नए लड़कों से गांड मराने की दोस्ती-4

अब तक आपने पढ़ा.. सर ने कैलाश की मुलायम गांड में अपना मूसल पेला, तो वो एकदम से चिहुंक गया और सर का लंड बाहर निकल गया। अब आगे..

मेरे ही सामने कैलाश की सर जी ने गांड मार दी थी तो मुझे अपनी गांड में बहुत खुजली होने लगी थी। मैं कैलाश और सर जी के साथ कॉलेज आ गया। मैं क्लास में था, पौराणिक सर ही क्लास ले रहे थे, मेरा मन बहुत बेचैन था। मेरी आँखों के सामने बार-बार उनका लंड घूम रहा था।

कैलाश की गांड में सर का खड़ा लंड घुसता, बाहर निकलता, गांड में अन्दर-बाहर होता, मस्त लम्बा-मोटा.. मुझे मेरा मनपसंद लंड याद आ रहा था।

सर ने पहली बार मुझे ही पटाया था, मैंने ही पहली बार हाथ में उनका लंड पकड़ा था। फिर मैंने ही उन्हें और दूसरे लौंडों की गांड दिलवाई थी पर अब वे मेरी ही मारना भूल गए थे।

क्लास के लौंडे मुझ पर मरते थे, पर कोई मेरी मारने की बात नहीं करता था। जो लौंडे मैंने पटाए, वे मुझसे मरवाने को तैयार रहते थे, पर मैं भी संकोच में उनसे ज्यादा नहीं कह पाता कि गांड मराने में मुझे बहुत मजा आता है।

क्यों दोस्तो.. क्या मैं गलत कह रहा हूँ? मेरे खयाल से गांड मराना सबसे आनन्ददायक काम है, अपन चुपचाप लेटे हैं.. कोई अपने ऊपर चढ़ा है.. गांड मारने में मेहनत कर रहा है, लगा धक्के पर धक्के देने.. और मजा अपने को आ रहा है। गांड मारने वाला बार बार पूछ रहा है कि लग तो नहीं रही! खूब मक्खन लगा रहा है, बार-बार चूमा-चाटी में लगा है, गांड पर चोट पर चोट दे रहा है, भाई पूरी ताकत से लगा है और चूतिया बनाने को कह रहा है कि और धीरे करूँ.. कहो तो बन्द कर दूँ।

जबकि आप जानते हैं.. कि जब तक बन्दा झड़ नहीं जाएगा, साला छोड़ेगा नहीं!

पहले भी यार ने आपको पटाने में पूरा जोर लगाया। मैंने खूब गांड दिखाई, पर असल में वे पहले मुझसे मरवा कर झड़ जाते और ढीले पड़ जाते। खुद तो मेरे लंड के आशिक हो जाते, पर मेरी गांड भूखी रह जाती।

एक बात और थी, मैं अब 18 साल का एक मस्त लड़का था, पांच फीट सात इंच लम्बा, रोज सबेरे दौड़ता था और हल्की कसरत भी करता था। मैंने शरीर से तगड़ा दिखता था.. गोरा सुन्दर तो था ही। जवानी के लक्षण के रूप में मेरे चेहरे पर हल्के बाल भी आ गए थे। कुल मिला कर मैं स्मार्ट हो गया था.. और मुझसे लौंडे पट गए थे। मैंने उनकी खूब मारी भी, पर मेरे ये साथी जाने क्यों.. मेरी गांड मारने में झिझकते थे।

इसके लिए मुझे अतिरिक्त प्रयास करना पड़ा। दोस्तो, मेरे इस प्रयास के बारे में आपका क्या ख्याल है कि मैंने इसे कैसे किया.

. सुनें।

जिन दोस्तों को मेरी तरह गांड मराने का शौक है.. वे मेरी परेशानी समझ सकते हैं और जो मेरी इस परेशानी को समझ रहे हैं.. मैं उनसे पूछता हूँ कि क्या मैं गलत कह रहा हूँ!

हुआ यूं कि मेरी क्लास में मेरा एक दोस्त था प्रकाश.. उसने क्लास के बाद मुझसे कहा- चल यार.. पानी पी कर आते हैं।

हम असल में पानी पीने कॉलेज से थोड़ा दूर एक कुंए पर पास खेतों में जाते थे। हम दोनों वहाँ गए, मैंने कुंए से पानी खींचा और उसे पिलाया, फिर खुद भी पिया। वह बोला- चल थोड़ा आगे तक घूम आएं।

हम दोनों थोड़ा आगे एक पीपल के पेड़ तक गए.. जिसके चारों तरफ चबूतरा बना था. उस दोनों उस पर बैठ गए।

मेरा दोस्त नाजुक सा गोरा माशूक लौंडा था, हम दोनों जवान हो चुके थे। मैंने उसका एक चुम्बन ले लिया, उसने भी अपने गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। मैंने उसका लंड पैंट के ऊपर से सहलाया, तो उसने मेरे पैंट की चेन खोल कर मेरा लंड निकाल लिया और सड़का मारने लगा।

मैंने मजा लेते हुए कहा- अबे धीरे! यह कह कर मैं भी उसका लंड निकाल कर सहलाने लगा।

फिर मैंने उसका पैंट पूरी तरह खोल कर नीचे खिसका दिया। अब वह बिल्कुल नंगा हो चुका था, वह मेरी पैंट खोलने लगा.. जो मैंने खुद उतार दी।

मेरे सहलाने से उसका लंड खड़ा हो चुका था और झटके ले रहा था।

मैंने उसके हाथ से अपना लंड छुड़ाया और उसके लंड के ऊपर अपनी गांड रख कर उसकी गोद में बैठ गया। मैंने उसका लंड अपनी गांड पर टिकाया, पर वह बोला- लेट जा यार.. मैं ऐसे नहीं कर पाऊंगा।

फिर मैं वहीं चबूतरे पर उल्टा लेट गया, मेरी गांड बहुत कुलबुला रही थी, ऐसा लग रहा था कि ये जल्दी से डाल दे। उसने अपनी पैंट उतार कर एक तरफ रखी, वह बड़े इत्मीनान से धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था.. मुझे जल्दी थी।

आखिर वह मेरे ऊपर बैठ गया.. उसने अपना लंड थूक लगा कर मेरी गांड पर टिकाया तो मैंने टांगें चौड़ी कर लीं।

फिर उसने लंड डाला.. अहा.. दोस्तो, मैं इस सुख के लिए कब से तरस रहा था। मुझे लग रहा था कि लंड को जल्दी से अन्दर तक पेल दे.. और वो साला देर लगा रहा था।

आखिर उसने धक्का दे दिया.. तो उसका लंड मेरी गांड में घुस गया, मैंने गांड उचका कर उसका पूरा लंड अपनी गांड में गपक लिया। उम्म्ह… अहह… हय… याह… बहुत दिनों के बाद गांड को लंड मिला था, मैं उचक-उचक कर गांड उसके लंड से रगड़ने लगा।

फिर मैंने कहा- थोड़ा ठहर.
. पर प्रकाश ने लंड बाहर निकाल लिया। मैंने पूछा- क्या हुआ? वह बोला- तुमने कहा रुको। मैंने कहा- यार.. रुकने को कहा था, लंड बाहर निकालने को नहीं.. फिर से डालो!

तब उसने फिर से लंड पेल डाला, वो मेरे चूतड़ पकड़कर बोला- तेरे पुट्ठे बहुत ताकतवर और टाइट हैं। मैंने मजा लेते हुए कहा- तू मार मार कर गांड ढीली कर दे.. फाड़ दे!

उसने फिर थूक लगा कर अपना लंड मेरी गांड में पूरा पेल दिया और धक्के देने लगा। अब प्रकाश के धक्के कुछ ज्यादा मजेदार हो गए थे.. वो पूरे जोश में आ गया था और मेरी गांड को जोर-जोर से रगड़ रहा था। मैं बोला- आह्ह.. और जोर से रगड़ डाल.. फाड़ दे!

वह हांफने लगा.. उसका शरीर गर्म हो गया, दिल की धड़कनें बढ़ गईं, वो बोला- भैया जी बोलो मत.. टांगें फैलाए रहो। उसके धक्के तेज हो गए.. मुझे बहुत मजा आ रहा था, बहुत दिनों के बाद गांड को लंड नसीब हुआ था।

फिर वह चिपक कर रह गया.. वो अब झड़ रहा था। कुछ पल बाद वो अलग हुआ और चबूतरे के फर्श पर वह औंधा लेट गया। थोड़ी देर बाद वो मुस्करा कर मेरी ओर देखने लगा।

मुझे समझ आ गया था कि अब इसकी गांड कुलबुला रही है।

कहानी जारी है।

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