जिस्मानी रिश्तों की चाह -20

अब तक आपने पढ़ा..

मेरे छोटे भाइ ने मेरी गांड मारने के बाद मेरी गाण्ड में पानी छोड़ दिया तो मैंने कहा- आह.. अब तुम आओ मेरे नीचे.. अब मेरी बारी है.. आपी ने सुना तो तुरन्त अपना हाथ अपनी जांघों से निकाल लिया.. अब फरहान झुक गया और मैं उसकी गांड में लण्ड घुसा कर आहिस्ता से अन्दर-बाहर करने लगा।

मैंने शीशे में देखा कि आपी अपना हाथ अपनी जांघों के दरमियाँ ला चुकी थीं और रगड़ने लगी थी।

अब आगे..

मैंने फरहान की गाण्ड में झटके मारते-मारते ही अपनी गाण्ड के सुराख को लूज किया और फरहान के लण्ड का गाढ़ा सफ़ेद पानी मेरी गाण्ड से लीक होकर मेरे टट्टों से होता हुआ मेरे लण्ड और फिर फरहान की गाण्ड में जाने लगा।

मुझे अंदाज़ा था कि यह सीन देख कर आपी बिल्कुल पागल ही हो जाएंगी और जैसे कि मैं आईने में देख सकता था, आपी ने एक हाथ को अपनी टाँगों के दरमियान चलाते-चलाते दूसरे हाथ से अपने लेफ्ट दूध को दबोच लिया था और अपनी निप्पल को चुटकी में लेकर बुरी तरह से मसल रही थीं।

जैसे-जैसे फरहान की गाण्ड में अन्दर-बाहर होते मेरे लण्ड की स्पीड तेज होती जा रही थी.. आपी भी अपने हाथों की स्पीड को बढ़ाती जा रही थीं।

थोड़ी देर बाद मुझे पता चल गया कि आपी डिसचार्ज होने ही वाली हैं.. क्योंकि उन्होंने अपना हाथ सलवार के अन्दर डाल लिया था। उन्हें यह नहीं मालूम था कि हम उन्हें आईने में देख रहे हैं।

आपी का हाथ उनकी सलवार में जाता देख कर मैं अपना कंट्रोल खो बैठा और मैंने फ़ौरन फरहान की गाण्ड से अपने लण्ड को निकाला और उसके कूल्हों पर अपने लण्ड का गाढ़ा सफेद पानी छोड़ने लगा।

शायद यह आपी के लिए सबसे ज्यादा हॉट सीन था.. फ़ौरन ही आपी का जिस्म अकड़ गया और उनकी आँखें बंद हो गईं। मैं और फरहान दोनों ही घूम कर सामने आपी को देखने लगे।

वो दुनिया से बेख़बर हो चुकी थीं.. उनके जिस्म को ऐसे झटके लग रहे थे.. जैसे उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक लग रहे हों। उनका पूरा जिस्म काँपने लगा और आपी बहुत स्पीड से अपना हाथ अपनी टाँगों के दरमियाँ वाली जगह पर चलाने लगीं और दूसरे हाथ से अपने दूध को मसलने लगीं।

अचानक उनका जिस्म अकड़ा और गर्दन कुर्सी की पुश्त पर टिका कर और पाँव ज़मीन पर जमाते हुए उन्होंने अपने कूल्हे कुर्सी से उठा लिए और कमान की सूरत उनका जिस्म मुड़ गया। उन्होंने अपनी टाँगों के बीच वाली जगह और अपने दूध को अपनी पूरी ताक़त से भींच लिया।

‘अहह.

. अककखह.. ओह..’ की आवाज़ उनके मुँह और हलक़ से खारिज हुई और फिर उनका जिस्म ढीला होकर कुर्सी पर गिर सा गया।

कुछ देर ऐसे पड़ी वो अपनी साँसों को दुरुस्त करती रहीं.. और जब उन्होंने आँखें खोलीं.. तब उन्होंने हमें देखा कि हम बिल्कुल उनके सामने बैठे मुस्कुराते हुए अपने-अपने लण्ड को हाथ में लेकर सहला रहे थे।

आपी ने अपने आप पर एक नज़र मारी.. कि उनका एक हाथ उनकी सलवार के अन्दर था और दूसरा उनके मम्मे पर था और उससे रगड़ते हुए उनके पेट से भी क़मीज़ हटी हुई थी। आपी का खूबसूरत सा नफ़ भी नज़र आ रहा था।

आपी ने ये सोचा कि वो अपने सगे भाईयों.. छोटे भाईयों के सामने अपने मम्मे और टाँगों के बीच वाली जगह को रगड़ती रही हैं और फ़ौरन ही अपने हाथ को सलवार से निकाला और अपना लिबास सही करने लगीं।

उनकी हया की निशानी उनका स्कार्फ और चादर ज़मीन पर पड़ी थी.. पता नहीं कब उन्होंने चादर और स्कार्फ निकाल फेंका था कि उन्हें खुद भी खबर नहीं हुई।

फरहान ने अपने दोनों हाथों को जोड़ा और ताली बजाते हुए शरारत से बोला- ब्रावो आपी.. ग्रेट शो था। मेरे ख़याल में आप अपने सगे भाईयों को एक्शन में देखने के लिए बैठी थीं.. लेकिन आपकी तरफ से हमें एक शानदार शो देखने को मिल गया.. थैंक यू आपी.. इतने खूबसूरत शो के लिए..

आपी का चेहरा शर्म से सुर्ख हो गया था.. तो मैंने बात संभालते हुए कहा- कोई बात नहीं आपी.. हमने सिर्फ़ एंड ही नहीं देखा.. बल्कि शुरू से आख़िर तक सब देखा है.. उस आईने में..!

मैंने आईने की तरफ इशारा किया.. जहाँ हम सब बिल्कुल क्लियर नज़र आ रहे थे।

आपी बहुत ज्यादा शर्मिंदगी महसूस कर रही थीं.. तो मुझे बहुत अफ़सोस हुआ उनके लिए और मैंने कहा- कोई बात नहीं आपी.. ये एक नेचुरल चीज़ है.. आपकी जगह कोई भी होता.. वो ये ही करता आप परेशान ना हों.. बल्कि खुल कर हमारे साथ ही ये सब एंजाय करें।

ये कहते हुए मैं खड़ा हुआ और आपी की तरफ 2 क़दम ही बढ़ा था कि आपी फ़ौरन खड़ी हो गईं और अपनी चादर और स्कार्फ उठा कर सिर झुकाए-झुकाए कमरे से बाहर निकल गईं।

शायद उन्हें बहुत अफ़सोस हो रहा था अपनी इस हरकत पर.. या फिर शर्म आ रही थी अपने सगे भाईयों से..

आपी बाहर निकल गई थीं.. मैं वहाँ ही खड़ा था कि फरहान की आवाज़ आई- भाई आज मज़ा ही आ गया.. आपी को इस हालत में देख कर.. उफफ्फ़ सग़ी बहन सामने इस हॉल में.
. उसने एक झुरझुरी सी ली।

‘फ़िक्र ना करो मेरे छोटे शहज़ादे.. बस तुम सब कुछ मुझ पर छोड़ दो.. देखो मैं तुम्हें क्या-क्या दिखाता हूँ।’ मैंने शैतानी मुस्कुराहट से कहा।

अगली रात हमने मूवी स्टार्ट की ही थी कि दरवाज़ा खुला और आपी अन्दर आईं। हम दोनों की नजरें आपी पर ही थीं। आपी सिर झुकाए-झुकाए ही अन्दर आईं और हमारी तरफ नज़र उठाए बगैर ही जाकर सोफे पर बैठ गईं। उन्होंने आज भी क़मीज़ सलवार पहनी हुई थी.. सिर पर स्कार्फ मौजूद था। लेकिन चादर नहीं थी.. उन्होंने दुपट्टा उतारा और सलीक़े से तह करके साइड टेबल पर रख दिया और चुपचाप सिर झुका कर बैठ गईं।

हम दोनों भी बगैर कुछ बोले आपी की ही तरफ देख रहे थे.. लेकिन वो नज़र नहीं उठा रही थीं।

मैंने गौर किया तो मेरे लण्ड को झटका सा लगा। आपी की जर्द क़मीज़ में निप्पल वाली जगह काली नज़र आ रहा था और जब वो दुपट्टा ठीक करते हुए या किसी और वजह से जिस्म को हल्की सी भी हरकत देती थीं तो आपी के मम्मे हिलने लगते थे।

‘भाईजान लगता है हमारी सोहनी सी बहना जी ने आज ब्रा नहीं पहनी।’ फरहान ने आँख मार कर मुस्कुराते हुए आपी के चेहरे पर नज़र जमाए-जमाए कहा।

आपी ने नज़र नहीं उठाई और झेंपते हुए कहा- बकवास मत करो और अपना काम शुरू करो। मेरी तरफ़ नहीं देखो.. वरना मैं उठ कर चली जाऊँगी।

मैंने फरहान को इशारा किया कि आपी को तंग नहीं कर.. वरना वो वाकयी ही चली जाएंगी।

मैं और फरहान फ़ौरन खड़े हुए और अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गए। चूमा चाटी करने के बाद मैंने सोचा कि आज कुछ बदलाव किया जाए। मैंने फरहान को बिस्तर पर सीधा लिटाया और उसकी गर्दन को बिस्तर के किनारे पर टिका कर.. सिर को पीछे की तरफ नीचे झुका दिया। फिर मैंने फरहान के मुँह में अपने खड़े लंड को डाला और उसके ऊपर झुकते हुए फरहान के लण्ड को अपने मुँह में भर लिया। अब हम 69 की पोजीशन में थे।

‘नाइस पोजीशन..’ आपी के मुँह से बेसाख्ता ही निकला।

मैंने सिर उठा कर आपी को देखा तो उन्होंने फ़ौरन अपना हाथ अपनी टाँगों के दरमियान से हटा लिया। उनके निप्पल खड़े हो गए थे और क़मीज़ का वो हिस्सा नुकीला हो चुका था.. क्योंकि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी।

‘प्लीज़ आपी.. अगर आप अपने जिस्म से मज़ा लेना ही चाहती हैं.. तो फ्री हो कर मज़ा लें.. प्लीज़ हम यहाँ बिल्कुल नंगे हैं और आपके सामने एक-दूसरे के लण्ड को चूस रहे हैं। अगर आप अपने जिस्म को टच करेंगी.
. तो हमें भी एक-दूसरे के साथ सब करने में मज़ा आएगा। हम आपको कल ये करते हुए देख चुके हैं और इससे क्या फ़र्क़ पड़ेगा कि हम आज फिर देख लेंगे। आप अपने मज़े को तो कत्ल मत करें।’ मैंने समझाने वाले अंदाज़ में कहा।

आपी कुछ देर तक तो सिर झुकाए बैठी रहीं और फिर अपना हाथ उठा कर अपनी टाँगों के दरमियान वाली जगह पर रख कर 2-3 बार रगड़ा और हमारी तरफ देखते हुए कहा- बस खुश हो अब..! फरहान फ़ौरन ही बोला- जी आपी.. आप इस हाल में गज़ब लग रही हैं। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

और वाकयी ही बहुत सलीक़े से सिर पर और चेहरे के गिर्द ब्लैक स्कार्फ जिसमें गोरे-गोरे गाल अब सेक्स की हिद्दत से लाल हो चुके थे। सोफे पर कुछ लेटी.. कुछ बैठी सी हालत में ज़मीन पर पाँव फैलाए.. थोड़ी सी टाँगें खुली हुईं और ठीक टाँगों के दरमियान वाली जगह पर ब्लैक सलवार के ऊपर गुलाबी खूबसूरत हाथ.. आपी बिल्कुल परी लग रही थीं।

मैंने और फरहान ने फिर से एक-दूसरे के लण्ड मुँह में लिए और लण्ड मुँह में अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिए और आपी भी फ्रीली अपनी टाँगों के बीच वाली जगह को रगड़ने लगीं।

अब मैंने फरहान को सीधा लेटने को कहा और हमने अपना रुख़ भी थोड़ा चेंज कर लिया। फरहान की टाँगों को अपने कंधों पर जमाते हुए मैंने लण्ड फरहान की गाण्ड में डाला और 2-3 झटके मारने के बाद झुक कर उसके होंठों को चूसने लगा। आज मुझे कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था।

पता नहीं ये फरहान के नर्म और नाज़ुक होंठ थे.. या अपने लण्ड पर फरहान की गाण्ड के अन्दर की गर्मी का अहसास था.. या शायद आज के अनोखे मज़े की वजह ये सोच थी कि मेरी सग़ी बहन जो बहुत बा-हया और पाकीज़ा है.. जिसका चेहरा ही शर्म-ओ-हया का पैकर है.. वो मुझे देख रही हैं कि मैं अपने सगे छोटे भाई की टाँगों को अपने कंधे पर रखे उसकी गाण्ड में अपना लण्ड अन्दर-बाहर कर रहा हूँ।

कहानी जारी है। [email protected]

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