पड़ोसन आंटी ने मेरा कुंवारापन दूर किया

दोस्तो, अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली कहानी है.. उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को जरूर पसंद आएगी।

सबसे पहले अपना परिचय करा दूँ.. मैं म०प्र० के रीवा जिले का हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और मेरी अभी तक शादी नहीं हुई है। अब मैं अपने लण्ड का परिचय कराना चाहता हूँ मैं और लेखकों की तरह झूठ नहीं बोलूँगा कि मेरा लण्ड 10 इन्च या 8 इन्च का है। मेरा लण्ड सामान्य है, शरीर की ऊचाई 5 फीट 7 इन्च.. वजन 67 किलो.. न ज्यादा मोटा.. न ज्यादा लम्बा.. शरीर भी बिल्कुल सामान्य और गोरा है।

मैं ग्रेजुऐशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैं नौकरी की तलाश में अपने दोस्तों के साथ दिल्ली आ गया।

खास बात यह है कि आज तक मेरी कोई गर्लफ्रेन्ड नहीं है क्योंकि मैं बहुत शर्मीला किस्म का इन्सान था.. मैं चाहे औरत हो या चाहे लड़की.. स्कूल से लेकर कॉलेज तक लड़कियों से आमने-सामने बैठ कर बात करने से कतराता था। पता नहीं मेरे अन्दर ऐसी कौन सी दिक्कत थी.. जो मैं लड़कियों औरतों से शरम करता था।

खैर.. जैसे-जैसे जवानी की दहलीज पर कदम रखते जा रहा था.. वैसे ही मेरी वासना की आग बढ़ती जा रही थी.. समझ में नहीं आता था कि मैं क्या करूँ।

मैं हर रोज मुठ मारकर अपनी प्यास मिटाता था। जब मैं दिल्ली के पास नोएडा में एक कमरा किराये पर लेकर रहने लगा.. लेकिन कुछ दिन रहने के बाद मैंने वो कमरा छोड़ दिया क्योंकि पानी और लाइट की सही व्यवस्था नहीं थी।

ऐसे में मैं नोएडा में तीन कमरे बदल चुका था।

जब मैं चौथे कमरे में गया तो वहाँ मुझे कुछ ठीक लगा, वहाँ का माहौल भी ठीक-ठाक लगा।

यद्यपि मकान-मालिक परिवार वालों को कमरा देता था.. लेकिन मेरी विनती करने पर वह मकान-मालिक किसी तरह मान गया, फिर भी बोला- इस मकान में सारे परिवार वाले रहते हैं। उन्हें तुम्हारी वजह से कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए और यार-दोस्तों से बाहर के लोगों से मिलना-जुलना कमरे पर नहीं होना चाहिए।

मैंने सोचा कि मकान-मालिक का तो प्रशासन बहुत टाईट है और इन्होंने तो साथ में ये भी बोला है कि दो लोगों से ज्यादा कमरे में रहना मना है। मकान-मलिक सारे नियम कानून बता कर चला गया।

उस बिल्डिंग के 24 कमरों में एक कमरा मेरा ही था.. जिसमें हम दो कुंवारे लड़के रहते थे। जब मैंने आंटी और भाभियों को देखा तो मुझे लगा कि शायद मेरा यहाँ कुंवारा पन दूर हो जाएगा।

मैं एक मल्टीनेशनल कम्पनी में ऑपरेटर था, मैं शिफ्ट में ड्यूटी करता था, मेरी ड्यूटी कभी रात में.

. कभी दिन में होती थी। मुझे शिफ्ट ड्यूटी में काफी समय मिलता था।

इस मकान में रहते मुझे एक साल बीत चुका था.. अब तो मुझे मकान के सभी लोग जानने-पहचानने लगे थे।

मकान-मालिक को समय पर किराया देता तो वो भी खुश रहता था।

जब मुझे एक साल हो गया.. तो मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटी ने मुझसे बात करना शुरू कर दी। मैं जब से मकान में आया था.. तब से आंटी को देखकर आंटी के नाम पर हर दिन मुठ मार कर अपनी प्यास मिटा लेता था।

आंटी की उम्र लगभग 40 के आस-पास थी, आंटी इतनी सेक्सी दिखती थीं.. लगता नहीं था कि वो 40 के आस-पास की होंगी। आंटी के दो बच्चे थे.. जो कि दूसरे शहर में रहकर पढ़ाई करते थे। मैंने आंटी के नाम पर न जाने कितनी बार मुठ मारी होगी।

आंटी से मैं जब भी बात करता तो मैं हमेशा उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर नजर टिकाए रखता था, यही सोचता था कि कब इनको पीने या चूसने को मिलेगा।

मैं मुठ मार-मार कर परेशान हो चुका था, चोदने के नाम पर मुझे मोटी आंटी या भाभी या लड़कियाँ ज्यादा पसंद हैं। मैं आंटी को चोदने के लिए हर छोटा-मोटा काम करने लगा। आंटी को देखकर मैं पागल होता जा रहा था।

अंकल का कपड़े का बिजनेस था.. वे ज्यादातर दुकान पर या बाहर रहते थे, वो रात को कभी-कभी आते भी नहीं थे।

अंकल जब भी आते.. रात 12 बज जाते थे.. तो काफी थक जाते थे। इसलिए वो सेक्स नहीं कर पाते थे और आंटी कामवासना की आग में जलती रहती थीं.. तड़पती रहती थीं।

दोस्तो, यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

एक दिन आंटी ने मुझे अपने कमरे पर बुलाया और बोलीं- आदित्य.. मैंने पकौड़ी बनाई हैं.. तुम भी आ जाओ.. कुछ खा लो। मैंने खाने के लिए हाँ कर दी और कहा- अभी आता हूँ।

कुछ देर बाद आंटी अपने कमरे में चली गईं और उन्होंने मुझे आवाज दी। जैसे ही मैं आंटी के कमरे गया तो आंटी को मैक्सी में देखा.. तो देखता ही रह गया, इस वक्त आंटी बहुत सेक्सी लग रही थीं। तभी आंटी बोलीं- आओ बैठो।

मैं आंटी के बिस्तर पर जाकर बैठ गया और आंटी ने मुझे पकौड़ी खाने को दीं।

अचानक आंटी की चूत में खुजली हुई तो आंटी अपनी चूत को सहलाने लगीं। जब आंटी चूत को सहला रही थीं.. तो आंटी की चूत को सहलाते देख कर मेरा लण्ड तन कर खड़ा हो गया।

तभी मैं आंटी से बोला- आप अपने नीचे हाथ क्यों लगा रही हो.
. आपको ऐसा करते देखकर मुझे कुछ-कुछ हो रहा है।

आंटी मेरी इतनी बात सुनकर अपने कमरे से बाहर निकल आईं और मैं आंटी के कमरे में तब तक बैठा रहा.. जब तक आंटी अपने कमरे में वापस नहीं आ गईं।

जब आंटी अपने कमरे में नहीं आईं.. तो मैं डर गया। उस समय दिन के 3 बज रहे थे, मैं आंटी के कमरे से निकल कर अपने कमरे में चला आया। आंटी अपने कमरे में चली गईं।

मैं अपने कमरे में अपना दरवाजा बन्द करके सोच रहा था कि आंटी कहीं अंकल को न बता दें। लेकिन आंटी ने ऐसा नहीं किया।

दूसरे दिन मैंने आंटी से ‘सॉरी’ बोला और कहा- आंटी जी मुझे आपको ऐसा नहीं बोलना चाहिए था। आंटी बोलीं- कोई बात नहीं.. हो जाता है।

आंटी और अंकल बंगाल के रहने वाले थे। एक दिन अंकल को किसी काम से अचानक घर जाना पड़ा, अंकल जी जाते वक्त मुझे बोल गए- अगर तेरी आंटी बाजार से कुछ मंगाए तो लाकर दे देना.. ठीक है? मैंने कहा- ठीक है।

दो दिन बाद आंटी बोलीं- आदित्य, तुम बाजार से दही ला दो।

मैंने आंटी को दही लाकर दिया तो आंटी खुश होकर बोलीं- कल रात रात नौ बजे तुम मेरे यहाँ खाना खाने आना। मैंने कहा- ठीक है..

मैं उस दिन रात भर सोचता रहा कि आंटी मुझसे चुदने के लिए तैयार हैं.. इसी लिए मुझे रात को बुलाया है।

मुझे लग रहा था कि उनकी तरफ से ग्रीन सिग्नल मिल चुका था। उनकी भरी हुई चूचियां और जवानी देखकर मुझे लगता था कि अभी ही जाकर आंटी चोद डालूँ लेकिन किसी के मरजी के खिलाफ सम्बन्ध बनाना बहुत बड़ा अपराध है.. गलत है।

उस रात मैं आंटी के नाम पर मुठ मारकर सो गया।

सुबह उठा और ड्यूटी चला गया और शाम को जब 5 बजे आया तो आंटी बोलीं- आज तुम्हें अच्छा खाना मिलेगा।

मैं इतना सुनते ही और खुश हो गया आंटी की मोटी गाण्ड.. बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर मैं पागल हुए जा रहा था, मैं रात नौ बजे का बेसब्री से इन्तजार करने लगा। आज मैं बहुत खुश था कि आज मेरा कुंवारापन दूर होने वाला है।

फरवरी का महीना था मौसम भी अच्छा था। जैसे ही रात को नौ बजे तो मैंने देखा.. कि आंटी का दरवाजा खुला हुआ था, मैं फट से आंटी के कमरे में घुस गया।

आंटी ने भी जल्दी से दरवाजा बन्द कर लिया। आंटी मैक्सी में थीं.. उन्होंने मुझे अपने पास खींच लिया और अपने गले से लगा लिया। मैं आंटी की चूचियों को जोर-जोर से दबाने लगा।

‘आंटी आज मुझे चोद लेने देना।’ आंटी बोलीं- आज तो पूरी रात बाकी है.
. चिन्ता क्यों कर रहे हो.. मैं तुम्हारी आज से आंटी नहीं.. बीवी हूँ।

आंटी ने हम दोनों के लिए खाना परोसा और हम दोनों साथ में खाना खाने लगे, खाना खाने के बाद हम दोनों एक साथ बिस्तर पर लेट गए। मैं आंटी के ऊपर चढ़ गया, आंटी के दोनों चूचों को जोर-जोर से दबाने लगा और अपने होंठ को आंटी के होंठों में रख कर जोर जोर से चूसने लगा।

फिर धीरे-धीरे करके आंटी के सारे कपड़े उतार दिए। आंटी ने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए, हम दोनों बिल्कुल नंगे हो गए।

मैं तो आंटी की मोटी गाण्ड और फूली चूत देखकर तो मैं पागल सा हो गया। आंटी भी मेरे लण्ड को देखकर कहने लगीं- इसी लण्ड की तो तलाश थी मुझे।

मेरे लण्ड को देखकर आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं और मेरे लण्ड को चूसने लगीं, मैं भी आंटी के चूत के होंठों को चाट रहा था। ऐसे में आंटी एक बार झड़ गईं और अपना सारा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया।

आंटी कहने लगीं- अब मत तड़पा.. मेरी जान अब चोद दे मुझे.. बहुत प्यासी हूँ।

मैंने आंटी की दोनों टाँगों को फैलाया और गाण्ड के नीचे तकिया लगा दिया.. जिससे आंटी की चूत चुदने की पोजीशन पर आ गई।

अब मैंने अपना लण्ड आंटी की चूत पर रखा और लण्ड फिराने लगा। तभी आंटी बोलीं- अब और मत तड़पा मेरे राजा चोद मुझे.. आज अपनी आंटी की प्यास बुझा दे।

मैंने अपना लण्ड आंटी के चूत में रखा और हिलाने लगा। आंटी बोलीं- और मत तड़पा..

मैंने जोर से एक झटका मारा और पूरा लण्ड अपना आंटी के चूत में पेल दिया। आंटी चिल्ला उठीं और कहने लगीं- आराम से चोद न.. दर्द हो रहा है।

मैं जोश में आ गया और आंटी को जोर-जोर से चोदने लगा, आंटी सिसकारियाँ ले रही थीं और ‘उई.. अह..ई..’ कर रही थीं। थोड़ी देर की धकापेल चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था, मैंने आंटी से पूछा- कहाँ डालूँ? आंटी बोलीं- डाल दे मेरी चूत के अन्दर..

फिर मैंने अपना 24 साल का पूरा माल आंटी की चूत में डाल दिया और अपना कुंवारापन दूर कर लिया।

उस रात मैंने आंटी को चार बार चोदा, एक बार गाण्ड मारी.. तीन बार चूत चोदी।

इस तरह मेरा कुंवारापन दूर हो गया। अब मुझे और आंटी को जब भी मौका मिलता.. मैं आंटी को चोदकर अपना चुदास दूर कर लेता हूँ।

आज आंटी हमारे पास नहीं हैं, वो अपने पति के साथ हमेशा के लिए अपने घर बंगाल चली गईं। आपको मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी.
. मुझे जरूर बताएँ..

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