मैडम और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई का खेल -1

मेरा नाम रोहन कुमार है.. मेरी उम्र 21 साल है और कद 5’6″ है। रंग गोरा और हॉट हूँ। मैं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से हूँ। मैं अन्तर्वासना साईट का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। इसलिए अपनी जिन्दगी में पहली बार अपनी व्यक्तिगत घटना आपसे बांट रहा हूँ।

मैं कंप्यूटर इंजीनियरिंग कर चुका हूँ.. और मेरी आगे की पढ़ाई अभी भी चल रही है। मैं कंप्यूटर बनाने के लिए के घर पहुँच कर सेवा देता हूँ। एक दिन की बात है.. एक स्कूल (स्कूल का नाम उल्लेख नहीं करूँगा.. इसके लिए माफी दोस्तो) का कंप्यूटर खराब हो गया था तो वहाँ मेरे पहचान का एक कमलेश नाम का टीचर था, उसने मुझे कॉल किया कि स्कूल का दो सिस्टम खराब हैं, आकर ठीक कर दो।

तो मैं ‘हाँ’ बोल कर वहाँ गया.. वहाँ जाने के बाद सबसे पहले एक मैडम से मुलाकात हुई। वह मैडम दिखने में बहुत ही सेक्सी और खूबसूरत थी.. वो सूट इतनी टाईट पहनती थी.. जिसके कारण और बहुत ही सेक्सी और फिट दिखती थी।

उस चुस्त सूट में उसकी बड़ी चूचियों के बड़े ही कामुक दीदार हो रहे थे साथ ही उसकी एकदम गोल चूचियों के चूचुक भी काफी सख्त और स्पष्ट उभार लिए हुए दिखाई दे रहे थे।

मैं उसे देखने के बाद मदहोश हो गया और उसकी तरफ एकटक देखता ही रह गया.. इतने में उसने कहा- आप कौन हैं? मैं थोड़ा घबरा कर बोला- जी.. जी.. मैं कंप्यूटर इंजीनियर.. मैडम- ओह… चलो मैं कमलेश सर से मिला देती हूँ। मैंने कहा- ठीक है।

चलो तभी मेरी नजर उसकी सिर पर गई.. तो मैंने देखा कि उसकी मांग तो भरी हुई है। मुझे थोड़ा सा दुख हुआ।

कमैं कंप्यूटर ठीक करने में लग गया, वो मेरे पास ही थी.. मेरी नजर तो उसके चूतड़ों और उसके वक्ष उभारों पर ही घूम रही थीं।

सच कह रहा हूँ कि उसकी छलकती जवानी को अपने इतने करीब देख कर मेरा तो लण्ड खड़ा हो गया था.. पर मैंने अपने आप को काबू में किया और कुछ देर बाद वो क्लास लेने चली गई।

तब मैंने कमलेश सर से उसके बारे में पूछा- यार इन मैडम का क्या नाम है? कमलेश ने उसका नाम सीमा (यह उसकी सही नाम नहीं है) बताया।

मैंने और ज्यादा कुछ नहीं पूछा ताकि उसको शक ना हो कि मेरा क्या नजरिया है क्योंकि सीमा मैडम शादीशुदा थी। फिर मैंने कंप्यूटर ठीक किया और उसके बाद हम लोग प्रिंसीपल सर के ऑफिस में आए.. वहाँ पर हम दोनों की एक बार फिर मुलाकात हुई।

प्रिंसीपल सर ने चाय मंगाने की कही.

. मैंने मना किया.. तो सीमा मैडम ने मुझसे उसी समय बात की- कंप्यूटर इंजीनियर लोग तो ज्यादा चाय पीते हैं और आप चाय के लिए नहीं बोल रहे हो.. क्या बात है? मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं है मैम!

वो मुस्कुराई.. तो मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई।

मैं वापिस आ रहा था.. तो मैडम को देखकर मुस्कुराकर चला गया। उसने भी मुझे मुस्कुराकर जवाब दिया।

मैं उसके बारे में सोच-सोच कर पागल सा हो गया.. काश स्कूल के और सिस्टम भी खराब हो जाते.. तो इससे और देर तक मिलने का मौका मिल जाता।

मैं बता दूँ दोस्तों.. सीमा मैडम इतनी सेक्सी थी कि क्या बताऊँ.. उसकी आवाज मेरे कानों में गूंजने लगी। उसके नाम से मैंने कई बार मुठ मारी है। मुझे लगा कि वो मैडम मुझे कभी नहीं मिलेगी।

एक दिन किसी लड़की की फोन आया.. वो लड़की कोई और नहीं.. सीमा मैडम थी, मैं उसकी आवाज कैसे भूल सकता हूँ, पर मैंने मैडम को अनजान बनते हुए न पहचानने का नाटक किया।

मैडम- आपका नाम रोहन है? मैंने- हाँ.. आप कौन? मैडम- आप कंप्यूटर इंजीनियर हो? मैंने- हाँ हूँ.. पर आपका नाम क्या है कौन हो आप? मैडम- मैं सीमा बोल रही हूँ।

मैंने नाटक करते हुए पूछा- सीमा कौन? मैं किसी सीमा नाम की लड़की को नहीं जानता। मैडम- मैं सीमा मैडम.. उस दिन आप हमारे स्कूल में कंप्यूटर ठीक करने आए थे न.. तो आप मिले थे मुझसे.. कुछ याद आया?

मैंने सोचने का नाटक किया और कहा- हाँ.. आप वो हैं.. हाँ मैंने पहचान लिया। ‘थैंक्स गॉड.. पहचान लिया..’ मैंने पूछा- मैम कैसे याद किया.. सब ठीक है ना? मैडम- मेरे घर का कंप्यूटर खराब हो गया है.. उसे ठीक कर दोगे क्या? मैंने ‘हाँ’ कहा..

उस दिन छुट्टी थी और उसने घर का पता दिया तो मैं उस पते पर उसके घर पहुँच गया। मैंने बेल बजाई.. मुझे लगा कि कोई और आएगा दरवाजा खोलने के लिए.. पर वो खुद आई थी।

मैडम उस वक्त नाईटी पहनी हुई थी.. आह्ह.. वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि बता नहीं सकता.. शायद इसलिए कि मैं उसके बारे कितना सोचता था.. इसलिए मुझे और ज्यादा सेक्सी लग रही थी।

मैडम- अन्दर आओ। मैं अन्दर गया.. उसकी घर में एक रसोई और चार कमरे आमने-सामने थे। मैंने पूछा- बाकी सब कहाँ हैं? मैडम ने कहा- सब मतलब? यहाँ मैं अकेली रहती हूँ।

यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया। फिर मैंने पूछा- आपके मिस्टर कहाँ हैं? मैडम ने बताया- मेरे उनकी पोस्टिंग कहीं और हो गई है और वो वहाँ रहने लगे हैं.
. चूंकि मैं यहाँ टीचर हूँ.. इसलिए यहीं किराये पर रहती हूँ.. मेरे पति शनिवार को आते हैं.. बाकी सब लोग गांव में रहते हैं। मैडम को कोई बच्चा नहीं था।

मैंने कहा- मैम कंप्यूटर कहाँ है? मैम मुझे अपने कमरे में ले गईं.. वहाँ जाकर मैं बहुत खुश था। मैडम ने पूछा- चाय या फिर कुछ? मैं बोला- कुछ और.. क्या? ‘मतलब ठन्डा..’ ‘ओके..’

तो वो दो कोल्ड ड्रिंक लाई.. थोड़ी गर्मी का मौसम था। वो बाहर चली गई.. मैंने उसके सिस्टम ठीक किया और जाने के लिए तैयार हो रहा था। उतने में मैडम आई.. और बोली- हो गया? मैंने कहा- हाँ हो गया। उसने कहा- कहाँ जा रहे हो.. काम है क्या आपको? मैंने कहा- नहीं फ्री हूँ.. मैडम बोली- रूको ना.. मैं भी बोर हो रही हूँ.. अकेली हूँ।

मैं रुक गया.. तो वो मुझसे बातें करने लगी और साथ ही वो अपने कमरे को करीने से सजाने में जुट गई.. और वो झुक कर चीजें उठा कर रख रही थी। नाईटी खुले गले की होने के कारण उसकी चूचियाँ मुझे साफ दिखाई दे रही थीं।

मेरा लंड खड़ा हो गया था.. मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। वो इतनी गोरी थी और उसकी थिरकती चूचियाँ इतनी मस्त लग रही थीं.. कि मैं पसीना-पसीना हो गया था। मैंने मैडम से कहा- बाथरूम कहाँ है?

तो उसने बताया.. मैं बाथरूम में गया और मुठ मार कर अपने आपको शांत किया।

मैं वापस कमरे में आया तो मैंने मैडम को चोदने का सोचा.. लेकिन बोलने के लिए डर लग रहा था.. तो मैं कुछ बोल ना पाया। काम करने के बाद मैडम मेरे पास आकर बैठ गईं और मुझे मेरे बारे में पूछना शुरू किया- आपकी कोई गर्लफ्रेण्ड है क्या? मैंने कहा- हाँ.. तो वो थोड़ा उदास सी हो गई।

फिर मैंने कहा- अरे मैडम मजाक कर रहा हूँ। मेरी काई गर्लफ्रेण्ड नहीं है.. मुझे कोई मिलती ही नहीं है.. सब भाव खाती हैं ना.. इस कारण.. तो मैडम खुश हो गई।

मैं मैडम को देखकर ही गर्म हो जाता था.. शायद यह बात उसको मेरा घबराया हुआ चेहरा देखकर पता चल गई। फिर मैडम भी मुझे कुछ बोल नहीं पा रही थी.. शायद उसको भी डर था.. तो उसने मुझसे पूछा- आपके पास फोल्डर लॉक का सॉफ्टवेयर है क्या?

मैं अपने साथ सारे सॉफ्टवेयर लिए रहता हूँ.. पर तब भी मैंने कहा- नहीं पर वो सोफ़्टवेयर मेरे घर पर है। बोली- ठीक है.. कल 11 बजे ले कर आना.. मैं स्कूल नहीं जाऊँगी। मैंने भी उसे ‘हाँ’ बोला.. मुझे भी तो मिलना था ना मैम से।

मैंने घर जाकर कई बार उसके नाम से मुठ मारी। यार क्या बताऊँ.
. मुझे अगले दिन का बड़ी बेसब्री से इन्तजार था। उसने मुझे रात को फोन भी किया.. शायद वो भी मुझसे चुदना चाहती थी।

मैं जब अगले दिन उसके घर गया.. तो साड़ी में थी.. साड़ी गुलाबी रंग की थी। वो साड़ी में क्या गजब सेक्सी खुल रही थी.. मैंने मैडम से कहा- मैम आप बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही हो.. क्या बात है। तो उसने मुस्कुराकर कहा- चल झूठे! मैं खुश हो कर बोला- सही कह रहा हूँ मजाक थोड़ी कर रहा हूँ।

वो कुछ संजीदा सी हुई।

फिर मैं बोला- आपको वो प्रोग्राम आपके सिस्टम में किस लिए चाहिए.. आपके अलावा और कोई नहीं बैठता है। तो मैम बोली- नहीं.. वो क्या है ना कि पड़ोस के बच्चे कभी-कभी आते हैं गाने सुनने के लिए.. और मेरे काम की चीजों को कम्प्यूटर से छेड़छाड़ कर देते हैं..

फिर मैंने प्रोग्राम इंस्टाल किया और पूछा- कौन सा फोल्डर लॉक करना है? उसने कहा- वो मैं कर लूँगी। मैं समझ गया कि क्या बात है, मैं बोला- चलो ठीक है.. कर लेना।

वह मुझे बैठने बोली और खुद रसोईघर में चली गई। मैं उसके कंप्यूटर में अश्लील फिल्म खोजने लगा।

तभी मुझे फिल्म का फोल्डर मिल गया, मैंने आवाज को बंद किया और फिल्म देखने लगा। ब्लू-फिल्म देखते हुए मैं गर्म हो चुका था, मेरा हाथ मेरे लण्ड को सहला रहा था, मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, मैं फिल्म देखने में बेहद मस्त था।

शायद मैम भी छुपकर देख रही थी। जब वो बेकाबू हो गई तो अन्दर कमरे में आईं… मैंने तुरन्त सिस्टम बंद ना कर सका और खड़ा हो गया। मैं पोलो जीन्स पहने हुआ था.. जिसमें मेरा लण्ड एकदम खड़ा था.. पोलो में पूरा उभरा हुआ दिखाई दे रहा था, पूरा 90 डिगरी में तना हुआ था।

मैडम मेरे पास आई.. शर्म के मारे मेरा सर नीचे हो गया। मैडम मेरे लण्ड को देखकर बोली- यह क्या है? मैं कुछ ना बोल पाया और मैडम ने मेरे सिर को ऊपर किया और अपनी गुलाबी गरम होंठों को मेरे होंठ से टिकाया और जोरदार किस करना चालू किया।

मैं खुश हो गया और उसके होंठ का कस के दबादबा कर चूसने लगा, जोश का आलम बढ़ गया और मैं उसकी चूचियों को खूब हचक कर दबा रहा था। चुदासी सी मैडम बोली- आह्ह.. और जोर से दबाओ ना.. यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

मैंने उसकी साड़ी सरका दिया.. पूरी तरह उसको नंगी किया और उसकी चूचियों को चूसने लगा। मैडम गरम होकर मुँह से सिसकारियाँ भरने लगी- आह.
. आह.. इइइइइइ.. सी सी.. उसकी मादक आवाज मुझको घायल कर रही थी।

मैडम ने भी मुझे नंगा कर दिया और मेरे 8″ का लण्ड देख कर बोली- ओह्ह.. आपकी मशीन तो बहुत बड़ी है। मैंने कहा- मैडम.. सर का बड़ा नहीं है क्या? उसने कहा- यार मैडम नहीं.. सीमा कहो न.. मैं बोला- ठीक है.. फिर बोली- उसकी लुल्ली तो 4″ की ही है.. वो मुझे खुश नहीं कर पाता है।

मैडम दिखने में तो माल है ही.. और सच में बहुत ही सेक्सी भी थी.. वो मेरे लण्ड को हाथ से सहला रही थी। मेरा लण्ड गीला हो गया था। मैडम ने मेरे लण्ड को मुँह में लिया और चूसना चालू किया। मैंने उसे पकड़ कर गद्दे पर लिटाया और जोरों से किस करने के साथ उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। उसकी चूत से पानी का रिसाव शुरू हो गया था, वो ‘आह.. आह..’ की आवाज लेकर मजा ले रही थी।

मुझे भी मजा आ रहा था। इस दिन के लिए मैं कितना तड़पा था। उसकी चूत गोरी और चिकनी थी, उसने अपनी चूत के बालों को शायद सुबह ही साफ किया था, मैं उसकी चूत में उंगली करने लगा। मैडम बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी.. वह मेरे लण्ड को तेजी से अन्दर-बाहर करने लगी।

कुछ देर बाद मैडम की अकड़न चालू हुई और वो झड़ गई।

दोस्तो, मैडम मेरे लौड़े से फंस चुकी थी.. बस अब उसे मस्त तरीके से चोदना था.. उसकी मस्त चुदाई को आप अगले भाग में पढ़ सकते हैं।

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कहानी का अगला भाग : मैडम और उसकी सहेलियों के साथ चुदाई का खेल -2

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