हिंदी पोर्न स्टोरी मेरे बेटे के दोस्त के साथ मेरी चुदाई की

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हैलो दोस्तो.. मेरा नाम करिमा मुल्ला है। मैं आज आपको एक सच्ची हिंदी पोर्न स्टोरी बताने जा रही हूँ। मेरे घर में मैं 45 वर्षीया, मेरे पति 46 वर्षीय, मेरा बेटा 22 वर्षीय, उसकी बीवी 21 वर्षीया, मेरा छोटा बेटा 18 वर्षीय.. हम सब रहते हैं।

पहले मैं खुद के बारे में बता देती हूँ। मैं एक बहुत ही गर्म और चुदासी औरत हूँ.. और मेरे बहुत सारे लोगों से जिस्मानी ताल्लुकात थे.. लेकिन अब नहीं हैं।

मेरे पति एक मल्टीनेशनल कम्पनी में काम करते हैं। मेरे बेटे का एक गैराज है। मेरा छोटा बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है।

अब मैं आपको मेरी असली सेक्स स्टोरी बताती हूँ। ये चार महीने पहले की बात है, मैं बाज़ार गई थी। जब मैं घर आई तो देखा मेरा छोटा बेटा कंप्यूटर से खेल रहा था। तभी हमारे बाथरूम से मेरे बेटे का दोस्त अविनाश निकला। वो दोनों अक्सर कंप्यूटर पर गेम खेलते थे। मैं फ्रेश होने के लिए बाथरूम में गई.. तभी मेरी नज़र मेरी ब्रा पर पड़ी। मुझे अच्छे से याद था कि मैंने मेरी ब्रा बाहर सूखने डाली थी.. लेकिन अब वो यहाँ बाथरूम में कहाँ से आई। मैंने मेरी ब्रा देखी तब मुझे उसमे कोई चिपचिपी सी चीज़ लगी हुई मिली। मुझे पता चल गया कि ये वीर्य है और पक्का अविनाश ने ही मेरी ब्रा में मुठ मारी थी।

मैंने बाहर आकर देखा तो अविनाश जा चुका था। मुझे बड़ा गुस्सा आया.. लेकिन मेरे मन में मुझे कहीं अच्छा भी लग रहा था। वैसे भी जब से मेरे बड़े बेटे की शादी हुई है, तब से मेरे पति मुझे चोदते नहीं हैं। मुझे लगा शायद अविनाश मेरी प्यास मिटा सकता है।

मेरी बहू प्रेगनेन्ट थी तो वो भी अपने मायके गई है। बेटा और पति दिन भर घर पर नहीं होते हैं। छोटे बेटे को पैसे दूँगी तो वो भी बाहर खेलने चला जाएगा। ये सब विचार करके मैंने तय किया कि अब अविनाश से ही मैं अपनी चुत की प्यास बुझाऊंगी।

अगले दिन मैंने मेरे छोटे बेटे को पैसे दिए और वो बाहर खेलने चला गया। मैंने साड़ी पहन ली, साथ ही मैंने बहुत ही खुले और गहरे गले वाला ब्लाउज पहना था, जिसमें से मेरे आधे से अधिक मम्मे साफ़ झलक रहे थे।

अब मैंने अविनाश को बुलाया और कहा कि मेरे कमरे की टांड पर से पतीला निकाल के दे दे।

अविनाश आकर स्टूल पर खड़ा हो गया.. उसका लंड मेरे मुँह के सामने था। वो टोप निकालने लगा.. उसने भी मेरे खुले स्तनों को देख लिया था। उसे ऊपर से मेरा पूरा वक्षस्थल साफ़ दिख रहा था और मैं पल्लू गिराते हुए उसे अपने हाहाकारी दूध दिखा भी रही थी। मैंने ध्यान से देखा उसका लंड खड़ा हो रहा था, उससे कोई कंट्रोल नहीं हो रहा था।

मैंने उसकी पेंट में लंड का उभार देखा और उससे पूछा- ये क्या है अवी? वो भी ज़रा सा डर गया और नीचे उतर कर अपने घर जाने लगा। मैंने उसे हाथ पकड़ कर रोका और कहा- मेरे ये उभार देख कर खड़ा हो गया ना तेरा?

वो और भी डर गया.. मैंने उसका पूरा हाथ ठीक से पकड़ा और उसे रोक लिया। फिर मैंने दरवाज़ा बंद किया और उससे कहा- डर मत अवी, मुझे सब पता है.. उस दिन तूने मेरी ब्रा में मुठ मारी थी ना.. तेरा सारा माल उस पर ही गिर गया था। उसने कहा- नहीं आंटी, आप यह क्या बोल रही हैं? मैंने थोड़ा जोर दिया और कहा- देख, मुझे सब पता है.. अगर तूने मुठ मारी है तो भी कोई प्राब्लम नहीं है.. यह तो सब करते हैं। वो सॉरी बोलने लगा।

मैंने कहा- ब्रा में तुझे मुठ मारने में इतना मज़ा आया, अगर रियल में मेरे स्तन देखेगा तो क्या होगा तेरा? ये कहते हुए मैंने उसका लंड पकड़ लिया.. वो एकदम से शॉक हो गया। मैंने कहा- तेरे इस छोटे से लंड का क्या हाल होगा जब ये मेरे स्तन देखेगा..? बोल देखेगा क्या मेरे बड़े-बड़े स्तन? अब तक वो भी कुछ समझ चुका था सो उसने भी ‘हाँ’ बोल दिया।

मैंने अपना पल्लू नीचे किया और ब्लाउज खोल दिया। उसका लंड खड़ा हो चुका था। मैंने कहा- तेरे इस लंड को अभी बाहर निकाल दे.. वरना पतलून फाड़ के निकल जाएगा। उसने अपना लंड निकाला.. छोटा, पतला सा लंड था और उसका पानी गिर रहा था। मैंने उसे पूछा- कभी चुदाई नहीं की तूने? उसने कहा- नहीं.. कोई मिली ही नहीं.. मैंने उसका लंड पकड़ा और हिलाया.. उसने पूछा- आंटी, क्या मैं आपके स्तनों को हाथ लगा लूँ..? मैंने हंसकर जवाब दिया- तेरे लिए ही निकाले हैं ना राजा..!

वो एक भूखे जानवर की तरह मेरे स्तन चाटने लगा, चूसने लगा… मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैं उसका लंड हिला रही थी। थोड़ी ही देर में उसका पानी निकल गया, वो सॉरी बोलने लगा। उसका माल मेरे हाथ में गिर गया… और कुछ मेरी साड़ी पर भी गिर गया।

मैंने उससे कहा- जा बाथरूम में जाकर अपना लंड साफ़ करके आ..! वो बाथरूम में चला गया।

मैंने अपनी साड़ी उतार दी, अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पेटीकोट में थी। मैं बेड पर टांगें फैला कर लेट गई.. अविनाश बाथरूम से आया।

मैंने उससे कहा- देख अवी, अगर तू चाहे तो मुझे ऐसे ही छोड़ कर अपने घर जा सकता है.. मैं तुझे नहीं रोकूंगी.. और चाहे तो तू अभी मुझे चोद भी सकता है.. मैं उसमें भी कुछ नहीं बोलूँगी… फ़ैसला तेरा है, जो करना है वो कर! अविनाश ने जवाब दिया- आप जैसी मस्त माल को बिना चोदे कहाँ जाऊं.. आज पहली बार मुझे चुदाई का मौका मिला है। मैं तो आज आपकी जम कर चुदाई करूँगा.. बिल्कुल एक रंडी छिनाल की तरह चोदूंगा।

उसके मुँह से इतनी गंदी बातें मुझे अच्छी लग रही थीं, मैंने कहा- तो फिर हो जा नंगा और चढ़ जा मेरे ऊपर.. वो भी जल्दी से पूरा नंगा हो गया और मेरे ऊपर चढ़ गया। वो मुझसे छोटा था इसीलिए वो बड़े मज़े से मुझे किस कर रहा था। मैं भी उसका साथ दे रही थी.. और एक हाथ से उसका लंड पकड़ रही थी। वो भी मेरे स्तन दबा रहा था.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

मैंने उससे रुकने को कहा और अपनी ब्रा उतार फेंकी। मेरे बड़े-बड़े स्तन देखकर अवी पागल हो गया। वो पागलों की तरह मेरे स्तन चूसने लगा। साले ने मेरा पेटीकोट भी उतार दिया.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। हम दोनों खड़े होकर एक-दूसरे को चाट रहे थे। वो छोटा था इसीलिए उसका मुँह मेरे स्तन तक ही आ रहा था। मैं उसे देख कर हंस रही थी… वो मेरे स्तन चूसे जा रहा था।

अब मैंने उससे कहा- साले अब कितना चूसेगा इसको.. नीचे देख, मेरी चुत भी है.. उसे कौन चाटेगा भोसड़ी के? मैं बेड पर लेट गई, वो मेरी जाँघों के बीच में आ गया। उसे पता ही नहीं था कि करना क्या है। मैंने कहा- मेरी चुत को खोल और एक उंगली अन्दर डाल दे और चाटना शुरू कर..

उसने वैसे ही किया.. क्या बताऊं बहुत मज़ा आ रहा था। बहुत दिनों बाद कोई चुत चाट रहा था। वो भी मस्ती से चुत को चपर-चपर चाट रहा था।

अब मुझसे सहा नहीं जा रहा था.. मैंने उससे कहा- अवी रुक जा, अब तू अपनी रंडी आंटी को चोद डाल.. जहाँ तूने उंगली डाली है.. वहीं अपना लंड डाल दे.. और जोर से चोदना। उसने कहा- आंटी, बिना कन्डोम के कैसे चोदूँ? मैंने कहा- मेरी अल्मारी में है कन्डोम.. जा निकाल का ले आ।

उसने जल्दी से कन्डोम निकाला और पहनने लगा। उससे कन्डोम पहनना भी नहीं आ रहा था। यहाँ मैं चुदास से पागल हो रही थी।

मुझसे सहा नहीं गया.. मैंने कन्डोम लिया और उसे पहना दिया और कहा- मादरचोद, तुझे कन्डोम भी नहीं पहनना आता.. अब आ जल्दी और चोद मुझे..! वो झपट कर मेरे ऊपर आया और मुझे चोदने लगा।

सच में दोस्तो, उसके लंड की सख्ती से मुझे बहुत मज़ा आ गया। इतने सालों में पहली बार एक लंड मिला था.. छोटा था, लेकिन ठीक था। वो चोद रहा था.. तभी उसका पानी गिर गया।

फिर भी मैंने उसे नहीं जाने दिया। मैंने उसको नीचे लिटाया और मैं उसके लंड पर बैठ गई। मेरे हिलते हुए स्तन को वो चाटने लगा.. उसका लंड वैसे ही फिर से खड़ा होने लगा। मैं आज अपनी प्यास बुझाने वाली थी। थोड़ी ही देर में मेरा भी पानी निकल गया.. मेरा पानी पूरा उसके लंड और गोटियों पर गिर गया।

मैं संतुष्ट हो चुकी थी.. लेकिन अवी का लंड अभी भी खड़ा था.. उसने कन्डोम निकाला और फेंक दिया। उसके लंड पर उसका पानी लगा था.. मैंने उसका लंड मुँह में ले लिया। वो खड़े-खड़े ही मेरे मुँह को चोदने लगा.. और उसने पूरा पानी मेरे मुँह में ही गिरा दिया। उसका कोरा पानी भी जबरदस्त था।

हम दोनों संतुष्ट हो चुके थे.. एक घंटे में हम दोनों ने चुदाई की थी। अब हम दोनों बेड पर लेट गए.. अवी मेरे स्तन अभी भी चूस रहा था।

मैंने उससे कहा- आज जितना मज़ा आया, कल भी उतना ही मज़ा आएगा.. अब से रोज़ आना.. रोज़ तुझे चुत चोदने दूँगी। थोड़ी देर बाद अवी अपने घर चला गया।

मुझे लगा अब रोज़ अवी के साथ चुदाऊँगी… लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दूसरे दिन मेरे साथ कुछ अलग हुआ। वो मैं आपको अगली हिंदी पोर्न स्टोरी में बताऊंगी। [email protected]

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