पीछे से चुदने लगी।

मैंने उनको रुकने का इशारा किया और वो रुक गए। मैंने अपने हाथों से ताऊ के कंधों को कस के पकड़ लिया और गांड को तेज़ी से हिलाने लगी। जब मैं अपनी गांड पीछे करती तो ताऊ का लंड मेरी चूत में पीछे आ जाता और बाप का लंड मेरी गांड की गहराई में उतर जाता।

जब मैं गांड को आगे करती तो बाप का लंड गांड के छेद में पीछे हो जाता और ताऊ का लंड मेरी बच्चेदानी के मुंह पर टकराता। ताऊ मेरे बूब्ज़ को मसलते हुए और बाप मेरे नाजुक पेट को सहलाते हुए मेरे शाॅटस का मजा लेने लगे। मैं गांड हिला हिला कर दोनों छेदों में लंबे मोटे लंड लेते हुए मस्त होकर चिल्ला रही थी।

उन्होंने मुझे टेबल पर एक टांग रखा कर खड़ी कर दिया और पापा सामने आ गया। मैंने अपनी गोरी बांहें उसके गले में डाल दीं कान को काट लिया। उसने खड़े खड़े मेरी चूत में लंड डाल दिया और चूत चोदने लगा। ताऊ पीछे आ गया और उसने मेरे मोटे चूतडो़ं की फांकें खोल कर गांड में लंड डाल दिया।

आगे से पापा मेरी चूत पीछे से ताऊ मेरी गांड ठोकने लगे और मैं मजे से चूत एवं गांड ठुकवाने लगी। मैंने पापा की पीठ को अपनी बाहों में कस कर जकड़ लिया और दोनों टांगें उसकी कमर पर लपेट दीं। मैंने अपने होंठ पापा के होंठों पर रख दिए और चूसने लगी। ताऊ पीछे से मेरी पीठ और गर्दन चूमने लगा। दोनों खड़े-खड़े मुझे आगे-पीछे से चोदने लगे।

कुछ देर बाद पापा मेरी चूत में झड़ गया और हांफने लगा लेकिन ताऊ में अभी दम बाकी था। अब दो खिलाड़ी आऊट हो चुके थे। ताऊ ने मुझे बैॅड पर उल्टा लेटा दिया और मेरी टांगें खोल कर खड़े-खड़े चूत में लंड दे दिया और मुझे चोदने लगा।

वो मुझे बहुत जबरदस्त तरीके से पेलने लगा और मेरे मुंह से कामुक धुनें निकल रही थीं। अचानक उसने मेरी चूत से लंड निकाला और मुझे बैठा कर मेरे मुंह में लंड दे दिया। ताऊ मेरे मुंह में झटके देने लगा और मैं भी सिर को आगे-पीछे करके साथ देने लगी। ताऊ के लंड का वीर्य मेरे मुंह में फूट पड़ा और मेरे होंठों से टपकने लगा।

इसके बाद उन्होंने मुझे दो बार एक एक करके चोदा और मेरे मुंह, चूत एवं गांड का बाजा बजाया। इस चुदाई की धुनों पर डांस करते-करते सुबह के 6 बज गए। जब मैं घर आने लगी तो एक बार फिर उनके लंड चूसे और उनके टेस्टी वीर्य को गले के नीचे उतार लिया।

मेरे मना करने पर भी उन्होंने मुझे 15000 रुपए दिए। उनका पैसे देने का स्टाइल भी सेक्सी था। पापा ने पैसे मेरे बूब्ज़ के बीच रखे, ताऊ ने मेरी पैंटी में हाथ डालकर चूत के नीचे रखे और चाचू ने मेरे चूतडो़ं की दरार में पैसे फंसा कर रखे। मैंने सब के होंठों पर जोर जोर से चुम्मा लिया और वहां से निकल आई।

इसके बाद किसके साथ मजे लूटे वो अगली कहानी में, तब तक सब के लंड चूसते हुए चुद्दकड़ अर्श का सलाम। और मेरी मेल आई डी है “[email protected]”.

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