पड़ोसी लड़के की छेड़छाड़ में मज़ा आया

अन्तर्वासना के प्रबुद्ध पाठको, मेरी बात ध्यान से पढ़िए और अपनी राय मुझे दीजिए।

मैं रीमा जोशी, बीस वर्षीया युवती ऋषिकेश की रहने वाली हूँ मैं रुड़की के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ती हूँ और वहीं एक कमरा किराए पर लेकर रहती हूँ। नीचे की मंजिल पर मकान मालिक रहते हैं और ऊपर एक कमरा, रसोई, बाथरूम मेरे पास है।

मेरे मकान मालिक बहुत अच्छे हैं तो जल्दी ही उनके घर मेरा आना जाना हो गया। उनका युवा बेटा मेरे घर आकर मुझसे अपनी बारहवीं की पढ़ाई के बारे में मदद लेता रहता था और मेरे साथ खेला करता था।

एक दिन वह मुझे एक गेम खेलने की बात करने लगा जिसमे वो मेरे हाथ पैर बांधता और मुझे उसे खोलकर दिखाना था, जोश में आकर मैंने वो खेल खेलने के लिए हाँ कर दी।

उसने खेल खेल में मेरे हाथ पैर बाँध दिए और अचानक उसने मेरा मुंह भी बाँध दिया, अब मैं बोल भी नहीं पा रही थी। तब उसने मुझे अपने बंधे हाथों से पैरों पर बंधी रस्सी खोलने को कहा। ऐसा करने की कोशिश में मैं लुढ़क गई तो उसने मेरी कमर और कंधे पकड़ कर मुझे बैठा दिया। पर अब वो मुझे ‘बक अप’ करने के बहाने मेरी पीठ पर कमर पर हाथ फिराने लगा।

उसकी छेड़छाड़ बढ़ती गई और वो मेरी टांगों, जाँघों, चूतड़ों और पेट पर भी हाथ फिराने लगा। उसके बाद तो उसने मेरी सलवार और कुरती में हाथ घुसा कर मेरे नाज़ुक अंगों से खेलना शुरू कर दिया। अब मुझे भी इस छेड़छाड़ में मज़ा आने लगा था तो मैंने उसे नहीं रोका।

उसकी हिम्मत बढ़ गई फिर उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर मुझे पेट के बल लिटा दिया जिससे मेरे शरीर के पीछे का हिस्सा यानि मेरे चूतड़ और कमर उसके सामने आ गए।

फिर वह मेरे पीछे से आहिस्ते आहिस्ते मेरी सलवार को नीचे सरकाने लगा, उसने मेरी पैंटी भी मेरे घुटनों तक सरका दी और मेरे कूल्हों को चूमने लगा, उसने मेरे चूतड़ों को जी भर कर सहलाया, चूमा चाटा।

अब मुझे थोड़ी समझ आई कि मेरे साथ यह लड़का कुछ भी कर सकता है तो मैंने अपना बदन हिला कर उसे विरोध प्रकट किया तो वो डर कर मेरे हाथ खोल कर भाग गया, फिर उसके बाद मैंने अपनी पैंटी और सलवार ठीक की।

मैंने किसी से कुछ नहीं कहा इस घटना के बारे में ! उसके बाद उसी रात को सोने से पहले उस घटना को याद करके मैंने अपनी कुंवारी चूत सहलाई, उसमें उंगली डाल कर हस्तमैथुन करके मज़ा लिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

अब मेरी अन्तर्वासना मुझे कह रही है कि मैं बार बार उसके साथ यह खेल खेलूँ लेकिन मेरा दिमाग कह रहा है कि यह गलत है। हालांकि उसने दोबारा ऎसी कोई हरकत करने की कोशिश नहीं की है, वो अब भी मेरे पास पढ़ने आ जाता है।

मैं चाह रही हूँ कि एक हद तक मैं उसके साथ इस खेल का मज़ा लेती रहूं लेकिन मुझे डर भी लग रहा है कि कुछ गलत ना हो जाए।

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